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विकास: विभिन्न दृष्टिकोण और लक्ष्य

विकास का अर्थ हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं होता। कक्षा 10 अर्थशास्त्र के इस अध्याय में हम जानेंगे कि विकास के विभिन्न दृष्टिकोण और लक्ष्य किस प्रकार एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। यूपी बोर्ड कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए यह समझना आवश्यक है कि विकास केवल आय या भौतिक वस्तुओं तक सीमित नहीं, बल्कि अभौतिक लक्ष्य जैसे स्वतंत्रता, सुरक्षा, और सम्मान भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

मान लीजिए, एक गाँव में चार अलग-अलग लोग ‘विकास’ पर चर्चा कर रहे हैं। भूमिहीन मजदूर कहता है, “मुझे अधिक काम और अच्छी मजदूरी चाहिए।” एक समृद्ध किसान बोलता है, “मैं अपनी आय बढ़ाकर बच्चों को विदेश भेजना चाहता हूँ।” वहीं वर्षा पर निर्भर किसान को केवल सिंचाई की आस है, और शहर की पढ़ी-लिखी लड़की चाहती है कि उसे लड़कों के समान अवसर मिलें। देखा जाए तो ये सभी ‘विकास’ चाहते हैं, लेकिन सबकी परिभाषाएँ बिल्कुल अलग हैं।

विकास की अवधारणा: भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण

विकास एक बहुआयामी अवधारणा है। आपने राष्ट्रीय विकास के मापन में पढ़ा होगा कि विकास को केवल आय से नहीं मापा जा सकता। लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर भी यही सत्य है। हर व्यक्ति अपनी परिस्थितियों, आकांक्षाओं और आवश्यकताओं के अनुसार विकास को परिभाषित करता है। गरीबी में जी रहा व्यक्ति न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति को विकास मानता है, जबकि अमीर व्यक्ति के लिए विकास का अर्थ उच्च जीवन स्तर और स्वतंत्रता हो सकता है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि विकास के ये लक्ष्य स्थिर नहीं रहते; समय के साथ बदलते रहते हैं। जैसे-जैसे एक ज़रूरत पूरी होती है, व्यक्ति नई अपेक्षाएँ गढ़ने लगता है। इसीलिए विकास एक सतत प्रक्रिया है।

विकास की परिभाषा और प्रकृति

सरल शब्दों में, विकास वह प्रक्रिया है जो लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाती है। परंतु ध्यान देने योग्य बात यह है कि जो एक व्यक्ति के लिए विकास है, वह दूसरे के लिए विकास नहीं हो सकता। उदाहरण के लिए, किसी उद्योग का विस्तार शहरी निवासियों के लिए रोजगार ला सकता है, किंतु उसी के लिए वन काटे जाने से आदिवासी समुदायों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। इसीलिए विकास एक व्यक्तिनिष्ठ (subjective) अवधारणा है।

विभिन्न समूहों के विकास लक्ष्य

अब हम कुछ विशिष्ट समूहों के विकास लक्ष्यों पर चर्चा करेंगे:

  • भूमिहीन ग्रामीण मजदूर: वह चाहता है कि उसे साल भर काम मिले और मजदूरी इतनी हो कि दो वक्त की रोटी का प्रबंध हो सके। साथ ही वह चाहता है कि उसके बच्चे स्कूल जा सकें।
  • पंजाब का समृद्ध किसान: उसका लक्ष्य उच्च पारिवारिक आय प्राप्त करना और बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए विदेश भेजना है। वह आधुनिक कृषि तकनीकों और उपज का अच्छा मूल्य चाहता है।
  • वर्षा-निर्भर किसान: उसका प्राथमिक लक्ष्य सिंचाई की सुविधा पाना है ताकि वह भी साल में दो फसलें उगा सके और अनियमित वर्षा से होने वाली हानि से बच सके।
  • शहरी अमीर परिवार की लड़की: उसके लिए विकास का अर्थ है लैंगिक समानता, करियर चुनने की स्वतंत्रता, और सुरक्षित वातावरण में रहना। आय उसके लिए उतनी महत्वपूर्ण नहीं जितनी कि स्वतंत्रता।

इस प्रकार, विकास के लक्ष्य व्यक्ति की सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि पर निर्भर करते हैं। यही नहीं, कभी-कभी दो व्यक्तियों या समूहों के लक्ष्य परस्पर विरोधी भी हो सकते हैं।

लक्ष्यों में टकराव: बाँध निर्माण का उदाहरण

विकास के लक्ष्यों का टकराव एक जटिल समस्या है। इसका एक प्रमुख उदाहरण बड़े बाँधों का निर्माण है। एक ओर, बाँध से बिजली उत्पादन, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण जैसे लाभ होते हैं, जिससे उद्योगपतियों, किसानों और शहरी उपभोक्ताओं को फायदा पहुँचता है। दूसरी ओर, बाँध के कारण नदी घाटी में रहने वाले आदिवासियों और ग्रामीणों का विस्थापन होता है, उनकी भूमि डूब जाती है, और आजीविका नष्ट होती है। उनके लिए यह विकास नहीं, विनाश है।

इसी तरह, विकास की धारणीयता पर विचार करें तो समझ आता है कि आर्थिक विकास के साथ पर्यावरणीय और सामाजिक लागत को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

भौतिक और अभौतिक लक्ष्य

विकास की चर्चा में हम प्रायः भौतिक लक्ष्यों (जैसे – आय, धन, वस्तुएँ) पर ही ध्यान देते हैं, लेकिन अभौतिक लक्ष्य (जैसे – समानता, स्वतंत्रता, सुरक्षा, सम्मान) भी उतने ही आवश्यक हैं। वास्तव में, भौतिक और अभौतिक लक्ष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यदि किसी समाज में भेदभाव व्याप्त है, तो उच्च आय होने पर भी व्यक्ति स्वयं को सुरक्षित या आदरणीय महसूस नहीं करेगा। महिलाएँ चाहे कितनी ही शिक्षित क्यों न हों, यदि उन्हें निर्णय लेने की स्वतंत्रता नहीं है, तो विकास अधूरा है। अभौतिक लक्ष्यों की पूर्ति भौतिक लक्ष्यों से भी अधिक संतोष देती है। एक अध्यापक को समाज में सम्मान मिलने पर जो खुशी होती है, वह केवल धन से प्राप्त नहीं हो सकती। इसी कारण आज मानव विकास सूचकांक जैसे उपायों पर जोर दिया जाता है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर को भी शामिल करते हैं।

इसके विपरीत, विकास के अन्य सूचकांक जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन प्रत्याशा, अभौतिक लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक होते हैं।

निष्कर्ष

अतः, विकास एक जटिल एवं विविधतापूर्ण धारणा है। एक व्यक्ति का विकास दूसरे के लिए विनाशकारी हो सकता है। इसलिए, किसी भी विकास नीति को बनाते समय विभिन्न वर्गों के दृष्टिकोणों और लक्ष्यों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। तभी विकास वास्तव में ‘सबका साथ, सबका विकास’ बन सकता है। विकास की इस चर्चा से हमें यह सीख मिलती है कि विकास को केवल संख्याओं में नहीं मापा जा सकता। प्रत्येक व्यक्ति के लिए विकास का अर्थ जानना उन्हें विकास प्रक्रिया में भागीदार बनाने का पहला कदम है।

👨🏫 शिक्षक की सलाह: बोर्ड परीक्षा में प्रायः ‘विकास के भिन्न-भिन्न लक्ष्य’ और ‘भौतिक और अभौतिक लक्ष्यों में अंतर’ पर लघु या दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे जाते हैं। विशेष रूप से ‘बाँध निर्माण से उत्पन्न विकास एवं विस्थापन की समस्या’ को समझें। इस पाठ के सभी उदाहरणों को ध्यानपूर्वक पढ़ें।
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