कक्षा 10 इतिहास की हमारी इस शानदार कक्षा में आपका बहुत-बहुत स्वागत है। आज हम इतिहास का एक बहुत ही रोचक और नया अध्याय शुरू करने जा रहे हैं—‘भूमंडलीकृत विश्व का बनना’।
जब हम आज ‘वैश्वीकरण’ (Globalization) की बात करते हैं, तो हमें लगता है कि यह पिछले 50 सालों की ही बात है। लेकिन सच तो यह है कि दुनिया के एक-दूसरे से जुड़ने का इतिहास बहुत पुराना है। सिल्क मार्ग (रेशम मार्ग) से लेकर आलू की खोज तक, और महामंदी से लेकर ब्रेटन वुड्स समझौते तक—इस अध्याय में हम सदियों पुरानी व्यापारिक और सांस्कृतिक यात्राओं को समझेंगे। इस विशाल अध्याय को आसानी से समझने के लिए, मैंने इसे 5 छोटे-छोटे भागों (माइक्रो-लेसन्स) में बाँट दिया है:
- भाग 1: आधुनिक युग से पहले: सिल्क मार्ग, भोजन की यात्रा और बीमारियाँ
- भाग 2: उन्नीसवीं शताब्दी: विश्व अर्थव्यवस्था, तकनीक और रिंडरपेस्ट
- भाग 3: भारत से अनुबंधित श्रमिकों का जाना और वैश्विक व्यापार
- भाग 4: महायुद्धों के बीच अर्थव्यवस्था: महामंदी और उसका प्रभाव
- भाग 5: विश्व अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण: ब्रेटन वुड्स और वैश्वीकरण
आधुनिक युग से पहले दुनिया कैसे जुड़ी थी?
प्राचीन काल से ही यात्री, व्यापारी और तीर्थयात्री ज्ञान और अवसरों की तलाश में दूर-दूर की यात्राएँ करते रहे हैं। वे अपने साथ न केवल पैसा और विचार ले गए, बल्कि बीमारियाँ भी ले गए। सिल्क मार्ग इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसने एशिया को यूरोप और उत्तरी अफ्रीका से जोड़ा। इसी तरह नूडल्स चीन से इटली पहुँचकर ‘स्पैगेटी’ बन गए और क्रिस्टोफर कोलंबस की गलती से दुनिया को आलू, टमाटर और मिर्च जैसे नए खाद्य पदार्थ मिले!
उन्नीसवीं सदी और विश्व अर्थव्यवस्था का निर्माण
उन्नीसवीं सदी में दुनिया बहुत तेज़ी से बदली। यूरोप में बढ़ती आबादी का पेट भरने के लिए दुनिया के अन्य हिस्सों से भोजन मँगाया जाने लगा। रेलवे, भाप के जहाज़ों और टेलीग्राफ जैसी तकनीक ने दूरियों को मिटा दिया। लेकिन इसी सदी में साम्राज्यवाद भी बढ़ा। अफ्रीका में रिंडरपेस्ट (मवेशी प्लेग) नाम की एक बीमारी फैल गई, जिसने अफ्रीकियों की आजीविका तबाह कर दी और उन्हें यूरोपीय खदानों में काम करने के लिए मजबूर कर दिया।
भारत के अनुबंधित श्रमिक कौन थे?
उन्नीसवीं सदी में भारत से लाखों मज़दूरों को खदानों और बागानों में काम करने के लिए विदेशों (जैसे कैरेबियाई द्वीप, मॉरीशस, फीजी) में ले जाया गया। इन्हें एक अनुबंध (Contract) के तहत ले जाया जाता था, इसलिए इन्हें ‘गिरमिटिया मज़दूर’ कहा गया। इनका जीवन बहुत कष्टदायक था और यह एक ‘नयी दास-प्रथा’ जैसी थी।
महामंदी और ब्रेटन वुड्स व्यवस्था क्या है?
प्रथम विश्व युद्ध के बाद 1929 में पूरी दुनिया में महामंदी (Great Depression) आ गई। बैंक दिवालिया हो गए, कारखाने बंद हो गए और करोड़ों लोग बेरोज़गार हो गए। इसका असर भारत के किसानों पर भी पड़ा। इसके बाद दूसरे विश्व युद्ध ने दुनिया को और तबाह कर दिया। युद्ध के बाद विश्व अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए 1944 में ‘ब्रेटन वुड्स’ समझौता हुआ, जिससे अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक का जन्म हुआ।
अब खेलें: भूमंडलीकृत विश्व प्रारंभिक क्विज़
यूपी बोर्ड कक्षा 10 इतिहास के इस तीसरे अध्याय के परिचय पर आधारित मजेदार क्विज़ को खेलें और अपनी प्रारंभिक जानकारी की जाँच करें!
Total Slides: 7
Total Questions: 19 | Total Marks: 27