आज हम इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण और रोचक अध्याय—‘यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय’ की शुरुआत करने जा रहे हैं।
क्या आपने कभी सोचा है कि आज हम जिस तरह के देशों (जैसे भारत, फ्रांस, जर्मनी) को देखते हैं, क्या वे हमेशा से ऐसे ही थे? बिल्कुल नहीं! पहले दुनिया में राजा-महाराजाओं के बड़े-बड़े साम्राज्य हुआ करते थे। लोगों के दिलों में ‘अपने देश’ (राष्ट्र) के प्रति प्रेम कैसे जागा? इसकी शुरुआत यूरोप से हुई थी। आइए, इस भाग में हम फ्रेडरिक सॉरयू के सपनों की दुनिया और फ्रांसीसी क्रांति के बारे में विस्तार से समझते हैं!
फ्रेडरिक सॉरयू का कल्पनादर्श (युटोपिया) क्या था?
1848 में, फ्रांस के एक कलाकार फ्रेड्रिक सॉरयू ने चार चित्रों की एक श्रृंखला बनाई। इन चित्रों में उसने अपने सपनों का एक ऐसा संसार रचा, जो ‘जनतांत्रिक और सामाजिक गणतंत्रों’ (Democratic and Social Republics) से मिलकर बना था!
उसके पहले चित्र में यूरोप और अमेरिका के सभी वर्गों के स्त्री-पुरुष एक लंबी कतार में स्वतंत्रता की प्रतिमा (नारी रूप) की वंदना करते हुए जा रहे हैं। प्रतिमा के एक हाथ में ज्ञानोदय की मशाल है और दूसरे में मनुष्य के अधिकारों का घोषणापत्र। सबसे खास बात यह है कि ज़मीन पर निरंकुश (तानाशाह) राजाओं के संस्थानों के ध्वस्त अवशेष (टूटे हुए टुकड़े) बिखरे पड़े हैं!
सॉरयू के इस चित्र को कल्पनादर्श (युटोपिया) कहा गया, जिसका अर्थ है—एक ऐसे समाज की कल्पना जो इतना आदर्श है कि उसका साकार होना लगभग असंभव होता है
निरंकुशवाद और राष्ट्र-राज्य क्या होते हैं?
- निरंकुशवाद (Absolutism): ऐसी सरकार या शासन व्यवस्था जिसकी सत्ता पर किसी प्रकार का कोई अंकुश (रोक-टोक) नहीं होता। इतिहास में ऐसी राजशाही सरकारें अत्यंत केंद्रीकृत, सैन्य बल पर आधारित और दमनकारी होती थीं।
- राष्ट्र-राज्य (Nation-State): एक ऐसा राज्य जहाँ न केवल शासकों बल्कि उसके अधिकांश नागरिकों में एक साझा पहचान का भाव और साझा इतिहास या विरासत की भावना होती है।
फ्रांसीसी क्रांति ने राष्ट्र का विचार कैसे पैदा किया?
राष्ट्रवाद की पहली स्पष्ट अभिव्यक्ति 1789 में फ्रांसीसी क्रांति के साथ हुई। फ्रांसीसी क्रांति ने सत्ता राजा के हाथों से छीनकर फ्रांस के नागरिकों के हाथों में सौंप दी। लोगों में ‘हम एक देश के वासी हैं’ यह भावना जगाने के लिए क्रांतिकारियों ने कई कदम उठाए:
- पितृभूमि और नागरिक: पितृभूमि (la patrie) और नागरिक (le citoyen) जैसे विचारों पर बल दिया गया, ताकि सभी को समान अधिकार मिलें।
- नया झंडा: पुराने राजध्वज को हटाकर एक नया फ्रांसीसी झंडा-तिरंगा (Tricolour) चुना गया।
- नेशनल एसेंबली: ‘इस्टेट जेनरल’ का नाम बदलकर ‘नेशनल एसेंबली’ कर दिया गया और इसका चुनाव सक्रिय नागरिकों द्वारा किया जाने लगा।
- साझा भाषा: क्षेत्रीय बोलियों को हतोत्साहित किया गया और पेरिस में बोली जाने वाली ‘फ्रेंच’ को राष्ट्र की साझा भाषा बना दिया गया।
1804 की नेपोलियन संहिता (नागरिक संहिता) क्या थी?
नेपोलियन ने फ्रांस में राजतंत्र वापस लाकर प्रजातंत्र को नष्ट कर दिया था, लेकिन उसने प्रशासन को बेहतर बनाने के लिए 1804 में एक ‘नागरिक संहिता’ (Civil Code) लागू की।
- इस संहिता ने जन्म पर आधारित विशेषाधिकार समाप्त कर दिए।
- कानून के समक्ष बराबरी और संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित बनाया गया।
- किसानों को भू-दासत्व और जागीरदारी शुल्कों से मुक्ति दिलाई गई।
शुरुआत में हॉलैंड और स्विट्ज़रलैंड जैसे जीते हुए इलाकों में फ्रांसीसी सेनाओं का ‘स्वतंत्रता का तोहफा’ देने वालों की तरह स्वागत हुआ, लेकिन बढ़े हुए कर (Tax), सेंसरशिप और फ्रांसीसी सेना में जबरन भर्ती के कारण यह उत्साह जल्द ही दुश्मनी में बदल गया!
अब खेलें: यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय क्विज़
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इतिहास अध्याय 1 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- You are Reading Here: फ्रेडरिक सॉरयू का कल्पनादर्श और फ्रांसीसी क्रांति
- भाग 2: यूरोप में राष्ट्रवाद का निर्माण और कुलीन वर्ग
- भाग 3: 1815 के बाद नया रूढ़िवाद और क्रांतिकारी
- भाग 4: क्रांतियों का युग (1830-1848) और रूमानी कल्पना
- भाग 5: जर्मनी और इटली का एकीकरण
- भाग 6: राष्ट्र की दृश्य-कल्पना और साम्राज्यवाद