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भाग 3: प्रतिरोधकों का संयोजन श्रेणीक्रम और पार्श्वक्रम में कैसे होता है?

पिछले भाग में हमने जाना था कि हर चालक (तार) में बिजली को रोकने का एक गुण होता है, जिसे ‘प्रतिरोध’ कहते हैं।

हमारे घरों में टीवी, पंखा, फ्रिज जैसे कई उपकरण एक साथ चलते हैं। इन सभी उपकरणों का अपना-अपना प्रतिरोध होता है। जब हमें परिपथ में बिजली की मात्रा को कम या ज्यादा करना होता है, तो हम इन प्रतिरोधकों को अलग-अलग तरीकों से जोड़ते हैं। विज्ञान में प्रतिरोधकों को परस्पर संयोजित करने की मुख्य रूप से दो विधियाँ हैं[cite: 3]। आज हम इन्हीं दोनों विधियों—श्रेणीक्रम और पार्श्वक्रम संयोजन के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे।

श्रेणीक्रम संयोजन क्या है और इसके नियम क्या हैं?

जब दो या दो से अधिक प्रतिरोधकों को एक सिरे से दूसरा सिरा मिलाकर (एक लाइन में) जोड़ा जाता है, तो प्रतिरोधकों के इस संयोजन को श्रेणीक्रम संयोजन (Series Combination) कहा जाता है[cite: 3]。

श्रेणीक्रम संयोजन की कुछ बहुत ही खास बातें (नियम) होती हैं:

  1. विद्युत धारा समान रहती है: श्रेणीक्रम संयोजन में परिपथ के हर भाग में विद्युत धारा (I) का मान बिल्कुल समान होता है[cite: 3]। यानी हर उपकरण से एक बराबर बिजली गुजरेगी।
  2. विभवांतर बँट जाता है: बैटरी का कुल विभवांतर (V), सभी प्रतिरोधकों के अलग-अलग विभवांतरों के योग के बराबर होता है ($V = V_1 + V_2 + V_3$)[cite: 3]।
  3. तुल्य प्रतिरोध बढ़ता है: जब बहुत से प्रतिरोधक श्रेणीक्रम में संयोजित होते हैं, तो संयोजन का कुल (तुल्य) प्रतिरोध उनके व्यष्टिगत (अलग-अलग) प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है[cite: 3]।

    सूत्र: $R_s = R_1 + R_2 + R_3$[cite: 3]

इस प्रकार संयोजन का कुल प्रतिरोध किसी भी अकेले प्रतिरोधक के प्रतिरोध से हमेशा अधिक होता है[cite: 3]。

पार्श्वक्रम (समांतर) संयोजन क्या है?

जब तीन या उससे अधिक प्रतिरोधकों को एक साथ किन्हीं दो बिंदुओं (जैसे X और Y) के बीच संयोजित किया जाता है, तो इस प्रकार के संयोजन को पार्श्वक्रम संयोजन (Parallel Combination) कहा जाता है[cite: 3]。

पार्श्वक्रम संयोजन के मुख्य नियम इस प्रकार हैं:

  1. विभवांतर समान रहता है: इस संयोजन में प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर (V) बिल्कुल समान रहता है (बैटरी के बराबर)[cite: 3]।
  2. विद्युत धारा बँट जाती है: कुल विद्युत धारा (I), प्रत्येक शाखा में प्रवाहित होने वाली पृथक धाराओं के योग के बराबर होती है ($I = I_1 + I_2 + I_3$)[cite: 3]।
  3. तुल्य प्रतिरोध घटता है: पार्श्वक्रम में संयोजित प्रतिरोधों के तुल्य प्रतिरोध का व्युत्क्रम (उल्टा), पृथक प्रतिरोधों के व्युत्क्रमों के योग के बराबर होता है[cite: 3]।

    सूत्र: $1/R_p = 1/R_1 + 1/R_2 + 1/R_3$[cite: 3]

इस प्रकार परिपथ का कुल प्रतिरोध सबसे छोटे प्रतिरोधक से भी कम हो जाता है[cite: 3]。

घरेलू परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग क्यों नहीं किया जाता है?

दिवाली की सजावटी लाइटों (लड़ियों) में बल्ब श्रेणीक्रम में जुड़े होते हैं। आपने देखा होगा कि अगर एक बल्ब फ्यूज हो जाए, तो पूरी लड़ी बुझ जाती है और मिस्त्री को खराब बल्ब ढूँढने में काफी समय खर्च करना पड़ता है[cite: 3]! श्रेणीबद्ध परिपथ की यही सबसे बड़ी हानि है कि जब परिपथ का एक अवयव कार्य करना बंद कर देता है तो परिपथ टूट जाता है और अन्य कोई अवयव कार्य नहीं कर पाता[cite: 3]。

इसके अलावा, विद्युत बल्ब और विद्युत हीटर को एक साथ श्रेणीक्रम में नहीं जोड़ा जा सकता क्योंकि उन्हें काम करने के लिए अत्यधिक भिन्न मानों की विद्युत धाराओं की आवश्यकता होती है[cite: 3]। इसलिए हमारे घरों में हमेशा पार्श्वक्रम (Parallel) संयोजन का उपयोग किया जाता है, ताकि एक पंखा खराब होने पर टीवी और फ्रिज चलते रहें, और सभी को अपनी जरूरत के हिसाब से सही विद्युत धारा मिल सके[cite: 3]。

अब खेलें: प्रतिरोधकों का संयोजन क्विज़

अब नीचे दिए गए ‘Play Quiz’ बटन पर क्लिक करें और श्रेणीक्रम, पार्श्वक्रम और उनके गणितीय सूत्रों पर आधारित इन 20 महत्वपूर्ण विज्ञान प्रश्नों का अभ्यास करें!

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महत्वपूर्ण विज्ञान परिभाषाएँ और व्याख्या

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