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भाग 2: संसाधनों का विकास और सतत् पोषणीय विकास

यूपी बोर्ड कक्षा 10 भूगोल के अध्याय 1 ‘संसाधन एवं विकास’ के इस दूसरे भाग में हम संसाधनों के विकास और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण विषयों का अध्ययन करेंगे। सतत् पोषणीय विकास, रियो डी जेनेरो पृथ्वी सम्मेलन और एजेंडा 21 जैसे विषय बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। आइए इन्हें आसान भाषा में समझते हैं।

संसाधनों का विकास क्यों आवश्यक है?

संसाधन मनुष्य के जीवन यापन और जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अति आवश्यक हैं। पहले ऐसा विश्वास किया जाता था कि संसाधन प्रकृति की निःशुल्क (मुफ्त) देन हैं। इसके परिणामस्वरूप, मानव ने इनका अंधाधुंध उपयोग किया है, जिससे आज हमारी पृथ्वी पर कई गंभीर समस्याएँ पैदा हो गई हैं 。

संसाधनों के अंधाधुंध उपयोग के परिणाम

संसाधनों के अत्यधिक और गलत इस्तेमाल से निम्नलिखित मुख्य समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं :

  • कुछ व्यक्तियों के लालचवश संसाधनों का भारी ह्रास (कमी) हुआ है ।
  • संसाधन समाज के कुछ ही लोगों के हाथ में आ गए हैं। इससे समाज दो हिस्सों—संसाधन संपन्न (अमीर) और संसाधनहीन (गरीब)—में बँट गया है ।
  • संसाधनों के अंधाधुंध शोषण से वैश्विक पारिस्थितिकी संकट पैदा हो गया है । इसके मुख्य उदाहरण हैं: भूमंडलीय तापन (ग्लोबल वार्मिंग), ओजोन परत अवक्षय, पर्यावरण प्रदूषण और भूमि निम्नीकरण ।

संसाधनों का न्यायसंगत बँटवारा

मानव जीवन की गुणवत्ता और विश्व शांति बनाए रखने के लिए संसाधनों का समाज में न्यायसंगत (समान) बँटवारा बहुत आवश्यक हो गया है । यदि कुछ ही व्यक्तियों और देशों द्वारा संसाधनों का वर्तमान दोहन जारी रहा, तो हमारी पृथ्वी का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा । इसलिए हर तरह के जीवन का अस्तित्व बनाए रखने के लिए संसाधनों के उपयोग की सही योजना बनाना बहुत ज़रूरी है ।

सतत् पोषणीय विकास क्या है?

सतत् पोषणीय आर्थिक विकास का अर्थ है कि विकास ऐसा हो जो पर्यावरण को बिना नुकसान पहुँचाए किया जाए । साथ ही, वर्तमान विकास की प्रक्रिया भविष्य की आने वाली पीढ़ियों की आवश्यकता की अवहेलना (अनदेखी) न करे ।

रियो डी जेनेरो पृथ्वी सम्मेलन

पर्यावरण संरक्षण के लिए जून 1992 में ब्राज़ील के शहर ‘रियो डी जेनेरो’ में प्रथम अंतर्राष्ट्रीय पृथ्वी सम्मेलन आयोजित किया गया था । इस सम्मेलन में 100 से भी अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्ष एकत्रित हुए थे ।

इस सम्मेलन का आयोजन विश्व स्तर पर उभरते पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक-आर्थिक विकास की समस्याओं का हल ढूँढ़ने के लिए किया गया था । यहाँ एकत्रित नेताओं ने भूमंडलीय जलवायु परिवर्तन और जैविक विविधता पर एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। रियो सम्मेलन में ‘भूमंडलीय वन सिद्धांतों’ पर भी सहमति जताई गई।

एजेंडा इक्कीस का उद्देश्य

1992 में ब्राज़ील के शहर रियो डी जेनेरो में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विकास सम्मेलन (UNCED) के तत्वावधान में राष्ट्राध्यक्षों द्वारा एक घोषणा को स्वीकृति दी गई, जिसे ‘एजेंडा 21’ कहा जाता है ।

इसका मुख्य उद्देश्य भूमंडलीय सतत् पोषणीय विकास हासिल करना है। यह एक ऐसी कार्यसूची है जिसका उद्देश्य समान हितों, पारस्परिक आवश्यकताओं और सम्मिलित ज़िम्मेदारियों के अनुसार विश्व सहयोग के द्वारा पर्यावरणीय क्षति, गरीबी और रोगों से निपटना है । ‘एजेंडा 21’ का मुख्य उद्देश्य यह है कि प्रत्येक स्थानीय निकाय अपना स्थानीय एजेंडा 21 तैयार करे।

👨‍🏫 शिक्षक की सलाह: बच्चों, बोर्ड परीक्षा में “सतत् पोषणीय विकास की परिभाषा”, “पृथ्वी सम्मेलन 1992” और “एजेंडा 21 क्या है?” अक्सर लघु उत्तरीय और बहुविकल्पीय प्रश्नों में पूछे जाते हैं। इन्हें अपनी कॉपी में बिंदुवार (Point-wise) लिख लें।

अब खेलें: संसाधनों का विकास क्विज़

नीचे दिए गए ‘Play Quiz’ बटन पर क्लिक करें और सतत् पोषणीय विकास, रियो पृथ्वी सम्मेलन और एजेंडा 21 पर आधारित इन 20 महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास करें!

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महत्वपूर्ण भूगोल परिभाषाएँ और व्याख्या

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