भाग 1: मानव नेत्र की संरचना और समंजन क्षमता कैसे कार्य करती है?

हम अपने आस-पास की दुनिया को कैसे देखते हैं? यह सब हमारी आँखों के कारण संभव है। मानव नेत्र (आँख) प्रकृति का दिया हुआ एक बहुत ही अनमोल और अद्भुत उपहार है।

यह बिल्कुल एक कैमरे की तरह काम करता है, जो प्रकाश का उपयोग करके दुनिया की रंग-बिरंगी तस्वीरें हमारे दिमाग तक पहुँचाता है। आज के इस भाग में हम जानेंगे कि हमारी आँख के अंदर कौन-कौन से हिस्से होते हैं, ये कैसे काम करते हैं, और हमारी आँख दूर तथा पास की चीजों को इतनी आसानी से कैसे फोकस कर लेती है!

मानव नेत्र क्या है और इसके मुख्य भाग कौन से हैं?

मानव नेत्र एक गोलाकार अंग है, जिसका व्यास लगभग 2.3 सेंटीमीटर होता है। इसके अंदर कई महत्वपूर्ण हिस्से होते हैं, जो प्रकाश को मोड़ने और परछाई (प्रतिबिंब) बनाने का काम करते हैं:

  • स्वच्छ मंडल (कॉर्निया): यह आँख के सबसे सामने वाला पारदर्शी (आर-पार दिखने वाला) हिस्सा है। प्रकाश सबसे पहले इसी झिल्ली से होकर हमारी आँख में घुसता है।
  • परितारिका (आइरिस): कॉर्निया के ठीक पीछे एक रंगीन माँसपेशी होती है जिसे आइरिस कहते हैं। (इसी के कारण किसी की आँखें काली, भूरी या नीली होती हैं)। यह पुतली के आकार को कंट्रोल करती है।
  • पुतली (प्यूपिल): आइरिस के बीच में एक छोटा सा छेद होता है, जिसे पुतली कहते हैं। यह आँख के अंदर जाने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करती है।
  • क्रिस्टलीय लेंस (नेत्र लेंस): पुतली के ठीक पीछे एक प्राकृतिकउत्तल लेंस’ होता है, जो जेली जैसे पदार्थ का बना होता है। यह प्रकाश को मोड़कर पीछे रेटिना पर फोकस करता है।
  • दृष्टिपटल (रेटिना): यह आँख का सबसे पिछला हिस्सा (परदा) है, जहाँ वस्तु की उल्टी परछाई बनती है। इसमें प्रकाश को महसूस करने वाली खास कोशिकाएं होती हैं।
  • दृक् तंत्रिका (ऑप्टिक नर्व): यह नसों का एक केबल है, जो रेटिना पर बनी परछाई के संदेश (सिग्नल) को हमारे दिमाग तक पहुँचाता है, और दिमाग उस उल्टी परछाई को सीधा करके हमें दिखाता है।

आँख की पुतली प्रकाश को कैसे नियंत्रित करती है?

क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि जब आप तेज धूप से अचानक किसी अँधेरे कमरे में जाते हैं, तो आपको कुछ देर तक कुछ दिखाई नहीं देता? ऐसा पुतली के कारण होता है।

जब हम तेज रोशनी में होते हैं, तो आइरिस सिकुड़कर पुतली को छोटा कर देती है, ताकि आँख के अंदर ज्यादा रोशनी न जाए और आँख खराब न हो। लेकिन जब हम अँधेरे कमरे में जाते हैं, तो कम रोशनी के कारण आइरिस फैल जाती है और पुतली को बड़ा कर देती है, ताकि ज्यादा से ज्यादा प्रकाश अंदर जा सके। पुतली को छोटा-बड़ा होने में थोड़ा समय लगता है, इसीलिए अँधेरे कमरे में हमें कुछ देर बाद साफ दिखाई देता है।

नेत्र की समंजन क्षमता क्या होती है?

अगर हम कैमरे से पास की फोटो खींचते हैं और फिर दूर की, तो हमें कैमरे का लेंस घुमाकर फोकस सेट करना पड़ता है। लेकिन हमारी आँखें पास की किताब और दूर के पहाड़ को बिना किसी मेहनत के तुरंत फोकस कर लेती हैं। ऐसा कैसे होता है?

हमारे नेत्र लेंस को पकड़ने के लिए पक्ष्माभी पेशियाँ (Ciliary muscles) होती हैं। जब हम पास की चीज देखते हैं, तो ये पेशियाँ सिकुड़ जाती हैं और लेंस को मोटा (गोल) कर देती हैं, जिससे उसकी ताकत बढ़ जाती है। जब हम दूर की चीज देखते हैं, तो ये पेशियाँ आराम की स्थिति में आ जाती हैं और लेंस पतला हो जाता है। नेत्र लेंस द्वारा अपनी फोकस दूरी को खुद-ब-खुद कम या ज्यादा कर लेने की इस जादुई ताकत को ‘समंजन क्षमता’ (Power of Accommodation) कहते हैं।

सुस्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम और अधिकतम दूरी क्या है?

हम अपनी आँखों से कितना पास और कितना दूर तक साफ देख सकते हैं?

  • निकट बिंदु (न्यूनतम दूरी): वह सबसे कम दूरी जहाँ रखी वस्तु को हम बिना आँखों पर जोर डाले साफ देख सकते हैं, उसे निकट बिंदु कहते हैं। एक स्वस्थ युवा इंसान के लिए यह दूरी 25 सेंटीमीटर होती है। (अगर आप किताब को आँख के बहुत ज्यादा पास लाएंगे, तो अक्षर धुंधले दिखेंगे और आँखों में दर्द होने लगेगा)।
  • दूर बिंदु (अधिकतम दूरी): वह सबसे दूर का बिंदु जहाँ तक हम साफ देख सकते हैं। एक स्वस्थ आँख के लिए यह अनंत (Infinity) होता है। इसी कारण हम करोड़ों किलोमीटर दूर चमकते तारों को भी आसानी से देख लेते हैं।

अब खेलें: मानव नेत्र की संरचना क्विज़

अब नीचे दिए गए ‘Play Quiz’ बटन पर क्लिक करें और कॉर्निया, रेटिना, पुतली तथा समंजन क्षमता पर आधारित इन 20 महत्वपूर्ण विज्ञान प्रश्नों का अभ्यास करें!

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