विज्ञान की हमारी आज की कक्षा में आपका बहुत-बहुत स्वागत है। पिछले भाग में हमने अपनी आँखों और उनके दोषों के बारे में जाना था। अब हम इस प्रकृति की कुछ सबसे खूबसूरत और जादुई घटनाओं के बारे में बात करेंगे।
क्या आपने कभी सोचा है कि सूर्य का प्रकाश तो सफेद होता है, फिर बारिश के बाद आसमान में सात रंगों वाला ‘इंद्रधनुष’ कहाँ से आ जाता है? यह सब प्रकाश के एक खास गुण के कारण होता है। आज के इस भाग में हम जानेंगे कि काँच का एक तिकोना टुकड़ा (प्रिज्म) कैसे सफेद प्रकाश को सात रंगों में बाँट देता है!
प्रिज्म क्या है और यह प्रकाश को कैसे मोड़ता है?
काँच का बना हुआ एक ऐसा पारदर्शी माध्यम जिसके दो आधार त्रिभुजाकार (तिकोने) हों और तीन सतहें आयताकार हों, उसे प्रिज्म कहते हैं।
जब प्रकाश की किरण हवा से काँच के प्रिज्म में जाती है, तो वह अपवर्तन के नियम के अनुसार मुड़ती है। लेकिन प्रिज्म की विशेष तिकोनी बनावट के कारण, प्रकाश की किरण प्रिज्म के आधार (नीचे वाले हिस्से) की तरफ बहुत ज्यादा झुक जाती है। आपतित किरण (आने वाली किरण) और निर्गत किरण (बाहर निकलने वाली किरण) के बीच बनने वाले इस विशेष कोण को विचलन कोण कहा जाता है।
श्वेत प्रकाश का विक्षेपण क्या है?
जब सूर्य का सफेद प्रकाश किसी प्रिज्म से होकर गुजरता है, तो वह प्रिज्म के दूसरी तरफ सात अलग-अलग रंगों की एक पट्टी बना देता है। सफेद प्रकाश का अपने सात अवयवी रंगों (अलग-अलग रंगों) में इस तरह बँट जाने की घटना को विज्ञान की भाषा में विक्षेपण कहते हैं।
इन सात रंगों की पट्टी को स्पेक्ट्रम कहा जाता है। इन रंगों का क्रम नीचे से ऊपर की ओर इस प्रकार होता है—बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल। इसे आसानी से याद रखने के लिए हम VIBGYOR या हिंदी में ‘बैजानीहपीनाला’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं।
प्रकाश सात रंगों में क्यों बँटता है?
सूर्य का सफेद प्रकाश असल में इन सात रंगों से ही मिलकर बना है। जब यह प्रकाश काँच (प्रिज्म) में घुसता है, तो हर रंग की स्पीड (चाल) अलग-अलग हो जाती है। इसके कारण हर रंग अलग-अलग कोण (एंगल) पर मुड़ता है।
- लाल रंग: यह सबसे कम मुड़ता है, इसलिए स्पेक्ट्रम में सबसे ऊपर दिखाई देता है।
- बैंगनी रंग: यह सबसे अधिक मुड़ता है, इसलिए यह पट्टी में सबसे नीचे दिखाई देता है।
आइजैक न्यूटन का प्रिज्म प्रयोग क्या साबित करता है?
महान वैज्ञानिक आइजैक न्यूटन ने सबसे पहले प्रिज्म का उपयोग करके सूर्य का स्पेक्ट्रम प्राप्त किया था। उन्होंने यह साबित करने के लिए एक प्रयोग किया कि सफेद प्रकाश इन्हीं सात रंगों से बना है।
उन्होंने एक प्रिज्म से निकले हुए सात रंगों के सामने एक और बिल्कुल वैसा ही प्रिज्म उल्टा (Inverted) करके रख दिया। जब सातों रंग दूसरे उल्टे प्रिज्म से गुजरे, तो वे वापस मिलकर दूसरी तरफ से एक सफेद प्रकाश की किरण के रूप में बाहर निकले! इस प्रयोग ने यह साबित कर दिया कि सूर्य का प्रकाश सात रंगों का मिश्रण है।
आसमान में इंद्रधनुष कैसे बनता है?
इंद्रधनुष (Rainbow) प्रकृति का सबसे सुंदर स्पेक्ट्रम है, जो हमेशा बारिश होने के बाद दिखाई देता है। यह हमेशा सूर्य के विपरीत दिशा में (यानी अगर सूरज पूरब में है तो इंद्रधनुष पश्चिम में) बनता है।
बारिश के बाद हवा में पानी की बहुत सी छोटी-छोटी बूंदें लटकी रह जाती हैं। ये पानी की बूंदें छोटे-छोटे प्रिज्म की तरह काम करती हैं। जब सूर्य का सफेद प्रकाश इन बूंदों के अंदर घुसता है, तो बूंदें सबसे पहले प्रकाश का अपवर्तन और विक्षेपण (सात रंगों में बाँटना) करती हैं। फिर ये रंग बूंद के अंदर पीछे वाली सतह से टकराकर वापस लौटते हैं (पूर्ण आंतरिक परावर्तन), और अंत में बूंद से बाहर निकलते समय फिर से मुड़कर हमारी आँखों तक पहुँचते हैं। इसी लंबी प्रक्रिया के कारण हमें आसमान में एक विशाल सप्तरंगी इंद्रधनुष दिखाई देता है।
अब खेलें: प्रिज्म और विक्षेपण विज्ञान क्विज़
अब नीचे दिए गए ‘Play Quiz’ बटन पर क्लिक करें और प्रिज्म, स्पेक्ट्रम, रंगों के मुड़ने तथा इंद्रधनुष पर आधारित इन 20 महत्वपूर्ण विज्ञान प्रश्नों का अभ्यास करें!
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अध्याय 10 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- भाग 1: मानव नेत्र की संरचना और समंजन क्षमता कैसे कार्य करती है?
- भाग 2: दृष्टि दोष क्या हैं और उनका संशोधन कैसे किया जाता है?
- You are Reading Here: प्रिज्म द्वारा प्रकाश का अपवर्तन और विक्षेपण कैसे होता है?
- भाग 4: वायुमंडलीय अपवर्तन और प्रकाश का प्रकीर्णन क्या है?