नमस्कार विद्यार्थियों! यूपी बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान के तीसरे अध्याय ‘धातु एवं अधातु’ में आपका बहुत-बहुत स्वागत है। अपने आस-पास नजर दौड़ाइए, आपको खिड़कियों पर लोहे की ग्रिल, बिजली के लिए तांबे के तार, सोने के चमकदार आभूषण और रसोई में एल्युमिनियम के बर्तन दिखाई देंगे। क्या आपने कभी सोचा है कि हम खाना पकाने के लिए लकड़ी के बर्तन क्यों नहीं बनाते? या फिर बिजली के तार सोने के बजाय तांबे के ही क्यों होते हैं?
इन सभी रोजमर्रा के सवालों का वैज्ञानिक जवाब छिपा है ‘धातु एवं अधातु’ के जादुई संसार में। इस अध्याय में हम धातुओं की चमक, उनकी ताकत, उनके रासायनिक स्वभाव और जमीन के नीचे से उनके निकाले जाने की कहानी को गहराई से समझेंगे।
इस बड़े और महत्वपूर्ण अध्याय को आसानी से समझने के लिए, मैंने इसे 6 छोटे-छोटे भागों में बाँट दिया है। आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके हर एक विषय को विस्तार से पढ़ सकते हैं:
- भाग 1: धातुओं और अधातुओं के भौतिक गुणधर्म
- भाग 2: धातुओं के रासायनिक गुणधर्म और वायु व जल से अभिक्रिया
- भाग 3: सक्रियता श्रेणी और धातुओं की विस्थापन अभिक्रियाएँ
- भाग 4: धातु और अधातु कैसे अभिक्रिया करते हैं: आयनिक यौगिक
- भाग 5: धातुओं की प्राप्ति: अयस्क से शुद्ध धातु का निष्कर्षण
- भाग 6: संक्षारण से बचाव और मिश्रातु (मिश्रधातु) का निर्माण
धातुओं के भौतिक गुण: चमक और ताकत
हम अपने दैनिक जीवन में धातुओं को उनके विशेष भौतिक गुणों के कारण ही पहचानते हैं। शुद्ध रूप में धातुओं की सतह बहुत चमकदार होती है, जिसे ‘धात्विक चमक’ कहते हैं। इसी चमक के कारण सोना और चाँदी आभूषण बनाने के काम आते हैं। इसके अलावा, धातुओं को हथौड़े से पीटकर पतली चादर बनाया जा सकता है (आघातवर्ध्यता) और उन्हें खींचकर पतले तार भी बनाए जा सकते हैं (तन्यता)।
अधातुओं की दुनिया: धातुओं से बिल्कुल अलग
ऑक्सीजन, कार्बन, सल्फर और आयोडीन जैसी चीजें ‘अधातु’ कहलाती हैं। ये धातुओं के बिल्कुल विपरीत होती हैं। ये न तो चमकदार होती हैं (आयोडीन को छोड़कर), न ही इन्हें पीटकर चादर बनाया जा सकता है। अगर आप कोयले (कार्बन) को हथौड़े से मारेंगे, तो वह चादर बनने के बजाय चूरा-चूरा हो जाएगा।
धातुओं के रासायनिक गुणधर्म
जब धातुएँ हवा, पानी या अम्ल के संपर्क में आती हैं, तो वे अलग-अलग तरह से अभिक्रिया करती हैं। कुछ धातुएँ जैसे सोडियम और पोटैशियम इतनी तेज होती हैं कि हवा में आते ही आग पकड़ लेती हैं! इसीलिए इन्हें किरोसिन तेल में डुबोकर सुरक्षित रखा जाता है। दूसरी तरफ, सोना और चाँदी हवा या पानी से बिल्कुल भी अभिक्रिया नहीं करते, इसीलिए वे सालों-साल खराब नहीं होते।
खदानों से धातु कैसे मिलती है?
क्या आपको लगता है कि लोहा या तांबा जमीन के नीचे शुद्ध रूप में मिलता है? बिल्कुल नहीं! धातुएँ जमीन के नीचे मिट्टी और अन्य अशुद्धियों के साथ चट्टानों (अयस्कों) के रूप में दबी होती हैं। रसायन विज्ञान की मदद से फैक्ट्रियों में इन चट्टानों को पिघलाकर और साफ करके शुद्ध धातु प्राप्त की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया को ‘धातुकर्म’ कहते हैं।
अब खेलें: धातु एवं अधातु प्रारंभिक क्विज़
यूपी बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान के इस तीसरे अध्याय के परिचय पर आधारित मजेदार क्विज़ को खेलें और अपनी प्रारंभिक जानकारी की जाँच करें!
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