खनिजों का वर्गीकरण पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न प्राकृतिक यौगिकों और तत्वों को व्यवस्थित रूप से समझने का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। इस वर्गीकरण से हमें यह जानने में सहायता मिलती है कि किस प्रकार के खनिज कहाँ पाए जाते हैं और उनका उपयोग किस प्रकार किया जाता है। शैल समूहों में उपलब्धता के आधार पर हम यह निर्धारित कर सकते हैं कि विभिन्न खनिजों का खनन आर्थिक रूप से लाभदायक होगा या नहीं। अयस्क की सही पहचान और वर्गीकरण से खनिज संपदा का सही दोहन संभव है।
क्या आपने कभी सोचा है कि आपके घर में उपयोग होने वाले बर्तन, तारें, कोयला या पेट्रोल-डीजल जैसी ऊर्जा कहाँ से आती है? जब हम पहाड़ों या नदियों के किनारे चलते हैं तो कई प्रकार की चट्टानें देखते हैं, जिनमें रंग-बिरंगे खनिज मिले होते हैं। इन्हीं खनिजों से हमें अनेक धातुएँ और ऊर्जा प्राप्त होती है, जो हमारे दैनिक जीवन को बेहतर बनाती हैं। आज हम इसी विषय पर विस्तार से जानेंगे।
खनिजों का वर्गीकरण
खनिज प्राकृतिक रूप से मिलने वाले ऐसे तत्व या यौगिक होते हैं, जिनकी एक निश्चित रासायनिक संरचना और भौतिक गुण होते हैं। इन्हें मुख्यतः तीन वर्गों में बाँटा जाता है: धात्विक, अधात्विक और ऊर्जा खनिज।
1. धात्विक खनिज
वे खनिज जिनमें धातु की मात्रा अधिक होती है और जिन्हें पिघलाकर शुद्ध धातु प्राप्त की जा सकती है, उन्हें धात्विक खनिज कहते हैं। इन्हें आगे तीन उपवर्गों में रखा गया है:
लौह धात्विक खनिज: इनमें लोहे की प्रचुरता होती है। प्रमुख उदाहरण हैं लौह अयस्क (हेमेटाइट व मैग्नेटाइट), मैंगनीज, निकल और कोबाल्ट। ये खनिज इस्पात उद्योग के लिए आधार हैं। भारत में इनके विस्तृत भंडार पाए जाते हैं भारत में प्रमुख खनिजों का वितरण में विस्तार से दिया गया है।
अलौह धात्विक खनिज: इनमें लोहे की मात्रा नगण्य होती है। ताँबा, सीसा (सीसा), जस्ता, बॉक्साइट प्रमुख हैं। ताँबा विद्युत चालन के लिए, बॉक्साइट एल्युमिनियम बनाने में काम आता है।
बहुमूल्य धात्विक खनिज: ये विरल एवं अत्यधिक मूल्यवान होते हैं, जैसे सोना, चाँदी और प्लैटिनम। इनका उपयोग आभूषण, चिकित्सा उपकरणों और आधुनिक तकनीकी में किया जाता है।
2. अधात्विक खनिज
इनमें धातु नहीं पाई जाती और ये सामान्यतः अधात्विक गुण रखते हैं। इमारत निर्माण, रासायनिक उद्योग और अन्य कार्यों में उपयोगी हैं। प्रमुख उदाहरणों में अभ्रक (अभ्रक), संगमरमर, चूना पत्थर और बलुआ पत्थर शामिल हैं। अभ्रक विद्युत रोधी गुण के कारण बिजली के उपकरणों में प्रयोग होता है; चूना पत्थर सीमेंट उद्योग का मूल कच्चा माल है।
3. ऊर्जा खनिज
ये खनिज ईंधन प्रदान करते हैं और आधुनिक सभ्यता की ऊर्जा ज़रूरतें पूरी करते हैं। कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस इस वर्ग के प्रमुख स्रोत हैं। कोयला मुख्यतः ऊर्जा संसाधन: परंपरागत स्रोत में विस्तार से पढ़ा जाएगा। कोयला विद्युत उत्पादन, इस्पात निर्माण और घरेलू ईंधन के लिए, पेट्रोलियम वाहनों और उद्योगों में तथा प्राकृतिक गैस रसोई और उर्वरक कारखानों में उपयोगी है।
शैल समूहों में खनिजों की उपलब्धता
पृथ्वी की शैलें तीन प्रकार की होती हैं: आग्नेय, अवसादी और कायांतरित। इनमें खनिज विभिन्न रूपों में पाए जाते हैं।
(क) आग्नेय व कायांतरित चट्टानों में
ग्रेनाइट, बेसाल्ट जैसी आग्नेय चट्टानों और संगमरमर जैसी कायांतरित चट्टानों में खनिज दरारों, जोड़ों तथा भ्रंशों (फॉल्ट) में शिराओं (नसों) और परतों के रूप में पाए जाते हैं। इन शिराओं में धातुएँ भरी होती हैं, जैसे जस्ता, ताँबा और सीसा प्रायः इसी प्रकार प्राप्त होते हैं।
(ख) अवसादी चट्टानों में
अवसादी चट्टानें परत-दर-परत जमा अवसादों से बनती हैं। इनमें खनिज संस्तरों में निक्षेप के रूप में मिलते हैं। उदाहरण: कोयला, लौह अयस्क, जिप्सम, पोटाश, साधारण नमक, सोडियम आदि। बलुआ पत्थर एवं चूना पत्थर स्वयं भी अवसादी चट्टानें हैं तथा इन्हीं में ये खनिज जमाव पाए जाते हैं।
(ग) चट्टानों के अपघटन से अवशिष्ट के रूप में
चट्टानों के अपक्षय और अपरदन के बाद कुछ अवशेष बच जाते हैं जिनमें खनिज संचित हो जाते हैं। बॉक्साइट, जो एल्युमिनियम का अयस्क है, इसी प्रकार चट्टानों के अपघटन से बचे हुए अवशिष्ट के रूप में पाया जाता है।
(घ) प्लेसर निक्षेपों में
नदियों के जल द्वारा बहाकर लाए गए खनिज कण कुछ स्थानों पर जमा हो जाते हैं, जिन्हें प्लेसर निक्षेप कहते हैं। इनमें सोना, चाँदी, टिन और प्लैटिनम जैसे भारी और बहुमूल्य खनिज प्राप्त होते हैं।
(ड) महासागरीय जल में
समुद्रों और महासागरों के जल में अनेक खनिज घुलित रूप में होते हैं। मैगनीशियम और ब्रोमाइन प्रमुख रूप से समुद्री जल से प्राप्त किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, गहरे सागर में मैंगनीज ग्रंथिकाएँ पाई जाती हैं, जिनमें मैंगनीज, निकल, कोबाल्ट और ताँबा होता है।
अयस्क: परिभाषा और महत्व
किसी खनिज में जब अन्य अवयवों (अशुद्धियों) का मिश्रण हो और उस खनिज से किसी धातु को निकालना आर्थिक रूप से लाभकारी हो, तो उसे ‘अयस्क’ कहा जाता है। सरल शब्दों में, अयस्क वह चट्टान या खनिज पदार्थ है जिसमें किसी मूल्यवान धातु की मात्रा पर्याप्त हो और उसे निकालने का खर्चा बिक्री मूल्य से कम हो। उदाहरणत: बॉक्साइट एल्युमिनियम का अयस्क है, हेमेटाइट लोहे का। यदि किसी खनिज में धातु की मात्रा बहुत कम हो, तो वह अयस्क नहीं कहलाएगा, भले ही उसमें वह धातु क्यों न हो।
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अध्याय के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- भाग 1: खनिज: परिचय एवं महत्व
- You are Reading Here: खनिजों का वर्गीकरण तथा शैल समूहों में उपलब्धता
- भाग 3: भारत में प्रमुख खनिजों का वितरण (धात्विक एवं अधात्विक)
- भाग 4: खनन के प्रभाव एवं खनिज संरक्षण
- भाग 5: ऊर्जा संसाधन: परंपरागत स्रोत
- भाग 6: ऊर्जा संसाधन: गैर-परंपरागत स्रोत एवं संरक्षण