मुद्रा के आधुनिक रूप और बैंकों की भूमिका भारतीय अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। आज के डिजिटल युग में मुद्रा केवल कागज़ के नोट या सिक्के नहीं हैं, बल्कि बैंक जमा, चैक, डिजिटल भुगतान जैसे अनेक रूपों में विद्यमान है। यह पाठ हमें बताएगा कि भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी करेंसी से लेकर बैंकों की ऋण गतिविधियाँ कैसे संचालित होती हैं और मुद्रा के नए आयाम क्या हैं।
कल्पना कीजिए, आप एक दुकान पर जाकर क्यूआर कोड स्कैन करके भुगतान करते हैं। आपके बैंक खाते से पैसा तुरंत दुकानदार के खाते में पहुँच जाता है। यह लेन-देन बिना नकदी के, केवल डिजिटल माध्यम से हुआ। यह आधुनिक मुद्रा का चमत्कार है, जिसमें बैंक एक अहम भूमिका निभाते हैं। यही नहीं, जब आप कोई सामान खरीदने के लिए चैक देते हैं, तब भी वास्तविक नकदी नहीं बदलती; बैंक आपके खाते से पैसे घटाकर प्राप्तकर्ता के खाते में जोड़ देते हैं। इस प्रकार, मुद्रा के आधुनिक रूप बैंकिंग प्रणाली के साथ गहराई से जुड़े हैं।
1. करेंसी – कागज़ के नोट और सिक्के
भारत में मुद्रा के दो मुख्य रूप हैं—करेंसी (कागज़ के नोट और सिक्के) और बैंक जमा। करेंसी को केंद्र सरकार की ओर से भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) जारी करता है। कानून के अनुसार किसी भी लेन-देन में इन्हें स्वीकार करना अनिवार्य है, इसलिए इन्हें विधिमान्य मुद्रा (Legal Tender) कहा जाता है। आधुनिक करेंसी—नोट और सिक्के—का अपने आप में कोई उपयोग नहीं है; न ही ये सोने-चाँदी जैसी किसी मूल्यवान धातु से बने होते हैं। लेकिन सरकारी अधिकार के कारण लोग इन्हें स्वीकार करते हैं। प्राचीन काल में वस्तु विनिमय और धातु मुद्रा चलती थी, जैसा हमने मुद्रा: विनिमय का माध्यम में पढ़ा। आज करेंसी का मूल्य उस पर छपी राशि के बराबर होता है, जो सरकार की गारंटी पर आधारित है।
2. बैंकों में जमा राशियाँ और चैक द्वारा भुगतान
बैंकों में जमा राशियाँ
लोग अपनी अतिरिक्त नकदी को सुरक्षित रखने और कुछ ब्याज प्राप्त करने के लिए बैंकों में जमा करते हैं। ये जमा राशियाँ मुद्रा का दूसरा प्रमुख रूप हैं। बैंक खाता खोलकर हम अपना पैसा जमा कर सकते हैं, जिसे माँग जमा (Demand Deposit) कहते हैं, क्योंकि इसे कभी भी हमारी माँग पर निकाला जा सकता है। माँग जमा को हम चैक के माध्यम से भुगतान के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसीलिए इसे मुद्रा का एक रूप माना जाता है; यह पूरी तरह से नकदी का विकल्प है।
चैक द्वारा भुगतान
चैक एक आदेश पत्र है जो बैंक को यह निर्देश देता है कि चैक में लिखी गई राशि का भुगतान उस व्यक्ति को करें जिसके नाम चैक काटा गया है। मान लीजिए, सलीम एक जूता निर्माता है और उसे चमड़ा खरीदना है। वह अपने बैंक से चैकबुक प्राप्त करता है और चमड़ा आपूर्तिकर्ता के नाम का चैक लिखता है। चैक में खाताधारक का नाम, राशि, तिथि और हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। चैक पाने वाला आपूर्तिकर्ता इसे अपने बैंक खाते में जमा कराता है। बैंक इस चैक को समाशोधन प्रक्रिया के द्वारा सलीम के बैंक को भेजता है, और सलीम के खाते से पैसा घटाकर आपूर्तिकर्ता के खाते में डाल दिया जाता है। इस प्रकार बिना नकदी लेन-देन हुए भुगतान हो जाता है। यह प्रणाली तभी संभव है जब लोग बैंकों पर भरोसा करें।
3. बैंकों की ऋण गतिविधियाँ
बैंक जमा राशियों का उपयोग ऋण देने के लिए भी करता है। वे अपने पास जमा कुल राशि का केवल एक छोटा भाग नकद आरक्षित अनुपात (Cash Reserve Ratio – CRR) के रूप में रखते हैं, जो वर्तमान में 5% है। शेष 95% राशि वे विभिन्न क्षेत्रों में ऋण के रूप में उधार देते हैं। ऋण लेने वाले व्यक्ति या व्यवसाय को इस पर ब्याज देना होता है। बैंक जमा पर जो ब्याज देते हैं, उससे अधिक ब्याज ऋणों पर वसूलते हैं। इन दोनों ब्याज दरों का अंतर ही बैंकों की आय का मुख्य स्रोत है। यह एक महत्वपूर्ण तथ्य है कि बैंक केवल जमा का एक भाग नकद रखते हैं, जिससे वे एक ही जमा पर कई बार ऋण दे सकते हैं, जिसे साख निर्माण कहते हैं। यह प्रणाली अर्थव्यवस्था में मुद्रा की पूर्ति बढ़ाती है। ऋण प्रक्रिया और उसकी शर्तों के बारे में अधिक जानने के लिए साख (ऋण) की अवधारणा और ऋण की शर्तें पाठ पढ़ें।
4. मुद्रा के नए आयाम
पिछले कुछ वर्षों में मुद्रा के स्वरूप में बड़ा बदलाव आया है। डिजिटल भुगतान विधियाँ जैसे पी.ओ.एस. (Point of Sale), यू.पी.आई. (Unified Payments Interface), क्यू.आर. कोड (Quick Response Code) तेजी से लोकप्रिय हुई हैं। स्मार्टफोन और इंटरनेट की मदद से अब लोग तुरंत भुगतान कर सकते हैं। 8 नवंबर 2016 को भारत सरकार ने विमुद्रीकरण (Demonetization) की घोषणा की, जिसमें 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों को अमान्य कर दिया गया। इस कदम का उद्देश्य कालाधन, भ्रष्टाचार और नकली नोटों पर रोक लगाना था। हालांकि इससे अल्पकालिक असुविधाएँ भी हुईं, लेकिन इसने डिजिटल भुगतान को काफी बढ़ावा दिया। आज UPI जैसे मंच प्रतिदिन करोड़ों लेन-देन संसाधित करते हैं।
निष्कर्षतः, मुद्रा के आधुनिक रूप—करेंसी, जमा राशियाँ, चैक और डिजिटल मुद्रा—सभी बैंक प्रणाली से अभिन्न रूप से जुड़े हैं। बैंक न केवल हमारे पैसे की सुरक्षा करते हैं बल्कि भुगतान की सुविधा देकर और ऋण प्रदान करके आर्थिक गतिविधियों को गति देते हैं। डिजिटल क्रांति ने तो मुद्रा के उपयोग को और भी सुगम और पारदर्शी बना दिया है।
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अध्याय के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- भाग 1: मुद्रा: विनिमय का माध्यम
- You are Reading Here: मुद्रा के आधुनिक रूप और बैंकों की भूमिका
- भाग 3: साख (ऋण) की अवधारणा और ऋण की शर्तें
- भाग 4: औपचारिक और अनौपचारिक साख के स्रोत
- भाग 5: स्वयं सहायता समूह और कर्जदारों की पहुँच

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