भाग 5: विस्थापन और द्विविस्थापन अभिक्रियाएं – UP Board Class 10

यूपी बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान की इस यात्रा में आज हम पांचवें भाग पर पहुँच चुके हैं। आज का विषय बहुत ही दिलचस्प है। आपने अक्सर सुना होगा ‘जिसकी लाठी, उसकी भैंस’। यानी जो ताकतवर होता है, वह कमजोर को हटाकर उसकी जगह ले लेता है। रसायन विज्ञान में तत्वों के बीच भी बिल्कुल ऐसा ही होता है!

आज हम यह समझेंगे कि जब एक ताकतवर (अधिक क्रियाशील) तत्व किसी कमजोर तत्व के सामने आता है, तो वह कैसे उसे उसके ही घर (यौगिक) से बाहर निकाल फेंकता है।

विस्थापन अभिक्रिया

आइए इसे एक बहुत ही प्रसिद्ध और मजेदार प्रयोग से समझते हैं। यदि आप कॉपर सल्फेट (CuSO4) का नीले रंग का जलीय विलयन लें और उसमें लोहे की कुछ साफ कीलें (Fe) डुबो कर 20 मिनट के लिए छोड़ दें, तो क्या होगा?

20 मिनट बाद आप देखेंगे कि विलयन का नीला रंग हल्का (मलीन) पड़ गया है और लोहे की कीलों पर भूरे रंग की परत चढ़ गई है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि लोहा, कॉपर (तांबे) से अधिक ताकतवर (क्रियाशील) है। लोहे ने कॉपर को उसी के विलयन से बाहर निकाल दिया और खुद उसकी जगह ले ली।

Fe(s) + CuSO4(aq) → FeSO4(aq) + Cu(s)

परिभाषा: वह अभिक्रिया जिसमें एक अधिक क्रियाशील तत्व, किसी कम क्रियाशील तत्व को उसके यौगिक (विलयन) से विस्थापित कर देता है (हटा देता है), उसे विस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।

कुछ अन्य उदाहरण जहाँ जिंक (Zn) और लेड (Pb), कॉपर को विस्थापित करते हैं क्योंकि वे कॉपर से अधिक क्रियाशील हैं:
Zn(s) + CuSO4(aq) → ZnSO4(aq) + Cu(s)
Pb(s) + CuCl2(aq) → PbCl2(aq) + Cu(s)

👨‍🏫 शिक्षक की सलाह (Teacher’s Pro-Tip): परीक्षा में यह सवाल बहुत बार आता है कि “लोहे की कील डालने पर कॉपर सल्फेट के विलयन का नीला रंग क्यों बदल जाता है?” इसका सीधा सा जवाब है – विस्थापन अभिक्रिया के कारण! लोहे ने कॉपर को हटाकर हल्का हरा ‘आयरन सल्फेट’ बना लिया, जिससे नीला रंग गायब हो गया।

द्विविस्थापन अभिक्रिया

विस्थापन में तो सिर्फ एक तत्व ने दूसरे की जगह ली, लेकिन क्या हो अगर दो अलग-अलग यौगिक आपस में एक-दूसरे के साथी (आयनों) की अदला-बदली कर लें? इसे हम द्विविस्थापन कहते हैं।

परिभाषा: वे अभिक्रियाएँ जिनमें अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है, उन्हें द्विविस्थापन अभिक्रियाएँ कहते हैं।

प्रयोग: यदि हम सोडियम सल्फेट (Na2SO4) के विलयन में बेरियम क्लोराइड (BaCl2) का विलयन मिलाते हैं, तो सोडियम और बेरियम अपने-अपने स्थान बदल लेते हैं।
Na2SO4(aq) + BaCl2(aq) → BaSO4(s) + 2NaCl(aq)

अवक्षेपण अभिक्रिया

ऊपर दी गई द्विविस्थापन अभिक्रिया में एक बहुत ही खास बात होती है। जब बेरियम और सल्फेट मिलते हैं, तो वे बेरियम सल्फेट (BaSO4) बनाते हैं। यह एक सफ़ेद रंग का ठोस पदार्थ होता है जो पानी में नहीं घुलता और बर्तन की तली में बैठ जाता है।

पानी में न घुलने वाले इस ठोस पदार्थ को अवक्षेप (Precipitate) कहते हैं। और जिस भी अभिक्रिया में अवक्षेप का निर्माण होता है, उसे अवक्षेपण अभिक्रिया (Precipitation Reaction) कहा जाता है।

अब खेलें: विस्थापन और द्विविस्थापन क्विज़

यूपी बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान की इन महत्वपूर्ण अभिक्रियाओं पर आधारित इस मजेदार क्विज़ को खेलें और अपनी तैयारी की जाँच करें!

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महत्वपूर्ण विज्ञान परिभाषाएँ और व्याख्या

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