🎓 Log in to save your performance and get free courses
My Course My Report Log In

Install the QSH India App

⭐ Thousands of students installed

भाग 2: बहुउद्देशीय नदी परियोजनाएँ और उनके प्रभाव

कक्षा 10 भूगोल के इस भाग में हम भारत के जल संसाधन प्रबंधन के एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू—बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं और बाँधों के बारे में अध्ययन करेंगे। हमने पिछले भाग में पढ़ा कि जल दुर्लभता आज हमारे लिए कितनी बड़ी चुनौती बन गई है। इस समस्या से निपटने के लिए जल का संरक्षण और सही प्रबंधन बेहद आवश्यक है। पुरातत्त्व वैज्ञानिक और ऐतिहासिक दस्तावेज़ हमें बताते हैं कि भारत में प्राचीन काल से ही जल संरक्षण की उत्कृष्ट परंपरा रही है। सिंचाई के लिए पत्थरों और मलबे से बाँध बनाना, जलाशयों या झीलों का निर्माण करना और नहरें खोदना हमारे पूर्वजों की वैज्ञानिक सोच को दर्शाता है। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि हमने इसी महान परिपाटी को आधुनिक भारत में भी जारी रखा है और अपने देश की प्रमुख नदियों के बेसिनों पर बड़े-बड़े बाँध बनाए हैं। आइए इन परियोजनाओं और इनसे जुड़े विवादों को विस्तार से समझते हैं।

प्राचीन भारत में जलीय कृतियाँ

भारत में जल संरक्षण का इतिहास बहुत पुराना है। कुछ महत्वपूर्ण प्राचीन जलीय कृतियों के उदाहरण निम्नलिखित हैं:

  • ईसा से एक शताब्दी पहले, इलाहाबाद (प्रयागराज) के नज़दीक शृंगवेरपुर में गंगा नदी की बाढ़ के पानी को सहेजने के लिए एक बहुत ही शानदार और उत्कृष्ट जल संग्रहण तंत्र बनाया गया था।
  • चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल के दौरान भारत में बड़े स्तर पर बाँधों, झीलों और सिंचाई तंत्रों का निर्माण करवाया गया था।
  • ओडिशा के कलिंग, आंध्र प्रदेश के नागार्जुनकोंडा, कर्नाटक के बेन्नूर और महाराष्ट्र के कोल्हापुर में आज भी प्राचीन काल के उत्कृष्ट सिंचाई तंत्रों के अवशेष और सबूत देखने को मिलते हैं।
  • 11वीं शताब्दी में भोपाल में अपने समय की सबसे बड़ी कृत्रिम झीलों में से एक ‘भोपाल झील’ का निर्माण किया गया था।
  • 13वीं और 14वीं शताब्दी में अलाउद्दीन खिलजी ने दिल्ली के सिरी फोर्ट इलाके में पानी की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए ‘हौज खास’ नाम का एक विशिष्ट और विशाल तालाब बनवाया था।

बाँध क्या हैं और बहुउद्देशीय परियोजनाएँ

परंपरागत रूप से बाँध इसलिए बनाए जाते थे ताकि नदियों और वर्षा के जल को इकट्ठा करके बाद में उसका उपयोग खेतों की सिंचाई के लिए किया जा सके। तकनीकी भाषा में ‘बाँध’ बहते जल को रोकने, उसकी दिशा बदलने या उसका बहाव कम करने के लिए खड़ी की गई एक बाधा है, जो आमतौर पर एक जलाशय, झील या जलभरण का निर्माण करती है। बाँध का अर्थ मुख्य रूप से उस जलाशय से लिया जाता है जिसमें पानी जमा होता है, न कि केवल उस कंक्रीट के ढाँचे से। निर्माण में प्रयुक्त पदार्थों के आधार पर बाँध लकड़ी के बाँध, तटबंध बाँध या पक्के बाँध हो सकते हैं। ऊँचाई के अनुसार इन्हें बड़े बाँध, मध्यम बाँध या उच्च बाँधों में वर्गीकृत किया जाता है।

आज के समय में बाँध केवल सिंचाई के लिए ही नहीं बनाए जाते हैं। अब इन बाँधों का निर्माण एक ही समय में कई सारे उद्देश्यों को पूरा करने के लिए किया जाता है, जैसे:

  • विद्युत उत्पादन (पनबिजली बनाना)
  • शहरों और कारखानों के लिए जल आपूर्ति
  • बाढ़ नियंत्रण
  • आंतरिक नौचालन (नाव चलाना)
  • मछली पालन और मनोरंजन

चूँकि इन परियोजनाओं में एकत्रित जल के अनेक उपयोग समन्वित होते हैं, इसलिए इन्हें बहुउद्देशीय परियोजनाएँ कहा जाता है। भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इन परियोजनाओं की विशालता और देश के विकास में इनके योगदान को देखते हुए इन्हें ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ कहा था। उनका मानना था कि इन बाँधों के निर्माण से देश में कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, औद्योगीकरण और नगरीय अर्थव्यवस्था का समन्वित रूप से विकास होगा। इसके प्रमुख उदाहरण हैं:

  • सतलुज-ब्यास बेसिन में स्थित भाखड़ा नांगल परियोजना, जिसका उपयोग जल विद्युत उत्पादन और सिंचाई दोनों के लिए होता है।
  • महानदी बेसिन में स्थित हीराकुड परियोजना, जो जल संरक्षण और बाढ़ नियंत्रण का एक बेजोड़ समन्वय है।

बाँधों से होने वाले नुकसान और विवाद

स्वतंत्रता के बाद जिन बहुउद्देशीय परियोजनाओं को देश के विकास का वाहन माना जाता था, वे पिछले कुछ वर्षों में कड़ी आलोचना और कड़े विरोध का विषय बन गई हैं। इन परियोजनाओं से होने वाले नुकसान निम्नलिखित हैं:

1. पारिस्थितिकीय प्रभाव

नदियों पर बड़े बाँध बनाने और उनका बहाव नियंत्रित करने से नदी का प्राकृतिक बहाव रुक जाता है। इसके कारण नदी के पानी के साथ बहकर आने वाला तलछट (गाद) आगे नहीं जा पाता और जलाशय की तली में ही जमा होता रहता है। इससे नदी का तल अधिक चट्टानी हो जाता है और नदी में रहने वाले जलीय जीवों के आवास और भोजन की भारी कमी हो जाती है। बाँध नदियों को कई टुकड़ों में बाँट देते हैं, जिससे विशेषकर अंडे देने के मौसम में जलीय जीवों का नदियों में इधर-उधर जाना (स्थानांतरण) पूरी तरह रुक जाता है। इसके अलावा, बाँध के कारण बनने वाले विशाल जलाशय में आस-पास के जंगल, वनस्पति और उपजाऊ मिट्टियाँ डूब जाती हैं और कालांतर में सड़-गल कर नष्ट हो जाती हैं।

2. विस्थापन और सामाजिक समस्याएँ

बड़े बाँधों के निर्माण का सबसे दुखद पहलू स्थानीय समुदायों का विस्थापन है। बाँध बनने के कारण हज़ारों किसानों, आदिवासियों और स्थानीय लोगों को अपनी ज़मीन, अपनी आजीविका और अपने पुश्तैनी घरों को हमेशा के लिए छोड़ना पड़ता है। विस्थापित लोगों को इन परियोजनाओं का कोई सीधा लाभ नहीं मिल पाता है। इसका लाभ केवल बड़े ज़मींदारों, अमीर किसानों और शहरी उद्योगों को मिलता है। यही कारण है कि इन परियोजनाओं के खिलाफ नर्मदा बचाओ आंदोलन और टिहरी बाँध आंदोलन जैसे बड़े जन-आंदोलन खड़े हुए हैं।

3. बाढ़ और अंतर्राज्यीय विवाद

यह एक बहुत बड़ी विडंबना है कि जो बाँध बाढ़ नियंत्रण के लिए बनाए जाते हैं, कई बार वही बाढ़ का कारण बन जाते हैं। जलाशयों में बहुत अधिक तलछट जमा हो जाने के कारण पानी रोकने की क्षमता कम हो जाती है। जब अत्यधिक वर्षा होती है, तो इन बड़े बाँधों से अचानक भारी मात्रा में पानी छोड़ना पड़ता है, जिससे निचले इलाकों में भयंकर बाढ़ आ जाती है। इसके अतिरिक्त, बाँधों के कारण नदियों के जल बँटवारे को लेकर विभिन्न राज्यों के बीच झगड़े भी बढ़ते जा रहे हैं। कृष्णा-गोदावरी विवाद इसका एक प्रमुख उदाहरण है, जहाँ महाराष्ट्र सरकार द्वारा कोयना पर बाँध बनाकर जल की दिशा मोड़ने का कर्नाटक और आंध्र प्रदेश सरकारों ने कड़ा विरोध किया था।

👨‍🏫 शिक्षक की सलाह: बोर्ड परीक्षा में यह प्रश्न बार-बार पूछा जाता है कि “जवाहरलाल नेहरू ने बहुउद्देशीय परियोजनाओं को ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ क्यों कहा?” इसके अलावा “नर्मदा बचाओ आंदोलन” और बाँधों से होने वाले तीन प्रमुख नुकसान भी दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। इन्हें अपनी कॉपी में लिखकर अभ्यास करें।

क्विज़ खेलें और अपनी तैयारी जांचें

Slow
महत्वपूर्ण भूगोल परिभाषाएँ और व्याख्या

Total Slides: 7

From: To:

Rate this Quiz

Average Rating: 5 / 5 (1 votes)

Click on a star to rate:

Slow
Quiz Icon बहुउद्देशीय नदी परियोजनाएँ QUIZ

Total Questions: 20 | Total Marks: 32

Leaderboard (Last 30 Days)

Loading...

महत्वपूर्ण लिंक

Share this:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

×
Geography

Available Courses

ASK