पिछले अध्याय में हमने पढ़ा था कि लेंस कैसे प्रकाश को मोड़कर चीजों को बड़ा या छोटा दिखाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे शरीर में भी एक ऐसा ही जादुई लेंस लगा है, जो हमें यह पूरी खूबसूरत दुनिया दिखाता है?
जी हाँ, वह है हमारा ‘मानव नेत्र’ (आँख)! इस अध्याय में हम जानेंगे कि हमारी आँखें कैसे काम करती हैं, कुछ लोगों को चश्मा क्यों लगता है, बारिश के बाद इंद्रधनुष कैसे बनता है और दिन के समय हमारा आसमान नीला क्यों दिखाई देता है।
इस बेहद ही रोचक और दैनिक जीवन से जुड़े अध्याय के बेहतरीन नोट्स बनाने के लिए, मैंने इसे 4 छोटे-छोटे भागों में बाँट दिया है। आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके प्रत्येक विषय को गहराई से समझ सकते हैं:
- भाग 1: मानव नेत्र की संरचना और समंजन क्षमता कैसे कार्य करती है?
- भाग 2: दृष्टि दोष क्या हैं और उनका संशोधन कैसे किया जाता है?
- भाग 3: प्रिज्म द्वारा प्रकाश का अपवर्तन और विक्षेपण कैसे होता है?
- भाग 4: वायुमंडलीय अपवर्तन और प्रकाश का प्रकीर्णन क्या है?
मानव नेत्र क्या है और यह कैसे काम करता है?
हमारा नेत्र (आँख) एक बहुत ही मूल्यवान और संवेदनशील ज्ञानेंद्रिय है, जो बिल्कुल एक कैमरे की तरह काम करता है। इसके अंदर एक प्राकृतिक ‘उत्तल लेंस’ लगा होता है। जब किसी वस्तु से प्रकाश हमारी आँखों में जाता है, तो यह लेंस उस प्रकाश को मोड़कर आँख के सबसे पिछले हिस्से (दृष्टिपटल या रेटिना) पर उस वस्तु की उल्टी परछाई बनाता है। दिमाग इस उल्टी परछाई को सीधा करके हमें दिखाता है।
दृष्टि दोष क्यों होते हैं?
कई बार उम्र बढ़ने के कारण या आँखों की माँसपेशियों के कमजोर हो जाने से आँखों का प्राकृतिक लेंस ठीक से काम नहीं कर पाता। इसके कारण इंसान को पास की या दूर की चीजें धुंधली दिखाई देने लगती हैं। इसे ‘दृष्टि दोष’ कहते हैं। इसे ठीक करने के लिए डॉक्टर हमें एक खास नंबर का चश्मा (उत्तल या अवतल लेंस) पहनने की सलाह देते हैं।
प्रिज्म क्या है और यह सफेद प्रकाश के साथ क्या करता है?
प्रिज्म काँच का बना हुआ एक तिकोना टुकड़ा होता है। जब सूर्य का सफेद प्रकाश इस प्रिज्म में से गुजरता है, तो यह सफेद प्रकाश को उसके सात अलग-अलग रंगों (VIBGYOR – लाल, पीला, हरा, नीला आदि) में बाँट देता है। इसी प्रक्रिया के कारण हमें आसमान में सुंदर इंद्रधनुष दिखाई देता है!
तारे क्यों टिमटिमाते हैं और आसमान नीला क्यों है?
ब्रह्मांड में तारे लगातार एक जैसा प्रकाश देते हैं, लेकिन हमारी पृथ्वी के ऊपर मौजूद हवा (वायुमंडल) उस प्रकाश को बार-बार मोड़ती रहती है, जिससे हमें तारे टिमटिमाते हुए नज़र आते हैं। दूसरी तरफ, हवा में मौजूद बहुत ही छोटे-छोटे कण सूर्य के प्रकाश में से ‘नीले रंग’ को चारों तरफ फैला देते हैं, जिसके कारण हमें आसमान नीले रंग का दिखाई देता है।
अब खेलें: मानव नेत्र और रंग-बिरंगा संसार क्विज़
यूपी बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान के इस दसवें अध्याय के परिचय पर आधारित मजेदार क्विज़ को खेलें और अपनी प्रारंभिक जानकारी की जाँच करें!
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