🎓 Log in to save your performance and get free courses in Hindi

Install our UP Board App. Less than 2 MB.

जाति और भारतीय राजनीति

जाति और भारतीय राजनीति का आपस में गहरा संबंध है। भारत में जाति व्यवस्था न केवल सामाजिक बल्कि राजनीतिक ढाँचे को भी प्रभावित करती है। चुनावों में उम्मीदवारों के चयन से लेकर सरकार गठन तक, जाति की भूमिका देखी जा सकती है। हालाँकि, यह धारणा भ्रामक है कि सब कुछ जाति से ही तय होता है। वास्तविकता कहीं अधिक जटिल है। इस लेख में हम जाति और राजनीति के बहुआयामी संबंधों पर चर्चा करेंगे।

मान लीजिए आपके विद्यालय में मॉनीटर का चुनाव हो रहा है। कक्षा में विभिन्न मित्र-मंडली हैं। हर समूह चाहता है कि उसका प्रतिनिधि मॉनीटर बने। अगर शिक्षक हस्तक्षेप न करें तो चुनाव अकसर समूहों के आधार पर ही होता है। ठीक इसी तरह, लोकतांत्रिक राजनीति में जाति भी एक ऐसा ही समूह बन जाती है, लेकिन यह इकलौता कारक नहीं है।

राजनीति में जाति के विविध रूप

राजनीति में जाति कई तरह से अपनी उपस्थिति दर्ज कराती है। सबसे पहले, चुनावों में उम्मीदवारों के चयन के समय राजनीतिक दल इस बात का ध्यान रखते हैं कि किस निर्वाचन क्षेत्र में किस जाति के मतदाता अधिक हैं। उसी के अनुसार उम्मीदवार उतारा जाता है।

दूसरा, सरकार बनते समय विभिन्न जातियों और समुदायों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया जाता है ताकि सरकार सर्वसमावेशी दिखे। मंत्रिमंडल में हर प्रभावशाली जाति को जगह मिलने की उम्मीद रहती है।

तीसरा, चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक दल जातिगत भावनाओं को उकसाकर समर्थन जुटाने का प्रयास करते हैं। कुछ नेता खुलकर जाति के नाम पर वोट माँगते हैं।

चौथा, कुछ राजनीतिक दल मुख्य रूप से कुछ खास जातियों के प्रतिनिधि माने जाते हैं, जैसे बहुजन समाज पार्टी को दलितों की पार्टी कहा जाता है।

सार्वभौमिक मताधिकार और जातीय चेतना

स्वतंत्रता के बाद भारत ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को अपनाया। इससे समाज के हर वयस्क को वोट का अधिकार मिला। इसका गहरा असर हुआ। खासतौर पर पिछड़ी और दलित जातियों में नई राजनीतिक चेतना जागी। वे अब अपनी हिस्सेदारी माँगने लगीं। जाति व्यवस्था में असमानताएँ सदियों से थीं, लेकिन अब उनके पास राजनीतिक आवाज़ आ गई।

क्या चुनाव सिर्फ जाति से जीते जाते हैं?

यह सोचना गलत है कि चुनावी नतीजे केवल जाति से तय होते हैं। पहली बात, किसी भी संसदीय क्षेत्र में किसी एक जाति का पूर्ण बहुमत नहीं होता। हर जगह कई जातियाँ मिली-जुली रहती हैं। इसलिए सभी को साधकर चलना पड़ता है।

दूसरी, एक जाति के सभी मतदाता एकजुट होकर मतदान नहीं करते। हर जाति के भीतर अलग-अलग राय, आर्थिक हालात और पार्टी से जुड़ाव होता है। तीसरा, सत्तारूढ़ दल और उम्मीदवार अकसर चुनाव हार जाते हैं, जो यह दर्शाता है कि मतदाता सिर्फ जाति नहीं देखते। गरीबी, विकास, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे कहीं अधिक महत्व रखते हैं। जब कोई सरकार काम नहीं करती, तो मतदाता उसे बदल देते हैं, चाहे जाति कुछ भी हो।

राजनीति भी जाति को बदल रही है

यह संबंध एकतरफा नहीं है। जिस तरह जाति राजनीति को प्रभावित करती है, उसी तरह राजनीति भी जाति के स्वरूप को बदल रही है। पहले जातियाँ छोटी-छोटी उपजातियों में बँटी थीं, पर अब राजनीतिक फायदे के लिए ये उपजातियाँ आपस में मिलकर बड़ी जातीय इकाइयाँ बना रही हैं।

दूसरा, ‘अगड़ा’ और ‘पिछड़ा’ जैसे बड़े गठबंधन उभरे हैं। ये समूह सामूहिक ताकत दिखाने लगे हैं। इसी प्रकार, दलित और पिछड़ी जातियाँ अब सत्ता में हिस्सेदारी की माँग ज़ोर-शोर से कर रही हैं। यह राजनीति ही है जिसने उन्हें संगठित होने का मौका दिया है।

जातिवाद के नकारात्मक पहलू

हालाँकि, जाति-आधारित राजनीति के कई नकारात्मक प्रभाव भी हैं। यह विकास और गरीबी जैसे बड़े मुद्दों से ध्यान भटकाती है। नेता जाति की बात करके असली समस्याओं से ध्यान हटा लेते हैं। इसके अलावा, जब चुनाव के दौरान जातिगत तनाव बढ़ता है, तो सामाजिक हिंसा और संघर्ष की स्थितियाँ पैदा हो जाती हैं, जो लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। धर्म और सांप्रदायिकता की तरह जातिवाद भी समाज को बाँटता है।

कुल मिलाकर, जाति और राजनीति का रिश्ता बहुत पेचीदा है। जहाँ एक ओर यह वंचित वर्गों को सशक्त कर सकता है, वहीं विभाजन का कारण भी बन सकता है। इसलिए ज़रूरी है कि मतदाता जाति से ऊपर उठकर मुद्दों पर ध्यान दें और राजनीतिक दल भी विकास की बात करें।

👨‍🏫 शिक्षक की सलाह: विद्यार्थियों, इस अध्याय में जाति और राजनीति के पारस्परिक संबंध को समझना सबसे आवश्यक है। बोर्ड परीक्षा में अकसर पूछा जाता है कि “राजनीति में जाति किन-किन रूपों में दिखाई देती है?” और “क्या चुनावी परिणाम केवल जाति से निर्धारित होते हैं?” इन प्रश्नों के उत्तर अच्छी तरह याद कर लें। साथ ही, जातिवाद के नकारात्मक प्रभाव और राजनीति द्वारा जाति में आए बदलावों पर भी नोट्स बनाएँ।
Slow
जाति और भारतीय राजनीति : Quizzes

Total Slides: 8

From: To:

Rate this Quiz

Average Rating: 5 / 5 (3 votes)

Click on a star to rate:

Slow
Quiz Icon जाति और भारतीय राजनीति - प्रश्नोत्तरी

Total Questions: 17 | Total Marks: 25

Leaderboard (Last 30 Days)

Loading...

अध्याय के अन्य महत्वपूर्ण भाग:


मुख्य विषय पृष्ठ:

Share this:

Leave a Comment

×
Political Science

Available Courses

ASK