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भाग 3: सविनय अवज्ञा आंदोलन की ओर और नमक यात्रा

कक्षा 10 इतिहास की हमारी इस यात्रा में आपका पुनः स्वागत है। पिछले भाग में हमने जाना था कि चौरी-चौरा की हिंसक घटना के कारण गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को अचानक रोक दिया था। आंदोलन रुकने के बाद देश में थोड़ी निराशा छा गई थी। कुछ नेता चुनाव लड़कर अंग्रेजी परिषदों में जाना चाहते थे, […]

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भाग 2: असहयोग आंदोलन: शहरों से लेकर गाँवों तक विद्रोह

पिछले भाग में हमने जाना था कि कैसे जलियाँवाला बाग हत्याकांड और रॉलट एक्ट ने पूरे देश में अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ गुस्सा भर दिया था। गांधीजी को लगने लगा था कि अब भारत में एक बहुत बड़ा और व्यापक जन-आंदोलन खड़ा करने का समय आ गया है। लेकिन कोई भी बड़ा आंदोलन तब तक […]

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भाग 1: प्रथम विश्व युद्ध, सत्याग्रह का विचार और रॉलट एक्ट

कक्षा 10 इतिहास के अध्याय ‘भारत में राष्ट्रवाद’ के पहले भाग में आपका बहुत-बहुत स्वागत है। पिछले अध्याय में हमने यूरोप में राष्ट्रवाद के बारे में पढ़ा था। अब हम जानेंगे कि हमारे अपने देश भारत में आज़ादी और राष्ट्रवाद की लहर कैसे उठी। अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष के दौरान भारत के लोग आपसी एकता […]

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अध्याय 2: भारत में राष्ट्रवाद – सम्पूर्ण व्याख्या

कक्षा 10 इतिहास की हमारी इस कक्षा में आपका बहुत-बहुत स्वागत है। पिछले अध्याय में हमने ‘यूरोप में राष्ट्रवाद’ के बारे में पढ़ा था। अब समय आ गया है कि हम अपने देश, यानी भारत के स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली गाथा को समझें। अंग्रेजों की गुलामी और उनके अत्याचारों ने भारत के अलग-अलग धर्मों, जातियों […]

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भाग 6: राष्ट्र की दृश्य-कल्पना और साम्राज्यवाद | U.P Board History Class X

पिछले भागों में हमने देखा कि कैसे क्रांतियों और युद्धों के जरिए जर्मनी और इटली जैसे नए राष्ट्रों का निर्माण हुआ। लेकिन ज़रा सोचिए, किसी राजा का चित्र बनाना तो आसान है, पर एक ‘राष्ट्र’ (देश) का चेहरा कैसा होता है? लोगों के दिलों में अपने देश के प्रति एक चेहरा या छवि बसाने के […]

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भाग 5: जर्मनी और इटली का एकीकरण कैसे हुआ?

पिछले भाग में हमने 1830 से 1848 के बीच की क्रांतियों और रूमानीवाद के बारे में पढ़ा था, जहाँ आम लोगों ने आज़ादी और राष्ट्र-निर्माण के लिए आवाज़ उठाई थी। लेकिन क्या यह आम जनता और मध्यवर्ग का प्रयास सफल हो पाया? 1848 के बाद यूरोप में एक बड़ा बदलाव आया। अब राष्ट्रवाद का इस्तेमाल […]

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भाग 4: क्रांतियों का युग (1830-1848) और रूमानी कल्पना

पिछले भाग में हमने जाना था कि 1815 के बाद यूरोप के राजाओं ने रूढ़िवाद की वापसी की और क्रांतिकारियों पर जुल्म ढाए। लेकिन आज़ादी की वह आग बुझी नहीं थी! जैसे-जैसे रूढ़िवादी व्यवस्थाओं ने अपनी ताकत मज़बूत करने की कोशिश की, वैसे-वैसे उदारवाद और राष्ट्रवाद ने भी ज़ोर पकड़ा। 1830 से 1848 के बीच […]

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भाग 3: 1815 के बाद नया रूढ़िवाद और क्रांतिकारी| UP Board Class X History

पिछले भाग में हमने जाना था कि कैसे यूरोप में एक नए मध्यवर्ग का उदय हुआ और ‘उदारवादी राष्ट्रवाद’ ने लोगों के दिलों में आज़ादी की भावना जगाई। लेकिन क्या फ्रांस और यूरोप के राजा इतनी आसानी से अपनी सत्ता छोड़ने वाले थे? बिल्कुल नहीं! जब 1815 में नेपोलियन की हार हुई, तो यूरोप के […]

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भाग 2: यूरोप में राष्ट्रवाद का निर्माण और नया मध्यवर्ग

आज हम जानेंगे कि 18वीं सदी का यूरोप कैसा था। क्या वहाँ आज की तरह जर्मनी या इटली जैसे देश थे? बिल्कुल नहीं! पूरा यूरोप राजाओं की जागीरों और छोटे-छोटे राज्यों में बँटा हुआ था। तो फिर लोगों के मन में ‘हम एक राष्ट्र हैं’ यह विचार कैसे आया? आइए, कुलीन वर्ग, नए मध्यवर्ग और […]

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भाग 1: फ्रेडरिक सॉरयू का कल्पनादर्श और फ्रांसीसी क्रांति

आज हम इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण और रोचक अध्याय—‘यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय’ की शुरुआत करने जा रहे हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि आज हम जिस तरह के देशों (जैसे भारत, फ्रांस, जर्मनी) को देखते हैं, क्या वे हमेशा से ऐसे ही थे? बिल्कुल नहीं! पहले दुनिया में राजा-महाराजाओं के बड़े-बड़े साम्राज्य हुआ […]

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