पिछले भाग में हमने पढ़ा था कि जनन के दौरान माता-पिता से बच्चों में कुछ बदलाव आते हैं, जिन्हें विभिन्नता कहते हैं। लेकिन अगर विभिन्नताएं आती हैं, तो फिर एक कुत्ते का बच्चा हमेशा कुत्ता ही क्यों पैदा होता है, बिल्ली क्यों नहीं?
इसका कारण यह है कि विभिन्नताएं बहुत ही मामूली (थोड़ी सी) होती हैं, जबकि शरीर का मुख्य ढांचा माता-पिता के बिल्कुल समान होता है। प्रकृति का वह नियम जो शरीर के इस ढांचे और गुणों को माता-पिता से बच्चों में भेजता है, उसे ‘आनुवंशिकता’ कहते हैं। आज हम जानेंगे कि ये लक्षण कैसे काम करते हैं और हम अपने माता-पिता जैसे क्यों दिखते हैं।
आनुवंशिकता का क्या अर्थ है?
जनन प्रक्रम का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह होता है कि नई संतान के शरीर का डिज़ाइन (अभिकल्पना) बिल्कुल अपने माता-पिता के समान होता है। वे नियम जो इस बात का निर्धारण करते हैं कि कौन से गुण माता-पिता से बच्चों में पूरी विश्वसनीयता के साथ जाएंगे, उसे आनुवंशिकता कहा जाता है। आनुवंशिकता के कारण ही मानव का शिशु हमेशा मानव के सभी आधारभूत लक्षणों के साथ जन्म लेता है।
वंशागत लक्षण किन्हें कहा जाता है?
माता-पिता से बच्चों को विरासत में मिलने वाले शारीरिक और मानसिक गुणों को वंशागत लक्षण कहा जाता है। उदाहरण के लिए—आँखों का रंग, बालों का घुंघराला या सीधा होना, त्वचा का रंग और नाक की बनावट। ये सभी लक्षण बच्चों को अपने माता-पिता के डीएनए (DNA) से प्राप्त होते हैं।
लेकिन ध्यान दें, शिशु में मानव के सभी आधारभूत लक्षण होते हुए भी, वह पूर्ण रूप से अपने माता-पिता की कार्बन कॉपी (बिल्कुल एक जैसा) दिखाई नहीं पड़ता। मानव आबादी (समष्टि) में यह विभिन्नता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
कर्णपालि का स्वतंत्र अथवा जुड़ा होना क्या दर्शाता है?
वंशागत लक्षणों को समझने के लिए हमारी किताब में ‘कर्णपालि’ का एक बहुत ही शानदार उदाहरण दिया गया है। कर्णपालि हमारे कान के सबसे निचले हिस्से को कहते हैं (जहाँ लड़कियां बालियाँ पहनती हैं)।
अगर आप अपने दोस्तों के कानों को ध्यान से देखेंगे, तो आपको दो तरह के कान मिलेंगे:
- स्वतंत्र कर्णपालि: कुछ लोगों के कान का निचला हिस्सा सिर (चेहरे की त्वचा) से अलग और स्वतंत्र होता है।
- जुड़ी कर्णपालि: कुछ लोगों के कान का निचला हिस्सा सिर के पार्श्व (त्वचा) से पूरी तरह जुड़ा होता है।
यह कोई बीमारी या खराबी नहीं है! यह सिर्फ एक ‘वंशागत लक्षण’ है। अगर किसी बच्चे की कर्णपालि स्वतंत्र है, तो बहुत अधिक संभावना है कि उसके माता या पिता में से किसी एक की कर्णपालि भी स्वतंत्र ही होगी।
लक्षणों की वंशागति के बुनियादी नियम क्या हैं?
मानव में लक्षणों की वंशागति के नियम इस बात पर आधारित हैं कि माता एवं पिता, दोनों ही समान मात्रा में आनुवंशिक पदार्थ (डीएनए) को अपने शिशु में स्थानांतरित करते हैं। इसका सीधा सा अर्थ यह है कि बच्चे का प्रत्येक लक्षण उसके पिता और माता, दोनों के डीएनए से प्रभावित हो सकता है।
अतः प्रत्येक लक्षण के लिए प्रत्येक बच्चे में दो विकल्प होते हैं (एक माता से मिला हुआ और एक पिता से मिला हुआ)। अब बच्चे के शरीर में कौन सा लक्षण दिखाई देगा और कौन सा छिप जाएगा, इसके नियम ग्रेगर जॉन मेंडल ने खोजे थे, जिन्हें हम अगले भाग में विस्तार से पढ़ेंगे।
अब खेलें: आनुवंशिकता और वंशागत लक्षण क्विज़
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अध्याय 8 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- भाग 1: जनन के दौरान विभिन्नताओं का संचयन और उनका महत्व क्या है?
- You are Reading Here: आनुवंशिकता क्या है और वंशागत लक्षण कैसे काम करते हैं?
- भाग 3: लक्षणों की वंशागति में मेंडल का क्या योगदान है?
- भाग 4: लक्षण खुद को कैसे व्यक्त करते हैं और लिंग निर्धारण कैसे होता है?