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राजनीतिक दलों में सुधार के उपाय

राजनीतिक दलों में सुधार के उपाय भारतीय लोकतंत्र की मजबूती के लिए बेहद जरूरी हैं। चुनावी सुधार, दल-बदल विरोधी कानून, उच्चतम न्यायालय के आदेश और चुनाव आयोग के नियमों ने पार्टियों को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की कोशिश की है। फिर भी राजनीतिक दलों के सामने कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं। इस उपपाठ में हम राजनीतिक दलों के समक्ष चुनौतियों को दूर करने के लिए उठाए गए कानूनी कदमों और सुझावों पर चर्चा करेंगे।

कल्पना कीजिए कि आपकी कक्षा में एक समूह है जो हर साल टूट जाता है। कुछ बच्चे पूरे साल समूह बदलते रहते हैं। तब शिक्षक एक नियम लगाते हैं कि अगर कोई समूह बदलेगा तो वह अपना पद खो देगा। इसी तरह राजनीतिक दलों में अनुशासन लाने के लिए नियम बनाए गए हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ कानून से सब ठीक हो जाता है? आइए जानें।

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राजनीतिक दलों में सुधार - नॉलेज स्लाइड्स

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Quiz Icon राजनीतिक दलों में सुधार के उपाय - प्रश्नोत्तरी

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दल-बदल रोकने के लिए संविधान संशोधन

संविधान में 1985 में 52वां संशोधन करके दल-बदल विरोधी कानून बनाया गया। इस कानून के अनुसार, अगर कोई सांसद या विधायक एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाता है, तो वह अपनी सीट गँवा देता है। पहले ऐसा होता था कि चुनाव जीतने के बाद विधायक पार्टी बदल लेते थे और सरकारें गिर जाती थीं। इससे जनता का जनादेश कुचला जाता था। यह कानून बनने के बाद दल-बदल की घटनाओं में कमी आई है।

हालाँकि, इस कानून की एक सीमा यह है कि अब सांसद या विधायक अपनी पार्टी के नेतृत्व के सामने विरोध नहीं जता सकते। अगर वे पार्टी लाइन के खिलाफ वोट करते हैं, तो उन्हें अयोग्य ठहराया जा सकता है। इससे राजनीतिक दलों के भीतर आंतरिक लोकतंत्र कमजोर पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दल-बदल रोकने के लिए यह जरूरी कदम था, लेकिन इसके साथ पार्टी के भीतर असहमति को जगह देना भी जरूरी है।

उच्चतम न्यायालय का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव सुधार के लिए कई ऐतिहासिक आदेश दिए हैं। सबसे महत्वपूर्ण आदेश 2003 में आया। इस आदेश के अनुसार चुनाव लड़ने वाले हर उम्मीदवार को अपनी संपत्ति, शैक्षणिक योग्यता और अपने ऊपर लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी एक शपथपत्र में देनी होती है।

शपथपत्र क्या है?

शपथपत्र एक ऐसा दस्तावेज है जिसमें उम्मीदवार अपने बारे में निजी सूचनाएँ देता है और यह शपथ लेता है कि वह जानकारी सही है। मतदाता शपथपत्र देखकर तय कर सकते हैं कि उम्मीदवार के पास कितनी संपत्ति है और उस पर क्या मुकदमे चल रहे हैं।

लेकिन समस्या यह है कि शपथपत्र में दी गई जानकारी की जाँच की कोई प्रणाली नहीं है। कई उम्मीदवार झूठी जानकारी देकर बच जाते हैं। क्या इससे राजनीति पर अमीरों और अपराधियों का प्रभाव घटा है? स्पष्ट नहीं है। फिर भी, शपथपत्र से मतदाताओं को एक आधार जरूर मिलता है।

चुनाव आयोग के आदेश और सुधार के अन्य सुझाव

चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को पारदर्शी बनाने के लिए कुछ नियम लागू किए हैं। हर दल को अपने संगठन के चुनाव कराने और आयकर रिपोर्ट भरने के नियम बनाए गए हैं। लेकिन कई दल इनका पालना सिर्फ कागजी तौर पर करते हैं। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि इससे दलों की आंतरिक लोकतंत्र मजबूत हुआ है।

आंतरिक कामकाज के लिए कानून

सुधार के लिए यह सुझाव दिया गया है कि सभी दल अपने सदस्यों की सूची रखें, अपने संविधान का पालन करें और विवाद होने पर किसी स्वतंत्र प्राधिकारी से पंच करवाएँ। दल के सबसे बड़े पदों के लिए खुला चुनाव होना चाहिए। इससे दलों के भीतर लोकतंत्र आएगा।

महिला आरक्षण

महिलाओं को राजनीति में बराबरी का स्थान देने के लिए यह सुझाव भी है कि दलों को लगभग एक-तिहाई टिकट महिलाओं को देने चाहिए। साथ ही, दल के प्रमुख पदों पर भी महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग की जाती है।

चुनाव खर्च सरकार उठाए

एक और लोकप्रिय सुझाव यह है कि चुनाव का बोझ सरकार उठाए। दलों को पेट्रोल, कागज़, फोन जैसी सुविधाएँ दी जाएँ या पिछले चुनाव में मिले मतों के अनुपात में नकद धन दिया जाए। ऐसा होने से दलों को अमीर लोगों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

सुधार से जुड़ी सावधानियाँ और दो और तरीके

जरूरी बात यह है कि हर समस्या का हल कानून नहीं होता। दलों को जरूरत से ज्यादा नियमों में बाँधना नुकसानदेह हो सकता है। इसके अलावा, राजनीतिक दल स्वयं ऐसे कानून नहीं बनाएँगे जो उन्हें पसंद न हों। इसलिए सुधार के लिए दबाव और भागीदारी की जरूरत है।

पहला तरीका है दबाव। आम नागरिक, दबाव समूह, आंदोलन और मीडिया दलों पर सुधार का दबाव बना सकते हैं। अगर दलों को लगेगा कि सुधार न किए जाने की स्थिति में उनका जनाधार गिर जाएगा, तो वे सुधार को गंभीरता से लेंगे।

दूसरा तरीका है भागीदारी। जो लोग सुधार चाहते हैं, उन्हें खुद राजनीतिक दलों में शामिल होना चाहिए। लोकतंत्र की गुणवत्ता लोगों की भागीदारी से तय होती है। यही कारण है कि कहा जाता है—खराब राजनीति का समाधान अधिक और बेहतर राजनीति है।

👨🏫 शिक्षक की सलाह: इस पाठ में दल-बदल विरोधी कानून, शपथपत्र और चुनाव आयोग के नियमों को अच्छे से याद रखें। बोर्ड परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है कि दल-बदल विरोधी कानून क्या है और इसके क्या दुष्परिणाम हैं। साथ ही, सुधार के दो तरीकों — दबाव और भागीदारी — को उदाहरण सहित समझना भी महत्वपूर्ण है।

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