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अध्याय 2: वन एवं वन्य जीव संसाधन – सम्पूर्ण व्याख्या

हमारी पृथ्वी पर सूक्ष्म जीवाणुओं, बैक्टीरिया, जोंक से लेकर वटवृक्ष, हाथी और ब्लू व्हेल तक करोड़ों जीवधारी निवास करते हैं। यह पूरा आवासीय स्थल जिस पर हम रहते हैं, अत्यधिक जैव विविधताओं से भरा हुआ है। मानव और ये सभी जीवधारी मिलकर एक बेहद जटिल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करते हैं, जिसमें हम केवल एक हिस्सा मात्र हैं। हम अपने अस्तित्व और दैनिक आवश्यकताओं (जैसे हवा, पानी और मिट्टी) के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसी तंत्र पर निर्भर हैं। इस अध्याय में हम भारत की समृद्ध जैव विविधता, वनों और वन्य जीवों के प्रकार, और उनके संरक्षण के उपायों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

भारत में वनस्पतिजात और प्राणिजात

भारत दुनिया के सबसे समृद्ध जैव विविधता वाले देशों में से एक है। यहाँ विश्व की लगभग 8 प्रतिशत जैव उपजातियाँ (लगभग 16 लाख) पाई जाती हैं। हमारे देश का वनस्पति और वन्य जीवन हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। फिर भी, पर्यावरण के प्रति हमारी लापरवाही और वनों की अंधाधुंध कटाई ने इन प्राकृतिक संसाधनों पर भारी दबाव डाला है, जिससे कई प्रजातियाँ विलुप्त होने की कगार पर पहुँच गई हैं। चीता, गुलाबी सिर वाली बत्तख और पहाड़ी कोयल जैसे जीव इसके ज्वलंत उदाहरण हैं।

वन और वन्य जीवों का संरक्षण क्यों आवश्यक है?

वन और वन्य जीवों के तेजी से हो रहे विनाश के कारण इनका संरक्षण बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। संरक्षण से हमारी पारिस्थितिकी विविधता सुरक्षित रहती है और जल, वायु, तथा मृदा जैसे हमारे जीवन साध्य संसाधन बचे रहते हैं। इसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए 1972 में ‘भारतीय वन्यजीवन (रक्षण) अधिनियम’ लागू किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य संकटग्रस्त जातियों को बचाना, शिकार पर प्रतिबंध लगाना और वन्य जीवों के आवास को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना था। ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ जैसी योजनाएँ भी इसी दिशा में एक सफल कदम हैं।

वनों के प्रकार और वितरण

भारत में वनों और वन्य जीव संसाधनों के प्रबंधन के लिए इन्हें मुख्य रूप से तीन भागों में वर्गीकृत किया गया है:

  • आरक्षित वन: देश के आधे से अधिक वन क्षेत्र आरक्षित घोषित किए गए हैं। ये वन और वन्य जीवों के संरक्षण के लिए सबसे मूल्यवान माने जाते हैं।
  • रक्षित वन: इन वनों को और अधिक नष्ट होने से बचाने के लिए सुरक्षित रखा गया है। देश के कुल वन क्षेत्र का एक तिहाई हिस्सा रक्षित है।
  • अवर्गीकृत वन: वे सभी वन और बंजर भूमि जो सरकार, समुदायों या निजी व्यक्तियों के स्वामित्व में होते हैं, अवर्गीकृत वन कहलाते हैं।

इस अध्याय के महत्वपूर्ण भाग

अध्याय को विस्तार से और आसानी से समझने के लिए इसे हमने छोटे-छोटे भागों (माइक्रो-लेसन्स) में विभाजित किया है। नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके आप प्रत्येक विषय को गहराई से पढ़ सकते हैं:

👨‍🏫 शिक्षक की सलाह: बोर्ड परीक्षा में ‘भारतीय वन्यजीवन (रक्षण) अधिनियम 1972’ और ‘बाघ परियोजना (Project Tiger)’ पर प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं। इसके अतिरिक्त भारत के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों के नाम और उनके राज्यों को मानचित्र (Map) कार्य के लिए अच्छी तरह से तैयार कर लें।

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