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खनिज तथा ऊर्जा संसाधन: सम्पूर्ण अध्ययन गाइड – कक्षा 10 भूगोल | UP बोर्ड

खनिज तथा ऊर्जा संसाधन (Minerals and Energy Resources) कक्षा 10 भूगोल का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण पाठ है, जो UP बोर्ड के पाठ्यक्रम के अनुसार छात्रों को प्राकृतिक संसाधनों के वर्गीकरण, वितरण, उपयोग और संरक्षण के बारे में गहन जानकारी प्रदान करता है। इस लेख में हम खनिजों के विभिन्न प्रकार, भारत में उनके भंडार, ऊर्जा के परंपरागत एवं गैर-परंपरागत स्रोतों तथा संरक्षण के उपायों का सविस्तार अध्ययन करेंगे। खनिज पृथ्वी की ऊपरी परत से प्राप्त होने वाले अकार्बनिक ठोस पदार्थ हैं जिनकी एक निश्चित रासायनिक संरचना होती है। ये हमारे दैनिक जीवन में रसोई के बर्तनों से लेकर भवन निर्माण सामग्री तक, हर जगह उपयोग में आते हैं। ऊर्जा संसाधनों के बिना आधुनिक सभ्यता की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

एक रोचक वास्तविक जीवन उदाहरण

क्या आपने कभी सोचा है कि आपके दांतों को चमकाने वाले टूथपेस्ट में क्या होता है? इसमें सिलिका, चूना पत्थर, एल्युमिनियम ऑक्साइड और फ्लोराइड जैसे खनिज होते हैं जो आपकी मुस्कान को निखारते हैं। जिस टूथब्रश और प्लास्टिक ट्यूब का हम उपयोग करते हैं, वे पेट्रोलियम से व्युत्पन्न होते हैं। स्कूल बस, कार, मोटरसाइकिल और हवाई जहाज सभी धातुओं से बने हैं और इन्हें चलाने के लिए पेट्रोल-डीज़ल जैसे ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता होती है। बिजली के तार ताँबे के बने होते हैं और बल्ब में टंगस्टन का प्रयोग होता है। यहाँ तक कि हमारे भोजन में भी खनिज लवणों का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इस प्रकार, खनिज और ऊर्जा हमारे जीवन के अभिन्न अंग हैं।

खनिज क्या हैं?

खनिज भू-गर्भ में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले ठोस, अकार्बनिक पदार्थ हैं जिनकी एक निश्चित रासायनिक संरचना और क्रिस्टलीय संरचना होती है। ये प्रकृति में अनेक रूपों में मिलते हैं—हीरे जैसे कठोर से लेकर चूने के पत्थर जैसे नरम तक। चट्टानें विभिन्न खनिजों के मिश्रण से बनी होती हैं। खनिजों का अध्ययन भू-वैज्ञानिकों और भूगोलवेत्ताओं दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण है।

खनिजों का वर्गीकरण

व्यापारिक दृष्टि से खनिजों को मुख्यतः तीन श्रेणियों में बाँटा जा सकता है: धात्विक खनिज, अधात्विक खनिज, और ऊर्जा खनिज

1. धात्विक खनिज (Metallic Minerals)

ये वे खनिज होते हैं जिनसे धातु निकाली जाती है, जैसे लौह अयस्क, मैंगनीज़, ताँबा, बॉक्साइट, सोना, चाँदी, जस्ता आदि। लौह धात्विक खनिजों में लोहा, मैंगनीज़, निकल और कोबाल्ट प्रमुख हैं जबकि अलौह खनिजों में ताँबा, सीसा, जस्ता, बॉक्साइट और बहुमूल्य धातुएँ शामिल हैं।

2. अधात्विक खनिज (Non-Metallic Minerals)

इनमें धातु का अंश नहीं होता, उदाहरण के लिए अभ्रक (Mica), चूना पत्थर (Limestone), जिप्सम, नमक, पोटाश आदि। ये उद्योगों में कच्चे माल के रूप में काम आते हैं।

3. ऊर्जा खनिज (Energy Minerals)

कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और यूरेनियम ऊर्जा उत्पादन के प्रमुख स्रोत हैं।

खनिजों की प्राप्ति के स्रोत

खनिज विभिन्न प्रकार की चट्टानों में पाए जाते हैं:

1. आग्नेय एवं कायांतरित चट्टानों में

इन चट्टानों की दरारों, जोड़ों और भ्रंशों में खनिज शिराओं (Veins) और परतों (Lodes) के रूप में पाए जाते हैं। जस्ता, ताँबा, सीसा आदि इसी श्रेणी में आते हैं।

2. अवसादी चट्टानों में

कोयला, लौह अयस्क, जिप्सम, चूना पत्थर और नमक जैसे खनिज अवसादी चट्टानों की परतों में संचयन (Accumulation) और निक्षेपण (Deposition) द्वारा बनते हैं।

3. अपक्षय और जलोढ़ निक्षेपों में

बॉक्साइट चट्टानों के अपघटन के बाद अवशिष्ट चट्टानों में पाया जाता है। कुछ खनिज नदियों के जलोढ़ निक्षेपों (Placer Deposits) में मिलते हैं जैसे सोना, चाँदी, टिन, प्लेटिनम आदि।

भारत में प्रमुख खनिजों का वितरण

भारत विविध खनिज संसाधनों से भरपूर है परन्तु इनका वितरण असमान है। प्रायद्वीपीय पठार में धात्विक खनिजों के विशाल भंडार हैं जबकि हिमालयी क्षेत्रों और उत्तरी मैदानों में जलोढ़ मिट्टी होने के कारण खनिजों की कमी है। आइए प्रमुख खनिजों का अध्ययन करें।

लौह अयस्क (Iron Ore)

लौह अयस्क भारत का सबसे महत्त्वपूर्ण धात्विक खनिज है और यह औद्योगिक विकास की रीढ़ है। भारत उच्च कोटि के लौह अयस्क (हेमेटाइट एवं मैग्नेटाइट) में समृद्ध है। मैग्नेटाइट (70% लौहांश) सर्वोत्तम होता है तथा इसमें चुम्बकीय गुण होते हैं। हेमेटाइट (50-60% लौहांश) सर्वाधिक प्रयुक्त होने वाला औद्योगिक अयस्क है।

भारत में लौह अयस्क की चार प्रमुख पेटियाँ हैं:

  • ओडिशा-झारखंड पेटी: मयूरभंज, केंदुझर (बादाम पहाड़), सिंहभूम (गुआ, नोआमुंडी)।
  • दुर्ग-बस्तर-चंद्रपुर पेटी: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में बेलाडिला पहाड़ियाँ। विश्व प्रसिद्ध हेमेटाइट, विशाखापट्टनम बंदरगाह से निर्यात होता है।
  • बल्लारी-चित्रदुर्ग-चिक्कमगलूरु-तुमकुरु पेटी: कर्नाटक में, कुद्रेमुख विश्व का सबसे बड़ा लौह अयस्क निक्षेप माना जाता है। यहाँ से खनिज का घोल (Slurry) पाइपलाइन द्वारा मंगलौर बंदरगाह तक पहुँचाया जाता है।
  • महाराष्ट्र-गोवा पेटी: रत्नागिरी, गोवा। मरमागाँव बंदरगाह से निर्यात।

मैंगनीज़

मैंगनीज़ इस्पात निर्माण में अत्यावश्यक है (1 टन इस्पात में 10 किग्रा मैंगनीज़ लगता है)। इसका उपयोग विरंजक चूर्ण, कीटनाशक और पेंट उद्योगों में भी होता है। ओडिशा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है, इसके बाद कर्नाटक, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र का स्थान है।

बॉक्साइट (Bauxite)

बॉक्साइट एल्युमिनियम का प्रमुख अयस्क है। यह हल्की, मजबूत और सुचालक धातु है। इसका निर्माण चट्टानों के अपक्षय से होता है। ओडिशा (पंचपतमाली, कोरापुट) भारत का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। गुजरात, झारखंड और महाराष्ट्र अन्य महत्त्वपूर्ण उत्पादक हैं।

अभ्रक (Mica)

अभ्रक अपनी उत्कृष्ट विद्युत रोधी क्षमता और पारदर्शिता के कारण इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों में अपरिहार्य है। यह पत्तरों में पाया जाता है। झारखंड की कोडरमा-गया-हजारीबाग पेटी, राजस्थान का अजमेर क्षेत्र और आंध्र प्रदेश की नेल्लोर पेटी मुख्य उत्पादक क्षेत्र हैं।

चूना पत्थर (Limestone)

चूना पत्थर (कैल्शियम कार्बोनेट) एक अवसादी चट्टान है जो सीमेंट उद्योग के लिए अनिवार्य है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक प्रमुख उत्पादक हैं।

ऊर्जा संसाधन (Energy Resources)

ऊर्जा हमारे जीवन के हर पहलू के लिए आवश्यक है। ऊर्जा संसाधनों को परंपरागत (Conventional) और गैर-परंपरागत (Non-Conventional) में बाँटा जाता है।

परंपरागत ऊर्जा स्रोत

कोयला (Coal)

भारत का सबसे प्रचुर जीवाश्म ईंधन है। देश की लगभग 55% ऊर्जा आवश्यकता कोयले से पूरी होती है। कोयला निम्न प्रकार का होता है:

  • पीट (Peat): निम्न कार्बन, अधिक नमी, घटिया ईंधन।
  • लिग्नाइट (Lignite): निम्न कोटि का भूरा कोयला।
  • बिटुमिनस (Bituminous): सबसे अधिक पाया जाने वाला कोयला।
  • एंथ्रासाइट (Anthracite): उच्चतम कोटि का कठोर कोयला।

भारत में कोयले के प्रमुख भंडार दामोदर नदी घाटी (झारखंड, पश्चिम बंगाल), गोदावरी, महानदी, वर्धा और सोन घाटियों में हैं। झारखंड का झरिया, बोकारो, रानीगंज (पश्चिम बंगाल), सिंगरौली (मध्य प्रदेश), और कोरबा (छत्तीसगढ़) प्रमुख क्षेत्र हैं।

पेट्रोलियम (Petroleum)

पेट्रोलियम को तरल सोना कहा जाता है। भारत के प्रमुख तेल क्षेत्र हैं: मुंबई हाई (अपतटीय), गुजरात (अंकलेश्वर, कलोल), असम (डिगबोई, नहरकटिया, मोरान)। तेल परिष्करण कारखाने बरौनी, मथुरा, जामनगर, कोच्चि, विशाखापट्टनम आदि में स्थित हैं।

प्राकृतिक गैस (Natural Gas)

प्राकृतिक गैस एक स्वच्छ ईंधन है। प्रमुख गैस क्षेत्र मुंबई हाई, बसीन, गुजरात के हजीरा, और राजस्थान में हैं। देश में HVJ (हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर) गैस पाइपलाइन ने गैस ग्रिड का विस्तार किया है। गैस का उपयोग उर्वरक, बिजली और घरेलू ईंधन के रूप में होता है।

विद्युत (Electricity)

विद्युत उत्पादन मुख्यतः दो प्रकार से होता है:

  • जल विद्युत: तीव्र बहते जल से टरबाइन चलाकर (नवीकरणीय)। प्रमुख बाँध: भाखड़ा नांगल, हीराकुंड, नागार्जुन सागर।
  • ताप विद्युत: कोयला, पेट्रोलियम या गैस जलाकर (अनवीकरणीय)।

गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोत

ये पर्यावरण-हितैषी, नवीकरणीय और अपार संभावनाओं वाले स्रोत हैं।

सौर ऊर्जा (Solar Energy)

भारत उष्णकटिबंधीय देश है, यहाँ सूर्यातप अपार है। फोटोवोल्टाइक तकनीक से सौर ऊर्जा को विद्युत में बदला जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में सौर लैंप, सौर कुकर लोकप्रिय हैं। गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में बड़े सौर संयंत्र स्थापित हैं।

पवन ऊर्जा (Wind Energy)

तमिलनाडु का नागरकोइल से मदुरई तक का क्षेत्र भारत का सबसे बड़ा पवन फार्म है। गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक भी पवन ऊर्जा में अग्रणी हैं।

ज्वारीय ऊर्जा (Tidal Energy)

समुद्री ज्वार-भाटा के कारण बाँध में संचित जल से टरबाइन चलाकर विद्युत उत्पन्न की जाती है। गुजरात में खंभात और कच्छ की खाड़ियाँ तथा सुंदरवन क्षेत्र ज्वारीय ऊर्जा के लिए उपयुक्त हैं।

भू-तापीय ऊर्जा (Geothermal Energy)

पृथ्वी के आंतरिक ताप से गर्म हुए जल (भूगर्भिक स्रोत) से विद्युत उत्पन्न होती है। हिमाचल प्रदेश की मणिकरण (पार्वती घाटी) और लद्दाख की पूरा घाटी में प्रायोगिक परियोजनाएँ चल रही हैं।

बायोगैस (Biogas)

गाँवों में गोबर और कृषि अवशेषों से श्रेष्ठ गुणवत्ता वाली बायोगैस और उर्वरक प्राप्त होते हैं। ‘गोबर गैस’ प्लांट पारिवारिक स्तर पर स्थापित किए जा सकते हैं।

परमाणु ऊर्जा (Nuclear Power)

यूरेनियम और थोरियम जैसे रेडियोधर्मी खनिजों के विखंडन से प्राप्त ऊष्मा से विद्युत उत्पन्न की जाती है। राजस्थान की अरावली, झारखंड और केरल की मोनाजाइट बालू से यूरेनियम/थोरियम प्राप्त होते हैं। प्रमुख आणविक ऊर्जा केंद्र: तारापुर, रावतभाटा, कलपक्कम, नरोरा, कैगा आदि।

खनिज और ऊर्जा का संरक्षण

खनिज एक सीमित, अनवीकरणीय संसाधन हैं जिनके निर्माण में करोड़ों वर्ष लगते हैं। फिर भी हम तीव्र गति से इनका दोहन कर रहे हैं। अतः इनका सतत उपयोग आवश्यक है। संरक्षण के उपाय:

  • निम्न कोटि के अयस्कों का उपयोग।
  • धातुओं का पुनर्चक्रण (Recycling)।
  • वैकल्पिक पदार्थों का प्रयोग।
  • ऊर्जा बचत हेतु सार्वजनिक परिवहन, बिजली के उपकरणों का कुशल उपयोग।
  • गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों को प्रोत्साहन।

“ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा उत्पादन है।”

👨🏫 शिक्षक की सलाह: बच्चों, यह अध्याय बोर्ड परीक्षा के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। कोयले और लौह अयस्क के वितरण को मानचित्र में अभ्यास करो। खनिजों के वर्गीकरण और ऊर्जा स्रोतों के बीच अंतर को स्पष्ट करना सीखो। प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न हैं: ‘भारत में कोयले का वितरण समझाइए’ और ‘गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों का वर्णन कीजिए’। खनिजों की प्राप्ति के स्रोतों और अभ्रक, चूना पत्थर जैसे अधात्विक खनिजों के उपयोग को भी याद रखें। रैट होल खनन और खनिकों के स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे भी संभावित प्रश्न हैं। नियमित रूप से पुनरावृत्ति करें और संक्षिप्त नोट्स बनाएँ।
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