पिछले भाग में हमने जाना था कि प्रिज्म सफेद प्रकाश को सात रंगों में कैसे बाँट देता है। लेकिन हमारी प्रकृति में बिना किसी काँच के भी प्रकाश के बहुत से अद्भुत चमत्कार रोज़ होते हैं।
क्या आपने कभी सोचा है कि रात में तारे क्यों टिमटिमाते हैं? आसमान का रंग नीला क्यों है? या सूरज डूबते समय लाल क्यों हो जाता है? इन सभी खूबसूरत घटनाओं के पीछे हमारे पृथ्वी के वायुमंडल (हवा) का हाथ है। आज हम ‘वायुमंडलीय अपवर्तन’ और ‘प्रकाश के प्रकीर्णन’ के बारे में गहराई से जानेंगे।
वायुमंडलीय अपवर्तन क्या है और तारे क्यों टिमटिमाते हैं?
हमारी पृथ्वी के चारों ओर हवा की एक बहुत मोटी परत है, जिसे वायुमंडल कहते हैं। इस हवा में कहीं गर्मी होती है (विरल माध्यम) तो कहीं ठंडक (सघन माध्यम)। जब तारों का प्रकाश इस हवा में से होकर पृथ्वी तक आता है, तो हवा की अलग-अलग परतों के कारण वह बार-बार मुड़ता (अपवर्तित होता) है। इसे ही वायुमंडलीय अपवर्तन कहते हैं।
चूँकि हवा की स्थिति हर सेकंड बदलती रहती है, इसलिए तारों से आने वाला प्रकाश कभी हमारी आँखों में ज्यादा पहुँचता है और कभी कम। इसी कारण तारे कभी चमकीले तो कभी धुंधले दिखाई देते हैं, जिसे हम तारों का टिमटिमाना कहते हैं।
ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते हैं?
तारे पृथ्वी से बहुत ज्यादा दूर हैं, इसलिए वे प्रकाश के एक छोटे से ‘बिंदु’ (Point) की तरह काम करते हैं। लेकिन ग्रह (Planets) पृथ्वी के बहुत करीब हैं। इसलिए वे एक बिंदु नहीं, बल्कि ‘बहुत सारे बिंदुओं के समूह’ (बड़े आकार) की तरह काम करते हैं। जब उनसे आने वाले प्रकाश में अपवर्तन के कारण थोड़ा-बहुत बदलाव होता है, तो वह आपस में कटकर शून्य (Zero) हो जाता है, और हमें ग्रह टिमटिमाते हुए नहीं दिखते।
अग्रिम सूर्योदय और विलंबित सूर्यास्त का क्या कारण है?
इसी वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण ही, सुबह जब सूरज क्षितिज (Horizon) के नीचे ही होता है (यानी अभी उगा नहीं होता), तब भी हवा प्रकाश को मोड़कर उसे हमारी आँखों तक पहुँचा देती है। इसके कारण सूर्य 2 मिनट पहले ही दिखाई देने लगता है। इसी तरह सूर्यास्त के समय भी सूरज डूबने के 2 मिनट बाद तक दिखाई देता रहता है।
प्रकाश का प्रकीर्णन और टिंडल प्रभाव क्या है?
हवा में बहुत से छोटे-छोटे कण (धूल, धुआँ और पानी की बूंदें) उड़ते रहते हैं। जब प्रकाश इन कणों से टकराता है, तो ये कण प्रकाश को चारों दिशाओं में फैला देते हैं। इस घटना को प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of light) कहते हैं।
जब किसी अँधेरे कमरे में एक छोटे से छेद से धूप आती है, तो आपको हवा में उड़ते हुए धूल के कण और प्रकाश का पूरा रास्ता दिखाई देता है। धुएँ या धूल के कणों द्वारा प्रकाश के रास्ते के इस तरह दिखाई देने को टिंडल प्रभाव (Tyndall Effect) कहते हैं। घने जंगलों में भी जब धूप पेड़ों के बीच से आती है, तो यह प्रभाव साफ दिखता है।
स्वच्छ आकाश का रंग नीला क्यों होता है?
सूर्य का सफेद प्रकाश सात रंगों से बना है। लाल रंग की तरंग की लंबाई (Wavelength) सबसे ज्यादा होती है और नीले रंग की लंबाई सबसे कम होती है।
हमारे वायुमंडल में मौजूद हवा के कण बहुत ही छोटे हैं। जब सूर्य का प्रकाश इन कणों से टकराता है, तो ये कण लाल रंग को तो आसानी से जाने देते हैं, लेकिन नीले रंग को बहुत तेजी से चारों तरफ फैला (प्रकीर्णित कर) देते हैं। यही फैला हुआ नीला प्रकाश जब हमारी आँखों में जाता है, तो हमें पूरा आसमान नीला दिखाई देता है। (अगर पृथ्वी पर वायुमंडल न होता, तो हमें आसमान बिल्कुल काला दिखाई देता, जैसे अंतरिक्ष यात्रियों को दिखता है)।
खतरे के संकेत (सिग्नल) का प्रकाश लाल रंग का क्यों होता है?
लाल रंग सबसे कम मुड़ता है और इसका प्रकीर्णन (फैलना) भी सबसे कम होता है। इसलिए, चाहे कितनी भी धुंध, कोहरा या धुआँ हो, लाल रंग बिना फैले बहुत दूर तक सीधा चला जाता है। इसी कारण रेलवे और ट्रैफिक सिग्नल में खतरे का रंग लाल रखा जाता है, ताकि वह दूर से ही साफ दिख जाए।
सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य लाल क्यों दिखाई देता है?
सुबह और शाम के समय सूर्य क्षितिज के पास होता है, इसलिए उसके प्रकाश को हमारी आँखों तक पहुँचने के लिए वायुमंडल की बहुत लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इस लंबी दूरी में प्रकाश का नीला रंग पूरी तरह बिखर कर खत्म हो जाता है। हमारी आँखों तक सिर्फ सबसे लंबी तरंग वाला लाल रंग ही पहुँच पाता है, इसलिए हमें सूरज लाल (रक्ताभ) दिखाई देता है।
अब खेलें: वायुमंडलीय अपवर्तन और प्रकीर्णन क्विज़
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अध्याय 10 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- भाग 1: मानव नेत्र की संरचना और समंजन क्षमता कैसे कार्य करती है?
- भाग 2: दृष्टि दोष क्या हैं और उनका संशोधन कैसे किया जाता है?
- भाग 3: प्रिज्म द्वारा प्रकाश का अपवर्तन और विक्षेपण कैसे होता है?
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