पिछले भाग में हमने जाना था कि हमारी आँखें पास और दूर की चीजों को फोकस करने के लिए अपने लेंस को मोटा या पतला कर लेती हैं (समंजन क्षमता)।
लेकिन क्या होता है जब हमारी आँख की माँसपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं और लेंस ठीक से काम नहीं कर पाता? तब हमें चीजें धुंधली दिखने लगती हैं और डॉक्टर हमें चश्मा पहनने की सलाह देते हैं। आज के इस भाग में हम जानेंगे कि आँखों की ये बीमारियाँ (दृष्टि दोष) कितने प्रकार की होती हैं और इन्हें किन लेंसों की मदद से ठीक किया जाता है।
दृष्टि दोष कितने प्रकार के होते हैं?
जब नेत्र धीरे-धीरे अपनी समंजन क्षमता खो देते हैं, तो व्यक्ति चीजों को आराम से और स्पष्ट नहीं देख पाता। इसे दृष्टि दोष कहा जाता है। ये मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:
निकट-दृष्टि दोष के कारण और निवारण क्या हैं?
इस बीमारी के नाम में बहुत से छात्र कंफ्यूज हो जाते हैं! नाम है ‘निकट-दृष्टि दोष’, लेकिन इसमें व्यक्ति को पास की चीजें तो बिल्कुल साफ दिखती हैं, पर दूर की चीजें धुंधली दिखाई देती हैं।
- कारण: इसमें आँख का गोलक (Eye ball) थोड़ा लंबा हो जाता है या नेत्र लेंस बहुत ज्यादा वक्रित (मोटा) हो जाता है। इसके कारण दूर की वस्तु की परछाई रेटिना पर बनने के बजाय, रेटिना के सामने (आगे) ही बन जाती है।
- निवारण: इस दोष को ठीक करने के लिए डॉक्टर हमें अवतल लेंस का चश्मा देते हैं। अवतल लेंस प्रकाश की किरणों को थोड़ा फैला देता है, जिससे परछाई वापस रेटिना पर बनने लगती है।
दीर्घ-दृष्टि दोष कैसे होता है?
इसे ‘दूर-दृष्टि दोष’ भी कहते हैं। इस बीमारी में व्यक्ति को दूर की चीजें तो साफ दिखती हैं, लेकिन पास की चीजें (जैसे किताब के अक्षर) धुंधली दिखाई देती हैं। ऐसे व्यक्ति को किताब पढ़ने के लिए उसे आँख से काफी दूर (25 सेंटीमीटर से भी दूर) रखना पड़ता है।
- कारण: इसमें आँख का गोलक छोटा हो जाता है या नेत्र लेंस की फोकस दूरी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इसके कारण पास की वस्तु की परछाई रेटिना पर न बनकर, रेटिना के पीछे बनती है।
- निवारण: इस दोष को ठीक करने के लिए डॉक्टर हमें उत्तल लेंस का चश्मा देते हैं। उत्तल लेंस प्रकाश की किरणों को थोड़ा और सिकोड़ (मोड़) देता है, जिससे परछाई वापस आगे रेटिना पर आ जाती है।
जरा-दूरदृष्टिता की समस्या क्यों होती है?
जैसे-जैसे इंसान की उम्र बढ़ती है (बुढ़ापे में), आँखों की माँसपेशियाँ (पक्ष्माभी पेशियाँ) बहुत कमजोर हो जाती हैं और आँख का लेंस कठोर हो जाता है। इसके कारण व्यक्ति को न तो पास की चीजें साफ दिखती हैं और न ही दूर की। इस बीमारी को जरा-दूरदृष्टिता कहते हैं।
- निवारण: इस बीमारी को ठीक करने के लिए द्विफोकसी लेंस (दो फोकस वाले चश्मे) का इस्तेमाल किया जाता है। इस चश्मे के ऊपरी हिस्से में अवतल लेंस (दूर देखने के लिए) और निचले हिस्से में उत्तल लेंस (पास की किताब पढ़ने के लिए) लगा होता है।
क्या मोतियाबिंद भी एक दृष्टि दोष है?
मोतियाबिंद ऊपर बताए गए दृष्टि दोषों से थोड़ा अलग है। कभी-कभी अधिक उम्र के लोगों के नेत्र का पारदर्शी क्रिस्टलीय लेंस दूधिया (सफेद) और धुंधला हो जाता है। इस स्थिति को मोतियाबिंद (Cataract) कहते हैं। इसके कारण इंसान की आँखों की रोशनी पूरी तरह जा सकती है। इसे किसी चश्मे से ठीक नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) करके आँख में नया कृत्रिम (Artificial) लेंस डाला जाता है।
अब खेलें: दृष्टि दोष और चश्मे का लेंस क्विज़
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अध्याय 10 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- भाग 1: मानव नेत्र की संरचना और समंजन क्षमता कैसे कार्य करती है?
- You are Reading Here: दृष्टि दोष क्या हैं और उनका संशोधन कैसे किया जाता है?
- भाग 3: प्रिज्म द्वारा प्रकाश का अपवर्तन और विक्षेपण कैसे होता है?
- भाग 4: वायुमंडलीय अपवर्तन और प्रकाश का प्रकीर्णन क्या है?