जब हम किसी अँधेरे कमरे में जाते हैं, तो हमें कुछ भी दिखाई नहीं देता। लेकिन जैसे ही हम बल्ब चालू करते हैं, कमरे की सारी चीजें साफ दिखने लगती हैं। ऐसा क्यों होता है?
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बल्ब से निकलने वाला प्रकाश जब चीजों से टकराकर हमारी आँखों तक पहुँचता है, तभी हम उन्हें देख पाते हैं। प्रकाश का इस तरह सतह से टकराकर वापस लौटना ही प्रकाश का परावर्तन कहलाता है। आज हम जानेंगे कि यह परावर्तन कैसे होता है और शीशे (दर्पण) हमारे चेहरे को कैसे दिखा पाते हैं!
प्रकाश के परावर्तन के मुख्य नियम क्या हैं?
जब प्रकाश की कोई किरण किसी बहुत ही चिकनी और पॉलिश की हुई सतह (जैसे दर्पण) पर गिरती है, तो वह एक निश्चित नियम के अनुसार वापस मुड़ जाती है। इसके दो बहुत ही महत्वपूर्ण नियम हैं:
- पहला नियम (कोण का नियम): आपतन कोण (टकराने वाली किरण का कोण) हमेशा परावर्तन कोण (वापस लौटने वाली किरण के कोण) के बिल्कुल बराबर होता है।
- दूसरा नियम (तल का नियम): आपतित किरण (आने वाली किरण), दर्पण के आपतन बिंदु पर अभिलंब (सीधी रेखा) और परावर्तित किरण (जाने वाली किरण)—ये तीनों हमेशा एक ही तल (Surface) में होते हैं।
ये नियम केवल समतल दर्पण पर ही नहीं, बल्कि हर प्रकार की चमकदार सतह (चाहे वह टेढ़ी-मेढ़ी या गोल हो) पर लागू होते हैं।
समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब कैसा होता है?
हम रोज़ सुबह तैयार होने के लिए जिस शीशे का इस्तेमाल करते हैं, उसे समतल दर्पण कहते हैं। इसमें हमारा प्रतिबिंब (परछाई) हमेशा सीधा और हमारे आकार के बिल्कुल बराबर बनता है। लेकिन इसमें एक जादू होता है—इसमें हमारा दायां हाथ बायां और बायां हाथ दायां दिखाई देता है। इसे विज्ञान की भाषा में पार्श्व परिवर्तन कहा जाता है।
गोलीय दर्पण क्या होते हैं और ये कितने प्रकार के होते हैं?
समतल दर्पण बिल्कुल सीधा होता है। लेकिन क्या आपने कभी किसी नई और चमकदार चम्मच में अपना चेहरा देखा है? चम्मच के अंदर वाले हिस्से में चेहरा बड़ा और उल्टा दिखता है, जबकि बाहर वाले हिस्से में चेहरा छोटा दिखता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि चम्मच की सतह गोल (वक्रित) होती है।
ऐसे दर्पण जिनकी परावर्तक सतह गोल (किसी खोखले गोले का हिस्सा) होती है, उन्हें गोलीय दर्पण कहते हैं। ये मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
- अवतल दर्पण: वह दर्पण जिसकी परावर्तक सतह अंदर की ओर (गुफा की तरह) धंसी हुई होती है। (जैसे चम्मच का अंदर वाला हिस्सा)।
- उत्तल दर्पण: वह दर्पण जिसकी परावर्तक सतह बाहर की ओर उभरी हुई होती है। (जैसे चम्मच का बाहर वाला हिस्सा)।
गोलीय दर्पणों से जुड़े महत्वपूर्ण शब्द कौन से हैं?
गोलीय दर्पणों के किरण आरेख (चित्र) बनाने और समझने के लिए हमें कुछ मुख्य शब्दों को जानना बहुत जरूरी है:
- ध्रुव: गोलीय दर्पण के बिल्कुल बीच (केंद्र) वाले बिंदु को ध्रुव कहते हैं।
- वक्रता केंद्र: गोलीय दर्पण जिस खोखले गोले को काटकर बनाया गया है, उस गोले के केंद्र (Center) को दर्पण का वक्रता केंद्र कहते हैं।
- मुख्य अक्ष: दर्पण के ध्रुव और वक्रता केंद्र को मिलाने वाली एक सीधी काल्पनिक रेखा को मुख्य अक्ष कहते हैं।
- मुख्य फोकस: जब प्रकाश की समांतर किरणें दर्पण से टकराती हैं, तो वे मुख्य अक्ष के जिस बिंदु पर आकर मिलती हैं (या मिलती हुई प्रतीत होती हैं), उसे मुख्य फोकस कहते हैं।
- फोकस दूरी और वक्रता त्रिज्या का संबंध: ध्रुव से फोकस तक की दूरी को ‘फोकस दूरी (f)’ कहते हैं, और ध्रुव से वक्रता केंद्र तक की दूरी को ‘वक्रता त्रिज्या (R)’ कहते हैं। छोटे दर्पणों के लिए वक्रता त्रिज्या हमेशा फोकस दूरी की दोगुनी होती है (R = 2f)।
अब खेलें: प्रकाश का परावर्तन और दर्पण विज्ञान क्विज़
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अध्याय 9 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- You are Reading Here: प्रकाश का परावर्तन क्या है और गोलीय दर्पण कैसे कार्य करते हैं?
- भाग 2: गोलीय दर्पणों द्वारा प्रतिबिंब कैसे बनते हैं?
- भाग 3: दर्पण सूत्र क्या है और आवर्धन कैसे ज्ञात करते हैं?
- भाग 4: प्रकाश का अपवर्तन क्या है और अपवर्तनांक कैसे कार्य करता है?
- भाग 5: गोलीय लेंस क्या हैं और उनके द्वारा प्रतिबिंब कैसे बनते हैं?
- भाग 6: लेंस सूत्र क्या है और लेंस की क्षमता कैसे मापी जाती है?