विकास के अन्य सूचकांक और सार्वजनिक सुविधाएँ का अध्ययन करते समय हम केवल आय पर नहीं रुकते, बल्कि शिशु मृत्यु दर, साक्षरता दर, नेट अटेंडेंस रेशियो, और जीवन प्रत्याशा जैसे सामाजिक सूचकों को देखते हैं। ये सूचक किसी भी क्षेत्र के वास्तविक विकास को परिलक्षित करते हैं। केरल और हरियाणा की तुलना से पता चलता है कि सार्वजनिक सुविधाओं पर निवेश का कितना महत्व है। इस उप-पाठ में पीडीएस और बीएमआई की भूमिका भी समझेंगे।
मान लीजिए, रमेश और सुरेश दो राज्यों में रहते हैं। रमेश का प्रदेश आय में अधिक है, लेकिन वहाँ स्वास्थ्य सुविधाएँ खराब हैं, जबकि सुरेश के राज्य में आय कम है पर सरकारी स्कूल-अस्पताल बेहतर हैं। इस उदाहरण से समझ आता है कि केवल आय ही विकास नहीं मापती। आइए विस्तार से जानें।
विकास मापने के प्रमुख सामाजिक सूचक
शिशु मृत्यु दर (IMR)
शिशु मृत्यु दर किसी क्षेत्र में एक वर्ष से कम आयु के बच्चों की प्रति 1000 जीवित जन्मों पर होने वाली मृत्यु की संख्या है। यह स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, टीकाकरण, पोषण और स्वच्छता का प्रत्यक्ष संकेतक है। उच्च IMR का अर्थ है कि बच्चों का जीवन असुरक्षित है और विकास कमज़ोर है। भारत में IMR में गिरावट आई है, लेकिन राज्यों में काफ़ी अंतर है।
साक्षरता दर
साक्षरता दर 7 वर्ष या अधिक आयु के उन व्यक्तियों का प्रतिशत है जो समझ के साथ पढ़ और लिख सकते हैं। यह शैक्षिक विकास का सबसे सामान्य माप है। उच्च साक्षरता दर आर्थिक अवसरों और सामाजिक जागरूकता को बढ़ाती है। मानव विकास सूचकांक में साक्षरता एक प्रमुख घटक है।
नेट उपस्थिति दर (Net Attendance Ratio)
नेट उपस्थिति दर किसी निर्धारित आयु वर्ग में विद्यालय जाने वाले बच्चों का प्रतिशत बताती है। यह नामांकन से भिन्न है, क्योंकि यह वास्तविक उपस्थिति मापती है। यह सूचक शैक्षिक पहुँच और गुणवत्ता का आकलन करता है।
जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy)
जीवन प्रत्याशा जन्म के समय किसी व्यक्ति की औसत अनुमानित आयु है। यह स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण और जीवन स्तर का समग्र संकेतक है। लंबी जीवन प्रत्याशा विकसित समाज की पहचान होती है।
केरल और हरियाणा: एक तुलनात्मक अध्ययन
आय के अलावा विकास के सूचकों को समझने के लिए केरल और हरियाणा की तुलना उत्कृष्ट उदाहरण है। हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय केरल से अधिक है, परंतु केरल का IMR कम, साक्षरता दर अधिक और जीवन प्रत्याशा अधिक है। इसका कारण विकास के लक्ष्यों में सार्वजनिक निवेश की प्राथमिकता है। केरल ने स्वास्थ्य और शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय बढ़ाया, जिससे सामाजिक सूचक बेहतर हुए। दूसरी ओर, हरियाणा में उच्च आय के बावजूद सामाजिक क्षेत्र पर कम ध्यान दिया गया। यह स्पष्ट करता है कि विकास मापने के लिए आय की सीमाएँ हैं और सार्वजनिक सुविधाएँ अनिवार्य हैं।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और पोषण सुरक्षा
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) सरकार द्वारा संचालित नेटवर्क है जो गरीबों को सस्ती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराती है। यह पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करती है, विशेषकर बच्चों और महिलाओं के लिए। राशन की दुकानों के माध्यम से चावल, गेहूँ, चीनी, और केरोसिन जैसी आवश्यक वस्तुएँ दी जाती हैं। PDS का कुशल कार्यान्वयन भुखमरी और कुपोषण कम करने में सहायक है।
बॉडी मास इंडेक्स (BMI) द्वारा पोषण स्तर का आकलन
बॉडी मास इंडेक्स (BMI) एक सरल सूचकांक है जो वजन और ऊंचाई के आधार पर पोषण स्तर बताता है। इसका सूत्र है: वजन (किग्रा) / ऊँचाई² (मीटर)। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 18.5 से कम BMI कुपोषण, 18.5-24.9 सामान्य, 25-29.9 अधिक वजन, और 30 से ऊपर मोटापे की श्रेणी में आता है। यह व्यक्तिगत स्वास्थ्य के साथ-साथ सामूहिक विकास का भी संकेतक है।
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अध्याय के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- भाग 1: विकास: विभिन्न दृष्टिकोण और लक्ष्य
- भाग 2: राष्ट्रीय विकास का मापन: आय और उसकी सीमाएँ
- You are Reading Here: विकास के अन्य सूचकांक और सार्वजनिक सुविधाएँ
- भाग 4: मानव विकास सूचकांक और देशों की तुलना
- भाग 5: विकास की धारणीयता
- भाग 6: अभ्यास और मूल्यांकन