पिछले भाग में हमने जाना कि जीव अपनी प्रजाति को बचाने के लिए जनन करते हैं और डीएनए की कॉपी बनाते हैं। लेकिन संतान पैदा करने के लिए हमेशा नर और मादा (दो जीवों) की जरूरत नहीं होती।
प्रकृति में ऐसे बहुत से जीव हैं जो बिल्कुल अकेले ही अपने शरीर से नए जीवों को जन्म दे सकते हैं। इसे विज्ञान की भाषा में ‘अलैंगिक जनन’ कहते हैं। आज हम जानेंगे कि एक अमीबा खुद को दो हिस्सों में कैसे बाँट लेता है, और गुलाब की टहनी को मिट्टी में लगाने पर वह नया पौधा कैसे बन जाती है!
अलैंगिक जनन क्या है और यह किन जीवों में पाया जाता है?
जनन की वह विधि जिसमें केवल एक ही जीव (एकल जनक) नई संतान उत्पन्न करता है, उसे अलैंगिक जनन कहते हैं। इसमें किसी साथी की आवश्यकता नहीं होती। यह तरीका मुख्य रूप से बहुत ही सरल बनावट वाले जीवों (जैसे जीवाणु, अमीबा) और कुछ पौधों में पाया जाता है। एकल जीवों में जनन के कई अलग-अलग तरीके होते हैं, आइए इन्हें गहराई से समझते हैं:
विखंडन: एक कोशिका दो या अधिक भागों में कैसे टूटती है?
एककोशिकीय जीवों (जिनका पूरा शरीर सिर्फ एक कोशिका होता है) में जनन का सबसे सरल तरीका विखंडन है। इसमें कोशिका बीच से टूटकर नए जीवों में बँट जाती है। यह दो प्रकार का होता है:
- द्विखंडन: जब एक कोशिका टूटकर ठीक दो बराबर हिस्सों (दो नए जीवों) में बँट जाती है, तो उसे द्विखंडन कहते हैं। यह अमीबा और कालाजार की बीमारी फैलाने वाले लेस्मानिया में पाया जाता है।
- बहुखंडन: जब एक कोशिका के चारों ओर एक कठोर परत बन जाती है और उसके अंदर कोशिका एक साथ कई सारे छोटे-छोटे जीवों में टूट जाती है, तो उसे बहुखंडन कहते हैं। मलेरिया फैलाने वाला प्लैज़्मोडियम इसी तरीके से जनन करता है।
खंडन और पुनरुद्भवन में क्या अंतर है?
ये दोनों विधियां सुनने में एक जैसी लगती हैं, लेकिन इनमें बहुत बड़ा वैज्ञानिक अंतर है:
- खंडन: यह सरल बहुकोशिकीय जीवों में होता है। जैसे जब स्पाइरोगाइरा (एक प्रकार की काई) पूरी तरह से विकसित हो जाता है, तो वह अपने-आप छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाता है। हर एक टुकड़ा बड़ा होकर एक नया स्पाइरोगाइरा बन जाता है।
- पुनरुद्भवन (पुनर्जनन): यह कोई जनन का तरीका नहीं है, बल्कि शरीर को बचाने की एक ताकत है। अगर किसी कारणवश हाइड्रा या प्लैनेरिया जैसे जीवों का शरीर कटकर कई टुकड़ों में बँट जाए, तो हर टुकड़ा अपनी खोई हुई कोशिकाओं को दोबारा बनाकर एक नया जीव बन जाता है।
मुकुलन: शरीर से नया जीव कैसे निकलता है?
कुछ जीव अपने शरीर की कोशिकाओं का उपयोग करके अपने ही शरीर पर एक छोटी सी कली (उभार) बना लेते हैं। इस कली को ‘मुकुल’ कहते हैं। यह मुकुल धीरे-धीरे बड़ा होता है और जब यह पूरी तरह से एक नया जीव बन जाता है, तो अपने माता-पिता के शरीर से अलग होकर स्वतंत्र रूप से जीने लगता है। यह तरीका हाइड्रा और यीस्ट में बहुत आसानी से देखा जा सकता है।
कायिक प्रवर्धन: पौधों के अंगों से नए पौधे कैसे बनते हैं?
क्या आपने कभी बीज के बिना पौधा उगते देखा है? प्रकृति में कई ऐसे पौधे हैं जो बिना बीज के अपने तने, जड़ या पत्तियों से नए पौधे को जन्म दे सकते हैं। इसे कायिक प्रवर्धन कहते हैं।
हम इंसान भी इस तरीके का बहुत उपयोग करते हैं। जैसे—गुलाब या गन्ने की कलम (तना) काटकर मिट्टी में लगाना। ब्रायोफिलम (अजूबा) नाम के पौधे की पत्तियों के किनारों पर छोटी-छोटी कलिकाएं (कलियां) होती हैं। जब यह पत्ती गीली मिट्टी पर गिरती है, तो हर कली से एक नया पौधा निकल आता है। इस विधि का फायदा यह है कि इससे उगे हुए पौधों में फूल और फल बहुत जल्दी आ जाते हैं और ये बिल्कुल अपने जनक पौधे जैसे होते हैं।
बीजाणु समासंघ: राइजोपस में जनन कैसे होता है?
अगर आप किसी ब्रेड को कई दिनों तक नमी में छोड़ दें, तो उस पर रुई जैसी फफूँद लग जाती है। इसे राइजोपस कहते हैं। इसके ऊपरी सिरे पर एक गोल संरचना होती है जिसे बीजाणुधानी कहते हैं। इसके अंदर बहुत सारे छोटे-छोटे ‘बीजाणु’ होते हैं। जब यह थैली फटती है, तो बीजाणु हवा में फैल जाते हैं और जहाँ भी इन्हें नमी और भोजन मिलता है, वहाँ ये नई फफूँद उगा देते हैं।
अब खेलें: अलैंगिक जनन विज्ञान क्विज़
अब नीचे दिए गए ‘Play Quiz’ बटन पर क्लिक करें और अमीबा, हाइड्रा और पौधों में जनन पर आधारित 20 महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास करें!
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अध्याय 7 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- भाग 1: जीवों में जनन क्यों आवश्यक है और डीएनए प्रतिकृति का क्या महत्व है?
- You are Reading Here: एकल जीवों में अलैंगिक जनन की विधियां कैसे कार्य करती हैं?
- भाग 3: पुष्पी पौधों में लैंगिक जनन और बीज निर्माण कैसे होता है?
- भाग 4: मानव जनन तंत्र कैसे कार्य करता है?
- भाग 5: जनन स्वास्थ्य क्या है और गर्भनिरोधक युक्तियां क्यों आवश्यक हैं?