पिछले भाग में हमने जाना था कि जब किसी तार में बिजली बहती है, तो वह तार एक चुंबक बन जाता है और उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र पैदा हो जाता है।
अब जरा सोचिए, अगर हम इस ‘बिजली वाले तार’ (धारावाही चालक) को किसी असली चुंबक के पास रख दें, तो क्या होगा? जब दो चुंबक पास आते हैं, तो वे एक-दूसरे को धक्का देते हैं या खींचते हैं! आज के इस भाग में हम जानेंगे कि चुंबकीय क्षेत्र में रखे तार पर बल (धक्का) कैसे लगता है और ‘फ्लेमिंग का वामहस्त नियम’ क्या है।
चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल कैसे लगता है?
फ्रांसीसी वैज्ञानिक आंद्रे मैरी ऐम्पियर ने सबसे पहले यह विचार दिया था कि यदि विद्युत धारावाही तार चुंबक पर बल लगाता है, तो चुंबक को भी उस तार पर बराबर लेकिन उल्टी दिशा में बल (धक्का) लगाना चाहिए।
इसे एक प्रयोग (क्रियाकलाप 12.7) से समझा जा सकता है: यदि हम एल्युमिनियम की एक छोटी छड़ को एक शक्तिशाली नाल चुंबक (U-Shape Magnet) के बीच लटका दें और छड़ में बिजली चालू करें, तो छड़ तुरंत एक तरफ खिसक (विस्थापित हो) जाती है। यह साबित करता है कि चुंबकीय क्षेत्र तार पर बल लगाता है।
बल की दिशा किन बातों पर निर्भर करती है?
तार पर लगने वाले इस बल की दिशा मुख्य रूप से दो बातों पर निर्भर करती है:
- विद्युत धारा की दिशा: यदि हम बैटरी के तार पलट दें (विद्युत धारा उल्टी कर दें), तो बल की दिशा भी उल्टी हो जाती है।
- चुंबकीय क्षेत्र की दिशा: यदि हम चुंबक को पलट दें (उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव बदल दें), तो भी बल की दिशा बदल जाती है।
ध्यान दें: तार पर सबसे अधिक बल (अधिकतम धक्का) तब लगता है जब विद्युत धारा की दिशा चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के बिल्कुल लंबवत (Perpendicular/90 डिग्री) होती है।
फ्लेमिंग का वामहस्त (बायां हाथ) नियम क्या है?
तार पर धक्का किस दिशा में लगेगा, यह पता लगाने के लिए एक बहुत ही आसान और प्रसिद्ध नियम है, जिसे फ्लेमिंग का वामहस्त नियम (Fleming’s Left-Hand Rule) कहते हैं।
नियम: अपने बाएँ हाथ की तर्जनी (Forefinger), मध्यमा (Middle finger) और अँगूठे को इस तरह फैलाएं कि तीनों एक-दूसरे के लंबवत (90 डिग्री) हों।
- तर्जनी (Forefinger): यह चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बताती है।
- मध्यमा (Middle finger): यह विद्युत धारा की दिशा बताती है।
- अँगूठा (Thumb): तब आपका अँगूठा चालक की गति या उस पर लगने वाले बल (Force) की दिशा बताएगा!
हमारे घरों में इस्तेमाल होने वाली विद्युत मोटर, लाउडस्पीकर, माइक्रोफोन और कई अन्य मशीनें इसी सिद्धांत और नियम पर काम करती हैं।
क्या मानव शरीर में भी चुंबकत्व होता है?
जी हाँ! हमारे शरीर की तंत्रिका कोशिकाओं (Nerves) में बहुत ही कमजोर बिजली (आयन धाराएं) बहती हैं। जब हम किसी चीज को छूते हैं, तो ये नसें हमारे दिमाग तक बिजली का एक सिग्नल भेजती हैं। यह सिग्नल एक बहुत ही कमजोर अस्थायी चुंबकीय क्षेत्र पैदा करता है (जो पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का एक अरबवां हिस्सा होता है)।
मानव शरीर के दो मुख्य भाग जहाँ सबसे ज्यादा चुंबकीय क्षेत्र बनता है, वे हैं- हृदय (Heart) और मस्तिष्क (Brain)। इसी चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करके डॉक्टर MRI (चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंबन – Magnetic Resonance Imaging) मशीन से हमारे शरीर के अंदर की बीमारियों की स्पष्ट तस्वीरें (Scan) निकालते हैं!
अब खेलें: चालक पर बल और फ्लेमिंग का नियम क्विज़
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अध्याय 12 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- भाग 1: चुंबकीय क्षेत्र और क्षेत्र रेखाएं क्या हैं?
- भाग 2: विद्युत धारावाही चालक के कारण चुंबकीय क्षेत्र कैसे बनता है?
- You are Reading Here: चुंबकीय क्षेत्र में किसी धारावाही चालक पर बल कैसे लगता है?
- भाग 4: घरेलू विद्युत परिपथ कैसे कार्य करता है और यह क्यों सुरक्षित है?