भाग 2: ओम का नियम और प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है?

विज्ञान की हमारी आज की कक्षा में आपका बहुत-बहुत स्वागत है। पिछले भाग में हमने जाना था कि तारों में बिजली (विद्युत धारा) कैसे बहती है और उसे धकेलने के लिए विभवांतर (दबाव) की जरूरत होती है[cite: 4]。

लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर हम बैटरी की ताकत (विभवांतर) बढ़ा दें, तो क्या बिजली की स्पीड भी बढ़ जाएगी? और क्या हर तार में बिजली आसानी से बह सकती है, या तार भी उसे रोकने की कोशिश करते हैं? आज के इस भाग में हम ‘ओम के नियम’ और बिजली को रोकने वाले गुण यानी ‘प्रतिरोध’ के बारे में विस्तार से समझेंगे[cite: 4]!

विद्युत परिपथ आरेख कैसे बनाए जाते हैं?

किसी भी विद्युत परिपथ (सर्किट) में बहुत सी चीजें होती हैं जैसे- बैटरी, तार, बल्ब, और स्विच[cite: 4]। इन सबको कागज पर असली रूप में बनाना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए वैज्ञानिकों ने इनके लिए कुछ आसान ‘प्रतीक’ (Symbols) बनाए हैं[cite: 4]।

  • सेल और बैटरी: एक बड़ी लाइन (प्लस) और एक छोटी लाइन (माइनस) से सेल को दर्शाया जाता है। कई सेलों को जोड़ने पर बैटरी बनती है[cite: 4]।
  • कुंजी (स्विच): इसे ब्रैकेट () के निशान से दर्शाते हैं। बीच में बिंदी होने का मतलब है कि स्विच ‘ऑन’ है[cite: 4]।
  • अमीटर और वोल्टमीटर: एक गोले के अंदर A या V लिखकर इन्हें दर्शाया जाता है[cite: 4]।

ओम का नियम क्या है?

1827 में जर्मन वैज्ञानिक जार्ज साइमन ओम ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण नियम दिया था[cite: 4]। उन्होंने बताया कि अगर किसी तार का तापमान न बदले, तो उस तार के सिरों पर लगाया गया विभवांतर (V) उसमें बहने वाली विद्युत धारा (I) के बिल्कुल समानुपाती होता है[cite: 4]。

यानी अगर आप बैटरी का वोल्टेज दोगुना कर देंगे, तो तार में बहने वाली बिजली भी दोगुनी हो जाएगी[cite: 4]।

ओम का सूत्र: $V = I \times R$ (जहाँ V विभवांतर है, I धारा है, और R एक नियतांक है जिसे प्रतिरोध कहते हैं)[cite: 4]。

प्रतिरोध किसे कहते हैं?

तारों में बिजली (इलेक्ट्रॉन) बहने के लिए बिल्कुल आज़ाद नहीं होती। तार के अंदर मौजूद परमाणु इलेक्ट्रॉनों को बहने से रोकते हैं[cite: 4]। किसी भी चालक (तार) का वह गुण जो अपने अंदर बहने वाली बिजली का विरोध करता है (उसे रोकता है), प्रतिरोध (Resistance) कहलाता है[cite: 4]。

प्रतिरोध को नापने का मात्रक ओम ($\Omega$) है[cite: 4]। यदि प्रतिरोध दोगुना हो जाए तो विद्युत धारा आधी रह जाती है[cite: 4]。

धारा नियंत्रक (Rheostat) क्या है?

कभी-कभी हमें बैटरी (वोल्टेज) बदले बिना ही पंखे या लाइट की स्पीड कम-ज्यादा करनी होती है[cite: 4]। इसके लिए परिपथ में ‘धारा नियंत्रक’ नाम की एक युक्ति लगाई जाती है, जो प्रतिरोध को बदलकर बिजली की मात्रा को कंट्रोल करती है[cite: 4]。

किसी चालक का प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है?

अगर आप अलग-अलग तरह के तार लें, तो सबका प्रतिरोध अलग होगा। यह मुख्य रूप से तीन चीजों पर निर्भर करता है[cite: 4]:

  1. लंबाई ($l$): तार जितना लंबा होगा, उसका प्रतिरोध उतना ही ज्यादा होगा (बिजली को उतनी ही ज्यादा रुकावट मिलेगी)[cite: 4] ($R \propto l$)।
  2. मोटाई (अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल – $A$): तार जितना मोटा होगा, उसका प्रतिरोध उतना ही कम होगा और उसमें बिजली आसानी से बहेगी[cite: 4] ($R \propto 1/A$)।
  3. पदार्थ की प्रकृति: तांबे और चांदी में बिजली आसानी से बहती है (कम प्रतिरोध), जबकि लोहे में थोड़ी मुश्किल से[cite: 4][cite: 4]।

वैद्युत प्रतिरोधकता क्या है और मिश्रातुओं का उपयोग क्यों होता है?

हर पदार्थ का अपना एक जन्मजात गुण होता है जो बिजली का विरोध करता है, इसे प्रतिरोधकता ($\rho$) कहते हैं[cite: 4]। इसका मात्रक ‘ओम-मीटर’ ($\Omega m$) होता है[cite: 4]。

  • चांदी और तांबे जैसी धातुओं की प्रतिरोधकता बहुत कम ($10^{-8}$ से $10^{-6} \Omega m$) होती है, इसलिए ये बहुत अच्छे चालक हैं[cite: 4]।
  • रबड़ और काँच जैसे विद्युतरोधी पदार्थों की प्रतिरोधकता बहुत ज्यादा ($10^{12}$ से $10^{17} \Omega m$) होती है, जिससे इनमें करंट नहीं बहता[cite: 4]।
  • मिश्रातुओं (Alloys) का कमाल: दो-तीन धातुओं को मिलाकर बने ‘मिश्रातु’ (जैसे निक्रोम) की प्रतिरोधकता काफी ज्यादा होती है। सबसे बड़ी बात यह है कि ये बहुत ज्यादा गर्म होने पर भी जलते (पिघलते) नहीं हैं[cite: 4]। इसीलिए इनका उपयोग प्रेस (विद्युत इस्तरी), टोस्टर और हीटर बनाने में किया जाता है[cite: 4]।
👨‍🏫 शिक्षक की सलाह: बच्चों, बिजली के बल्ब का फिलामेंट बनाने के लिए टंगस्टन नाम की धातु का इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि यह बहुत ज्यादा गर्मी सह सकती है और पिघलती नहीं है[cite: 4]!

अब खेलें: ओम का नियम और प्रतिरोध क्विज़

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महत्वपूर्ण विज्ञान परिभाषाएँ और व्याख्या

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