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भाग 1: प्रथम विश्व युद्ध, सत्याग्रह का विचार और रॉलट एक्ट

कक्षा 10 इतिहास के अध्याय ‘भारत में राष्ट्रवाद’ के पहले भाग में आपका बहुत-बहुत स्वागत है। पिछले अध्याय में हमने यूरोप में राष्ट्रवाद के बारे में पढ़ा था। अब हम जानेंगे कि हमारे अपने देश भारत में आज़ादी और राष्ट्रवाद की लहर कैसे उठी।

अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष के दौरान भारत के लोग आपसी एकता को पहचानने लगे थे। उत्पीड़न और दमन के साझा भाव ने विभिन्न समूहों को एक-दूसरे से बाँध दिया था। आइए जानते हैं कि प्रथम विश्व युद्ध और महात्मा गांधी के आगमन ने इस संघर्ष को कैसे एक नया मोड़ दिया!

प्रथम विश्व युद्ध का भारत पर क्या प्रभाव पड़ा?

प्रथम विश्वयुद्ध ने भारत में एक नयी आर्थिक और राजनीतिक स्थिति पैदा कर दी थी। युद्ध के कारण रक्षा व्यय में भारी इज़ाफ़ा हुआ, जिसकी भरपाई के लिए करों में वृद्धि की गई, सीमा शुल्क बढ़ा दिया गया और आयकर शुरू किया गया।

1913 से 1918 के बीच क़ीमतें दोगुना हो चुकी थीं, जिसके कारण आम लोगों की मुश्किलें बहुत बढ़ गई थीं। इसके अलावा, गाँवों में सिपाहियों को जबरन भर्ती किया गया, जिससे ग्रामीण इलाक़ों में व्यापक गुस्सा था। 1918-19 और 1920-21 में देश के कई हिस्सों में फसल खराब हो गई और फ़्लू की महामारी फैल गई, जिससे लाखों लोग मारे गए।

सत्याग्रह का विचार क्या है?

महात्मा गांधी जनवरी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में नस्लभेदी सरकार से सफलतापूर्वक लोहा लिया था, और संघर्ष की इस जन-आंदोलन पद्धति को वे ‘सत्याग्रह’ कहते थे।

सत्याग्रह के विचार में सत्य की शक्ति पर आग्रह और सत्य की खोज पर जोर दिया जाता था। उनका मानना था कि यदि आपका संघर्ष अन्याय के ख़िलाफ़ है, तो आपको उत्पीड़क से मुक़ाबला करने के लिए किसी शारीरिक बल या प्रतिशोध की आवश्यकता नहीं है। अहिंसा के सहारे सत्याग्रही अपने संघर्ष में सफल हो सकता है।

गांधीजी के शुरुआती सत्याग्रह आंदोलन कौन से थे?

भारत आने के बाद गांधीजी ने कई स्थानों पर सफल सत्याग्रह किए:

  • चंपारन (1917): बिहार के चंपारन में दमनकारी बागान व्यवस्था के खिलाफ किसानों को संघर्ष के लिए प्रेरित किया।
  • खेड़ा (1917): गुजरात के खेड़ा जिले में फ़सल खराब होने और प्लेग की महामारी के कारण किसानों का लगान माफ करवाने के लिए सत्याग्रह किया।
  • अहमदाबाद (1918): सूती कपड़ा कारखानों के मज़दूरों के बीच सत्याग्रह चलाया।

रॉलट एक्ट क्या था?

अपनी कामयाबी से उत्साहित होकर गांधीजी ने 1919 में ‘रॉलट एक्ट’ के ख़िलाफ़ एक राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह शुरू करने का फैसला लिया। इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल ने भारतीयों के विरोध के बावजूद इसे जल्दबाजी में पारित किया था।

इस अन्यायपूर्ण क़ानून के ज़रिए सरकार को राजनीतिक गतिविधियों को कुचलने और राजनीतिक कैदियों को दो साल तक बिना मुक़दमा चलाए जेल में बंद रखने का अधिकार मिल गया था। इसके विरोध में 6 अप्रैल को हड़तालें हुईं और रैलियाँ निकाली गईं।

जलियाँवाला बाग हत्याकांड कैसे हुआ?

13 अप्रैल को अमृतसर के जलियाँवाला बाग मैदान में बहुत सारे गाँव वाले सालाना वैसाखी मेले में शिरकत करने और सरकार के दमनकारी क़ानून का विरोध करने जमा हुए थे। शहर में मार्शल लॉ लागू था, लेकिन गाँव वालों को यह पता नहीं था।

जनरल डायर हथियारबंद सैनिकों के साथ वहाँ पहुँचा, उसने बाहर निकलने के सारे रास्ते बंद कर दिए और भीड़ पर अंधाधुंध गोलियाँ चलवा दीं। इस भयानक हत्याकांड में सैंकड़ों मासूम लोग मारे गए। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया और उत्तर भारत के शहरों में भयंकर विरोध प्रदर्शन होने लगे।

👨‍🏫 शिक्षक की सलाह: बच्चों, बोर्ड परीक्षा में “सत्याग्रह का क्या अर्थ है?” और “जलियाँवाला बाग हत्याकांड पर टिप्पणी” सबसे ज्यादा पूछे जाते हैं। इन्हें ध्यान से पढ़ें और तिथियों को अच्छे से याद करें!

अब खेलें: भारत में राष्ट्रवाद प्रारंभिक क्विज़

अब नीचे दिए गए ‘Play Quiz’ बटन पर क्लिक करें और प्रथम विश्व युद्ध, गांधीजी के सत्याग्रह और रॉलट एक्ट पर आधारित इन 20 महत्वपूर्ण इतिहास प्रश्नों का अभ्यास करें!

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महत्वपूर्ण इतिहास परिभाषाएँ और व्याख्या

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