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कृषि आधारित उद्योग (Agro-Based Industries) सम्पूर्ण व्याख्या एवं ऑनलाइन टेस्ट

कृषि आधारित उद्योग

बेटा/बेटी, हमारे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी हैं ये कृषि आधारित उद्योग। सोचते हो कि हमारे जीवन में कितने ऐसे उत्पाद हैं जो सीधे खेत से आते हैं! जैसे कपास से सूती वस्त्र, पटसन से बोरे, और गन्ना से चीनी। आज के पाठ में हम इन तीन महत्वपूर्ण उद्योगों के बारे में विस्तार से समझेंगे।

तुम्हें पता है न, हम रोज़ाना सूती कपड़े पहनते हैं, चाय में चीनी डालते हैं, और स्कूल बैग में जो रस्सी होती है वो भी पटसन की होती है। अपनी सुबह की शुरुआत की चादर से लेकर स्कूल की किताबों तक – हर जगह इन उद्योगों का हाथ है। हमने पिछले पाठ में सीखा था कि उद्योगों को कैसे वर्गीकृत किया जाता है, और अब इन कृषि आधारित उद्योगों की गहराई में चलते हैं जो न केवल रोजगार देते हैं बल्कि हमारे किसानों की कमाई को भी बढ़ावा देते हैं।

सूती वस्त्र उद्योग

बेटा, भारत का सबसे पुराना और महत्वपूर्ण कृषि आधारित उद्योग है ये सूती वस्त्र उद्योग। पुराने समय में तो घर-घर में हाथ से कताई और बुनाई होती थी, जैसे दादी-नानी करते थे। फिर 1854 में बॉम्बे (अब मुंबई) में पहली सूती मिल लगी जिसने इस उद्योग को आधुनिक रूप दिया। आज ये उद्योग मुख्य रूप से महाराष्ट्र और गुजरात में बसा हुआ है।

महाराष्ट्र-गुजरात में केन्द्रण के कारण

सोचो बेटा, ये दो राज्य ही क्यों? इसके पीछे कई कारण हैं:

  • कपास उत्पादन: यहाँ कपास की पैदावार इतनी ज़्यादा है कि कच्चे माल की कोई कमी नहीं।
  • बाजार: मुंबई, अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में ग्राहकों की बड़ी बाज़ार है।
  • परिवहन: यहाँ सड़कें, रेल और बंदरगाह सब कुछ इतना अच्छा है कि माल ढोना आसान है।
  • बंदरगाह: मुंबई बंदरगाह से कच्चा माल बाहर से मंगाया जा सकता है और तैयार माल बाहर भेजा जा सकता है।
  • श्रम: यहाँ सस्ता और हुनरमंद कामगार आसानी से मिल जाता है।
  • आर्द्र जलवायु: नमी वाली हवा कपास की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करती है।

कताई एवं बुनाई का वितरण

बेटा, इस उद्योग में दो मुख्य काम होते हैं – कताई (धागा बनाना) और बुनाई (कपड़ा बनाना)। कताई ज्यादातर मशीनों द्वारा महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु में होती है, लेकिन बुनाई का काम बिखरा हुआ है। बहुत से लोग आज भी हथकरघा, खादी और बिजली के करघों पर कपड़ा बुनते हैं।

गांधी जी ने खादी पर इतना ज़ोर इसलिए दिया क्योंकि वे चाहते थे कि गाँव आत्मनिर्भर बनें। खादी वो कुटीर उद्योग है जहाँ सूत हाथ से काता जाता है और कपड़ा बुना जाता है।

इस उद्योग में कपास चुनने से लेकर सिलाई करने तक हर काम के लिए लोग लगते हैं। ये कृषि के बाद सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र है।

पटसन उद्योग

बेटा, पटसन को ‘गोल्डन फाइबर’ कहते हैं क्योंकि इसकी चमक सोने जैसी होती है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा पटसन पैदा करने वाला देश है, मगर निर्यात में बांग्लादेश से पीछे है। इसका इस्तेमाल बोरे, रस्सी, कालीन, और पैकेजिंग सामग्री बनाने में होता है।

हुगली नदी तट पर संकेंद्रण

ये उद्योग मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के किनारे बसा है। इसके पीछे ये कारण हैं:

  • पटसन उत्पादन क्षेत्र: पश्चिम बंगाल और उसके आसपास के इलाके पटसन उगाने के लिए सबसे उपयुक्त हैं।
  • सस्ता जल परिवहन: नदी के रास्ते पटसन ढोना सबसे सस्ता पड़ता है।
  • सड़क-रेल संपर्क: यहाँ से सड़क और रेल मार्ग से दूसरे शहरों तक पहुँचना आसान है।
  • पर्याप्त जल: पटसन बनाने में बहुत पानी चाहिए और हुगली नदी से लगातार पानी मिलता रहता है।
  • सस्ता श्रम: यहाँ इतनी आबादी है कि सस्ता कामगार आसानी से मिल जाता है।
  • कोलकाता बंदरगाह: तैयार माल बाहर भेजने के लिए कोलकाता बंदरगाह बहुत अच्छा है।

बेटा, दिलचस्प बात ये है कि पटसन की पहली मिल 1855 में रिशरा में लगी थी। भारत के बंटवारे के बाद हमारा तीन-चौथाई पटसन उत्पादन क्षेत्र बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) चला गया, फिर भी हम आत्मनिर्भर रहे।

चीनी उद्योग

बेटा, भारत चीनी बनाने में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है, जबकि गुड़-खांडसरी बनाने में हम नंबर 1 हैं। गन्ना एक भारी और जल्दी खराब होने वाली फसल है, इसलिए चीनी मिलों का गन्ना खेत के पास होना ज़रूरी है।

उत्तर प्रदेश-बिहार में संकेंद्रण

देश की लगभग 60% चीनी मिलें उत्तर प्रदेश और बिहार में हैं, मगर बीते सालों में महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु में भी ये उद्योग तेज़ी से बढ़ा है। इसके कारण हैं:

  • अधिक सूक्रोज: इन राज्यों की जलवायु में गन्ने में चीनी ज़्यादा बनती है।
  • ठंडी जलवायु: गन्ने के पकने के समय ठंडी मौसम चीनी बढ़ाने में मदद करती है।
  • सफल सहकारी समितियाँ: महाराष्ट्र में सहकारी चीनी मिलों की सफलता ने पूरे क्षेत्र को बदल दिया।

बेटा, ये उद्योग मौसमी है क्योंकि गन्ना साल में सिर्फ नवंबर से अप्रैल के बीच मिलता है। बाकी महीनों में मिलें बंद रहती हैं। इसीलिए ये सहकारी क्षेत्र के लिए सबसे अच्छा है जहाँ किसान खुद अपनी समिति के ज़रिए मिल चलाते हैं।

👨🏫 शिक्षक की सलाह:

परीक्षा में अक्सर ये सवाल पूछे जाते हैं:

– सूती वस्त्र उद्योग के महाराष्ट्र-गुजरात में केंद्रित होने के कारण
– पटसन उद्योग का हुगली नदी तट पर स्थानीयकरण का कारण
– चीनी उद्योग का सहकारी क्षेत्र के लिए अनुकूलता

इन सवालों को अच्छी तरह समझो और तार्किक उत्तर लिखने की प्रैक्टिस करो। साथ ही, पुराने समय से आधुनिक समय तक के बदलाव पर ध्यान दो।

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