भाग 6: एथनॉल, एथेनॉइक अम्ल और साबुन-अपमार्जक की सफाई

आज हम कार्बन के कुछ ऐसे यौगिकों के बारे में बात करेंगे, जिनका सीधा संबंध हमारे दैनिक जीवन से है। जब आपको खांसी होती है, तो आप जो कफ सिरप पीते हैं, उसमें भी कार्बन है। जो सिरका आप चाउमीन या आचार में डालते हैं, वह भी कार्बन का यौगिक है। और तो और, जिस साबुन से आप रोज नहाते हैं, वह भी इसी कार्बन की ही देन है!

आज हम दो बहुत ही महत्वपूर्ण कार्बन यौगिकों—एथनॉल और एथेनॉइक अम्ल—के गुणधर्मों को समझेंगे और जानेंगे कि साबुन कपड़ों से जिद्दी मैल को कैसे खींच निकालता है।

1. एथनॉल का रसायन

एथनॉल (C2H5OH) एक रंगहीन तरल है जो कमरे के तापमान पर द्रव अवस्था में रहता है। इसे आम भाषा में ‘एल्कोहल’ या ‘शराब’ भी कहा जाता है।

एथनॉल के गुण और उपयोग

  • विलायक के रूप में: यह एक बहुत ही बेहतरीन विलायक (Solvent) है। यह पानी में किसी भी अनुपात में आसानी से घुल जाता है।
  • दवाइयों में उपयोग: चूँकि यह एक अच्छा विलायक है, इसलिए इसका उपयोग टिंचर आयोडीन, कफ सिरप और कई तरह के टॉनिक बनाने में किया जाता है।
  • नुकसान: शुद्ध एथनॉल की थोड़ी सी भी मात्रा पीने से व्यक्ति बेहोश हो सकता है या उसकी मृत्यु भी हो सकती है। यह हमारे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को कमजोर कर देता है।

2. एथेनॉइक अम्ल

एथेनॉइक अम्ल (CH3COOH) को आम भाषा में ‘ऐसिटिक अम्ल’ कहा जाता है। जब इस अम्ल का 3-4% विलयन पानी में मिलाया जाता है, तो उसे सिरका (Vinegar) कहते हैं। सिरके का उपयोग अचार को खराब होने से बचाने (परिरक्षक के रूप में) किया जाता है। सर्दियों में शुद्ध एथेनॉइक अम्ल जम जाता है, इसलिए इसे ‘ग्लैशल ऐसिटिक अम्ल’ (Glacial acetic acid) भी कहते हैं।

एस्टरीकरण (Esterification) अभिक्रिया

यह बहुत ही जादुई अभिक्रिया है। जब एथेनॉइक अम्ल और एथनॉल आपस में मिलते हैं (थोड़े से अम्ल की उपस्थिति में), तो वे एस्टर (Ester) नामक एक नया यौगिक बनाते हैं। एस्टर की महक बहुत ही मीठी और सुगंधित होती है। इसलिए एस्टर का उपयोग ‘इत्र’ (Perfume) और स्वाद उत्पन्न करने वाले रसायनों (Flavoring agents) में किया जाता है।

3. साबुन और अपमार्जक

जब ऊपर बने एस्टर की अभिक्रिया सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) जैसे क्षारक के साथ कराई जाती है, तो वह वापस एथनॉल और कार्बोक्सिलिक अम्ल का सोडियम लवण बना लेता है। इस सोडियम लवण को ही साबुन कहते हैं और इस पूरी प्रक्रिया को साबुनीकरण (Saponification) कहा जाता है।

साबुन मैल कैसे साफ करता है? (मिसेल संरचना)

हमारे कपड़ों पर जो मैल होता है, वह मुख्य रूप से तेल या चिकनाई का होता है और पानी तेल को नहीं घोल सकता। यहीं पर साबुन काम आता है। साबुन के अणु के दो सिरे होते हैं:

  1. जलरागी सिरा (Hydrophilic): यह सिरा पानी से प्यार करता है और पानी में घुल जाता है।
  2. जलविरागी सिरा (Hydrophobic): यह सिरा पानी से डरता है और सीधा मैल (तेल) से जाकर चिपक जाता है।

जब हम कपड़े धोते हैं, तो साबुन के बहुत सारे अणु मैल को चारों तरफ से घेर लेते हैं। इस गोल गुच्छे को मिसेल (Micelle) कहते हैं। जब हम कपड़े को रगड़ते हैं या पानी से खंगालते हैं, तो मिसेल मैल को पकड़कर पानी के साथ बाहर निकल जाता है और कपड़ा साफ हो जाता है।

कठोर जल और अपमार्जक

क्या आपने कभी देखा है कि कुएं या हैंडपंप के पानी (कठोर जल) में साबुन जल्दी झाग नहीं देता? ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कठोर जल में कैल्सियम और मैग्नीशियम के लवण होते हैं जो साबुन के साथ मिलकर एक अघुलनशील पदार्थ (स्कम) बना लेते हैं। इस समस्या को सुलझाने के लिए हम अपमार्जक (Detergents) का उपयोग करते हैं, जो कठोर जल में भी आसानी से झाग बनाते हैं।

👨‍🏫 शिक्षक की सलाह: बच्चों, बोर्ड परीक्षा में ‘साबुन और अपमार्जक में अंतर’ 3 अंकों में पूछा जाता है। हमेशा याद रखें: साबुन कठोर जल (Hard water) में काम नहीं करते और पर्यावरण के लिए अच्छे होते हैं। अपमार्जक कठोर जल में भी सफाई कर सकते हैं, लेकिन ये पर्यावरण को नुकसान (प्रदूषण) पहुँचाते हैं।

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