भाग 4: भारत में शुरुआती कारखाने और उद्यमी

पिछले भाग में हमने देखा था कि ईस्ट इंडिया कंपनी के गुमाश्तों और ब्रिटिश मिलों के कारण भारतीय बुनकरों का कैसे पतन हो गया।

लेकिन क्या भारत में कारखाने नहीं खुले? बिल्कुल खुले! उन्नीसवीं सदी के मध्य से भारत में भी औद्योगिक विकास शुरू हो गया था। आज के इस भाग में हम जानेंगे कि भारत में पहली मिल कब और कहाँ खुली, इन कारखानों को लगाने वाले भारतीय उद्यमी कौन थे और वे पैसा कहाँ से लाए थे!

भारत में कारखानों की शुरुआत कैसे हुई?

भारत में फैक्ट्रियों के खुलने की शुरुआत कुछ इस प्रकार हुई:

  • बंबई (मुंबई): भारत की सबसे पहली सूती कपड़ा मिल 1854 में बंबई में स्थापित हुई और 1856 में इसने उत्पादन शुरू कर दिया। 1862 तक बंबई में ऐसी 4 और मिलें खुल चुकी थीं।
  • बंगाल: भारत की पहली जूट मिल 1855 में बंगाल में लगाई गई। सात साल बाद 1862 में एक और जूट मिल खुली।
  • कानपुर और अहमदाबाद: 1860 के दशक में उत्तर प्रदेश के कानपुर में ‘एल्गिन मिल’ खुली और कुछ ही समय बाद अहमदाबाद की पहली सूती मिल भी चालू हो गई।
  • मद्रास (चेन्नई): 1874 में मद्रास में भी कताई और बुनाई मिल ने उत्पादन शुरू कर दिया।

शुरुआती भारतीय उद्यमी कौन थे?

भारत के शुरुआती कारखाने लगाने वाले ज़्यादातर उद्यमी (Entrepreneurs) वे लोग थे जिन्होंने चीन के साथ व्यापार करके बहुत पैसा कमाया था। अंग्रेज़ भारत से चीन को अफीम (Opium) भेजते थे और चीन से चाय इंग्लैंड जाती थी। कई भारतीय व्यापारी इस व्यापार में सहायक के रूप में काम करते थे।

कुछ प्रमुख भारतीय उद्योगपति:

  • द्वारकानाथ टैगोर: बंगाल के इस उद्यमी ने चीन के साथ व्यापार में खूब पैसा कमाया। 1830 के दशक में उन्होंने 6 संयुक्त उद्यम (Joint Stock Companies) लगाए।
  • पारसी उद्यमी: बंबई में दिनशॉ पेटिट और जमशेदजी नसरवानजी टाटा (J.N. Tata) जैसे पारसी व्यापारियों ने विशाल औद्योगिक साम्राज्य खड़े किए। जमशेदजी टाटा ने ही 1912 में भारत का पहला लौह और इस्पात संयंत्र (Iron and Steel Plant) जमशेदपुर में लगाया था।
  • सेठ हुकुमचंद: 1917 में कलकत्ता में देश की पहली ‘भारतीय’ जूट मिल लगाने वाले मारवाड़ी व्यवसायी सेठ हुकुमचंद थे। जी.डी. बिड़ला के पिता और दादा ने भी चीन के व्यापार से ही पूँजी जुटाई थी।

औपनिवेशिक नियंत्रण का क्या प्रभाव पड़ा?

अंग्रेजों ने भारतीय व्यापारियों पर बहुत सारे प्रतिबंध लगा रखे थे। भारतीय व्यापारियों को यूरोप में अपना तैयार माल बेचने की अनुमति नहीं थी। वे केवल कच्चा माल (जैसे कपास, अफीम, गेहूँ) ही निर्यात कर सकते थे।

इसके अलावा, भारत के ज़्यादातर बड़े उद्योगों पर यूरोपीय प्रबंधकीय एजेंसियों (Managing Agencies) का कब्ज़ा था; जैसे—बर्ड हीग्लर्स एंड कंपनी, और एंड्रयू यूल। ये एजेंसियाँ पूँजी तो भारतीय निवेशकों से लेती थीं, लेकिन सारे बड़े फैसले और नियंत्रण अपने हाथों में रखती थीं।

कारखानों के लिए मज़दूर कहाँ से आए?

जैसे-जैसे कारखाने बढ़े, वैसे-वैसे मज़दूरों की माँग भी बढ़ने लगी। कारखानों में काम करने वाले ज़्यादातर मज़दूर आस-पास के गाँवों और जिलों से आते थे। जिन किसानों या कारीगरों को गाँव में काम नहीं मिलता था, वे शहरों की तरफ भागते थे।

  • बंबई के सूती कपड़ा कारखानों में काम करने वाले ज़्यादातर मज़दूर पास के रत्नागिरी ज़िले से आते थे।
  • कानपुर की मिलों में कानपुर ज़िले के ही गाँवों से मज़दूर आते थे। बाद में संयुक्त प्रांत (उत्तर प्रदेश) के लोग काम की तलाश में बंबई और कलकत्ता तक जाने लगे।

कारखानों में ‘जॉबर’ की क्या भूमिका थी?

शहरों में कारखानों की संख्या तो बढ़ रही थी, लेकिन मज़दूरों को नौकरी मिलना बहुत मुश्किल था क्योंकि माँग से ज्यादा मज़दूर मौजूद थे। कारखाने के मालिक नए मज़दूरों की भर्ती के लिए ‘जॉबर’ (Jobber) नाम का एक व्यक्ति रखते थे।

जॉबर कोई पुराना और बहुत भरोसेमंद कर्मचारी होता था। वह अपने गाँव से लोगों को लाता था, उन्हें नौकरी दिलाने का भरोसा देता था और शहर में बसने में उनकी मदद करता था। इसके बदले में, जॉबर मज़दूरों से पैसे और तोहफों की माँग करने लगा था और मज़दूरों की ज़िंदगी को नियंत्रित करने लगा था।

👨‍🏫 शिक्षक की सलाह: बच्चों, बोर्ड परीक्षा में “भारत में पहली सूती मिल कब और कहाँ खुली?”, “द्वारकानाथ टैगोर कौन थे?” और “मज़दूरों की भर्ती में जॉबर की क्या भूमिका थी?” अक्सर पूछे जाते हैं। इन्हें ज़रूर याद करें।

अब खेलें: शुरुआती कारखाने और उद्यमी क्विज़

अब नीचे दिए गए ‘Play Quiz’ बटन पर क्लिक करें और भारत के शुरुआती कारखानों, जमशेदजी टाटा, चीन के व्यापार और जॉबर की भूमिका पर आधारित इन 20 महत्वपूर्ण इतिहास प्रश्नों का अभ्यास करें!

Slow
महत्वपूर्ण इतिहास परिभाषाएँ और व्याख्या

Total Slides: 7

From: To:

Rate this Quiz

Average Rating: 0 / 5 (0 votes)

Click on a star to rate:

Slow
Quiz Icon शुरुआती कारखाने और उद्यमी (Class 10 History)

Total Questions: 19 | Total Marks: 27

Leaderboard (Last 30 Days)

Loading...

अध्याय 4 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:

मुख्य विषय पृष्ठ:

Share this:

Leave a Comment

×
History
All Subjects

Available Courses

ASK