कक्षा 10 इतिहास के अंतिम अध्याय ‘मुद्रण संस्कृति और आधुनिक दुनिया’ के पहले भाग में आपका बहुत-बहुत स्वागत है। आज हमारे चारों तरफ छपी हुई चीज़ें हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब दुनिया में छपाई (Printing) की मशीन नहीं थी, तब किताबें कैसे तैयार होती थीं? मुद्रण की सबसे पहली तकनीक यूरोप […]
Read Moreअध्याय 5: मुद्रण संस्कृति और आधुनिक दुनिया – सम्पूर्ण व्याख्या
कक्षा 10 इतिहास की हमारी इस शानदार कक्षा में आपका बहुत-बहुत स्वागत है। आज हम अपनी किताब का अंतिम और सबसे रोचक अध्याय शुरू करने जा रहे हैं—‘मुद्रण संस्कृति और आधुनिक दुनिया’। आज हमारे चारों तरफ छपी हुई चीज़ें हैं—किताबें, अख़बार, विज्ञापन, कैलेंडर और पत्रिकाएँ। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब दुनिया में […]
Read Moreभाग 5: औद्योगिक विकास की विशेषताएँ और वस्तुओं का विज्ञापन
पिछले भाग में हमने भारत में खुले शुरुआती कारखानों और उद्यमियों के बारे में जाना था। आज के इस अंतिम भाग में हम जानेंगे कि बीसवीं सदी में भारत का औद्योगिक विकास कैसे हुआ। इसके साथ ही हम यह भी समझेंगे कि जब कारखानों में ढेरों सामान बनने लगा, तो ब्रिटिश और भारतीय निर्माताओं ने […]
Read Moreभाग 4: भारत में शुरुआती कारखाने और उद्यमी
पिछले भाग में हमने देखा था कि ईस्ट इंडिया कंपनी के गुमाश्तों और ब्रिटिश मिलों के कारण भारतीय बुनकरों का कैसे पतन हो गया। लेकिन क्या भारत में कारखाने नहीं खुले? बिल्कुल खुले! उन्नीसवीं सदी के मध्य से भारत में भी औद्योगिक विकास शुरू हो गया था। आज के इस भाग में हम जानेंगे कि […]
Read Moreभाग 3: भारतीय कपड़े का युग और गुमाश्तों की भूमिका
पिछले भाग में हमने जाना था कि उन्नीसवीं सदी में हाथ का श्रम मशीनों से कैसे टकरा रहा था और मज़दूरों का जीवन कितना कठिन था। अब हम यूरोप से निकलकर अपने देश ‘भारत’ की तरफ चलते हैं। कारखानों और मशीनों के आने से पहले पूरी दुनिया में भारत के सूती और रेशमी कपड़ों का […]
Read Moreभाग 2: हाथ का श्रम, वाष्प शक्ति और मज़दूरों का जीवन
हमें लगता है कि जब मशीनें आ गईं, तो सारे उद्योगपतियों ने तुरंत मशीनें खरीद ली होंगी और हाथ से काम करना बंद कर दिया होगा। लेकिन सच तो कुछ और ही था! उन्नीसवीं सदी के विक्टोरिया कालीन ब्रिटेन में उद्योगपति मशीनों से ज़्यादा इंसानी हाथों को पसंद करते थे। आइए जानते हैं ऐसा क्यों […]
Read Moreभाग 1: पूर्व-औद्योगीकरण और कारखानों का उदय
औद्योगीकरण का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियाँ, चिमनियाँ और मशीनें आने लगती हैं। हमें लगता है कि दुनिया में कपड़े और अन्य सामान मशीनों के आने के बाद ही बनने शुरू हुए। लेकिन क्या कारखानों के खुलने से पहले दुनिया में कोई सामान नहीं बनता था? बिल्कुल बनता था! आइए इतिहास के […]
Read Moreअध्याय 4: औद्योगीकरण का युग – सम्पूर्ण व्याख्या
नमस्कार विद्यार्थियों! कक्षा 10 इतिहास की हमारी इस शानदार कक्षा में आपका बहुत-बहुत स्वागत है। आज हम इतिहास का एक नया और मशीनी दुनिया से जुड़ा अध्याय शुरू करने जा रहे हैं—‘औद्योगीकरण का युग’। जब भी हम ‘औद्योगीकरण’ के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियाँ, चिमनियाँ और मशीनों का धुआँ आने […]
Read Moreभाग 5: विश्व अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण: ब्रेटन वुड्स और वैश्वीकरण
कक्षा 10 इतिहास की हमारी इस यात्रा के अंतिम भाग में आपका बहुत-बहुत स्वागत है। पिछले भाग में हमने प्रथम विश्व युद्ध और भयंकर महामंदी के बारे में पढ़ा था, जिसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था। लेकिन मुसीबतें यहीं खत्म नहीं हुईं। महामंदी के कुछ ही साल बाद दुनिया एक और भयानक […]
Read Moreभाग 4: महायुद्धों के बीच अर्थव्यवस्था – महामंदी और उसका प्रभाव
कक्षा 10 इतिहास की हमारी इस कक्षा में आपका पुनः स्वागत है। पिछले भाग में हमने भारत से विदेश गए अनुबंधित श्रमिकों (गिरमिटिया मज़दूरों) की दर्दनाक कहानी और वैश्विक व्यापार के बारे में पढ़ा था। आज हम बीसवीं सदी के उस दौर में चलेंगे जब दुनिया ने पहला विश्व युद्ध (1914-1918) देखा। यह युद्ध केवल […]
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