कृषि की दृष्टि से भारत विश्व का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण देश है। हमारी लगभग दो-तिहाई जनसंख्या आजीविका के लिए कृषि कार्यों में संलग्न है। कृषि न केवल हमारे लिए खाद्यान्न उत्पन्न करती है, बल्कि यह विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चा माल भी प्रदान करती है। चाय, कॉफी और मसालों जैसे उत्पादों के निर्यात से हमें […]
Read Moreभाग 3: वर्षा जल संग्रहण की पारंपरिक और आधुनिक विधियाँ
कक्षा 10 भूगोल के अध्याय 3 ‘जल संसाधन’ के इस अंतिम भाग में आपका स्वागत है। पिछले भाग में हमने पढ़ा कि बहुउद्देशीय नदी परियोजनाएँ और बड़े बाँध किस प्रकार कई पर्यावरणीय और सामाजिक विवादों का कारण बन गए हैं। इन परियोजनाओं के अलाभप्रद असर और उठने वाले विवादों के चलते, आज ‘वर्षा जल संग्रहण’ […]
Read Moreभाग 2: बहुउद्देशीय नदी परियोजनाएँ और उनके प्रभाव
कक्षा 10 भूगोल के इस भाग में हम भारत के जल संसाधन प्रबंधन के एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू—बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं और बाँधों के बारे में अध्ययन करेंगे। हमने पिछले भाग में पढ़ा कि जल दुर्लभता आज हमारे लिए कितनी बड़ी चुनौती बन गई है। इस समस्या से निपटने के लिए जल का संरक्षण और […]
Read Moreभाग 1: जल दुर्लभता और जल संरक्षण की आवश्यकता
कक्षा 10 भूगोल के अध्याय 3 में आपका स्वागत है। जल, जिसे हम जीवन का आधार मानते हैं, प्रकृति का एक अनमोल उपहार है। जैसा कि हम सभी जानते हैं, हमारी पृथ्वी का लगभग तीन-चौथाई धरातल जल से ढका हुआ है। अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी नीली दिखाई देती है, इसीलिए इसे ‘नीला ग्रह’ भी […]
Read Moreअध्याय 3: जल संसाधन – सम्पूर्ण व्याख्या
हमारी पृथ्वी को ‘नीला ग्रह’ कहा जाता है क्योंकि इसका तीन-चौथाई धरातल जल से ढका हुआ है। अंतरिक्ष से देखने पर यह एक पानी की नीली गेंद जैसी दिखाई देती है। परंतु, इस विशाल जल भंडार के बावजूद, एक बहुत बड़ा सच यह भी है कि इसमें से प्रयोग में लाने योग्य मीठे पानी (अलवणीय […]
Read Moreभाग 4: समुदाय और वन संरक्षण: चिपको तथा बीज बचाओ आंदोलन
वन संरक्षण की नीतियाँ हमारे देश में कोई नई बात नहीं हैं। भारत में जंगल केवल पेड़-पौधों का समूह नहीं हैं, बल्कि ये कई पारंपरिक समुदायों और जनजातियों के आवास भी हैं। सदियों से यहाँ के स्थानीय लोग अपने आवास स्थलों और जंगलों के संरक्षण में जुटे हुए हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि उनके […]
Read Moreभाग 3: वनों के प्रकार: आरक्षित, रक्षित और अवर्गीकृत वन
यदि हम वन और वन्य जीव संसाधनों को संरक्षित करना चाहें, तो उनका प्रबंधन, नियंत्रण और विनियमन अपेक्षाकृत कठिन है। भारत में अधिकतर वन और वन्य जीवन या तो प्रत्यक्ष रूप में सरकार के अधिकार क्षेत्र में हैं या वन विभाग अथवा अन्य विभागों के जरिये सरकार के प्रबंधन में हैं। संसाधनों के सही उपयोग […]
Read Moreभाग 2: वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 और प्रोजेक्ट टाइगर
भारत में वनों और वन्य जीवों के तेजी से हो रहे विनाश को देखते हुए 1960 और 1970 के दशकों में पर्यावरण संरक्षकों ने राष्ट्रीय स्तर पर वन्य जीवन सुरक्षा कार्यक्रम लागू करने की पुरजोर माँग की। इसी दिशा में भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कई सख्त कानून बनाए। इस भाग में […]
Read Moreभाग 1: भारत में वनस्पतिजात और प्राणिजात
हमारी पृथ्वी एक अत्यंत विशाल और विविध ग्रह है जहाँ हम सूक्ष्म जीवाणुओं, बैक्टीरिया, जोंक से लेकर वटवृक्ष, हाथी और ब्लू व्हेल तक करोड़ों दूसरे जीवधारियों के साथ रहते हैं[cite: 1]। यह पूरा आवासीय स्थल जिस पर हम निवास करते हैं, अत्यधिक जैव-विविधताओं से भरा हुआ है[cite: 1]। मानव और दूसरे जीवधारी मिलकर एक अत्यंत […]
Read Moreअध्याय 2: वन एवं वन्य जीव संसाधन – सम्पूर्ण व्याख्या
हमारी पृथ्वी पर सूक्ष्म जीवाणुओं, बैक्टीरिया, जोंक से लेकर वटवृक्ष, हाथी और ब्लू व्हेल तक करोड़ों जीवधारी निवास करते हैं। यह पूरा आवासीय स्थल जिस पर हम रहते हैं, अत्यधिक जैव विविधताओं से भरा हुआ है। मानव और ये सभी जीवधारी मिलकर एक बेहद जटिल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करते हैं, जिसमें हम केवल एक […]
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