पिछले भागों में हमने देखा कि दर्पण प्रकाश को टकराकर वापस भेज देते हैं। लेकिन, क्या होता है जब प्रकाश किसी ऐसे माध्यम पर पड़ता है जिसके आर-पार देखा जा सके (जैसे काँच या पानी)?
क्या आपने कभी गौर किया है कि पानी से भरे गिलास में रखा नींबू अपने असली आकार से बड़ा क्यों दिखता है? या पानी में आधी डूबी हुई पेंसिल मुड़ी हुई क्यों लगती है? इन सभी जादुई घटनाओं के पीछे ‘प्रकाश का अपवर्तन’ होता है। आइए जानते हैं कि प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर मुड़ क्यों जाता है!
प्रकाश का अपवर्तन कैसे होता है?
हम जानते हैं कि प्रकाश हमेशा एक सीधी रेखा में चलता है। लेकिन यह तभी तक सीधी रेखा में चलता है, जब तक वह एक ही माध्यम (जैसे सिर्फ हवा) में हो।
जब प्रकाश की किरण एक पारदर्शी माध्यम (जैसे हवा) से दूसरे पारदर्शी माध्यम (जैसे पानी या काँच) में तिरछी प्रवेश करती है, तो वह दोनों माध्यमों को अलग करने वाली सतह पर अपने सीधे रास्ते से थोड़ा मुड़ जाती है। प्रकाश के इस तरह अपने रास्ते से मुड़ने (भटकने) की घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।
अपवर्तन क्यों होता है? अलग-अलग माध्यमों में प्रकाश के चलने की गति (Speed) अलग-अलग होती है। जब प्रकाश हवा से काँच में जाता है, तो उसकी स्पीड कम हो जाती है, और इसी स्पीड के बदलने के कारण वह मुड़ जाता है।
अपवर्तन के मुख्य नियम कौन से हैं?
परावर्तन की तरह ही, प्रकाश के अपवर्तन के भी दो बहुत ही महत्वपूर्ण नियम होते हैं:
- पहला नियम: आपतित किरण (आने वाली किरण), अपवर्तित किरण (मुड़ने वाली किरण) और दोनों माध्यमों को अलग करने वाले पृष्ठ (सतह) पर खींचा गया अभिलंब—ये तीनों हमेशा एक ही तल में होते हैं।
- दूसरा नियम (स्नेल का नियम): प्रकाश के किसी विशेष रंग के लिए आपतन कोण की ज्या (sine i) और अपवर्तन कोण की ज्या (sine r) का अनुपात हमेशा एक निश्चित और स्थिर अंक (Constant) होता है। इसे स्नेल का नियम कहते हैं।
अपवर्तनांक का क्या महत्व है?
जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाता है, तो वह कितना मुड़ेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि दूसरे माध्यम में प्रकाश की स्पीड कितनी कम या ज्यादा हुई है। इस मुड़ने की क्षमता को नापने वाले अंक को अपवर्तनांक कहते हैं।
इसे हवा (या निर्वात) में प्रकाश की चाल और दूसरे माध्यम (जैसे काँच) में प्रकाश की चाल के अनुपात से निकाला जाता है। जिस माध्यम का अपवर्तनांक जितना ज्यादा होगा, प्रकाश उसमें उतना ही धीमा चलेगा और उतना ही ज्यादा मुड़ेगा। (उदाहरण के लिए—हीरे का अपवर्तनांक 2.42 होता है, जो बहुत अधिक है, इसलिए हीरे में प्रकाश बहुत धीमा चलता है)।
प्रकाशिक सघन और विरल माध्यम कैसे कार्य करते हैं?
प्रकाश की गति के आधार पर माध्यमों को दो भागों में बाँटा गया है:
- विरल माध्यम: वह माध्यम जिसमें प्रकाश बहुत तेजी से चलता है (जैसे हवा)।
- सघन माध्यम: वह माध्यम जिसमें प्रकाश धीमा हो जाता है (जैसे काँच या पानी)।
प्रकाश किस तरफ मुड़ता है?
- जब प्रकाश की किरण विरल माध्यम से सघन माध्यम (हवा से काँच) में जाती है, तो उसकी स्पीड कम हो जाती है और वह अभिलंब (सीधी रेखा) की ओर झुक जाती है।
- जब प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम (काँच से हवा) में जाती है, तो उसकी स्पीड बढ़ जाती है और वह अभिलंब से दूर हट जाती है।
अब खेलें: प्रकाश का अपवर्तन और अपवर्तनांक क्विज़
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अध्याय 9 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- भाग 1: प्रकाश का परावर्तन क्या है और गोलीय दर्पण कैसे कार्य करते हैं?
- भाग 2: गोलीय दर्पणों द्वारा प्रतिबिंब कैसे बनते हैं?
- भाग 3: दर्पण सूत्र क्या है और आवर्धन कैसे ज्ञात करते हैं?
- You are Reading Here: प्रकाश का अपवर्तन क्या है और अपवर्तनांक कैसे कार्य करता है?
- भाग 5: गोलीय लेंस क्या हैं और उनके द्वारा प्रतिबिंब कैसे बनते हैं?
- भाग 6: लेंस सूत्र क्या है और लेंस की क्षमता कैसे मापी जाती है?