विज्ञान की इस कक्षा में आपका बहुत-बहुत स्वागत है। हमने अपने पिछले अध्यायों में पढ़ा था कि धातुएँ और अधातुएँ आपस में मिलकर आयनिक यौगिक बनाती हैं। इन यौगिकों का गलनांक बहुत ज्यादा होता है और ये पानी में घुलने पर बिजली के सुचालक बन जाते हैं। लेकिन अगर हम कार्बन के यौगिकों (जैसे- मेथेन या सिरका) को देखें, तो वे न तो बिजली के सुचालक होते हैं और न ही उनका गलनांक ज्यादा होता है। ऐसा क्यों है?
इसका सीधा सा अर्थ है कि कार्बन के यौगिक आयनों (धनायन या ऋणायन) से मिलकर नहीं बनते। आज हम जानेंगे कि कार्बन यौगिक बनाने के लिए कौन सा अनोखा रास्ता अपनाता है और प्रकृति में यह किन-किन जादुई रूपों में पाया जाता है।
कार्बन की समस्या: न लेना आसान, न देना आसान
हम जानते हैं कि कार्बन की परमाणु संख्या 6 है। इसका मतलब है कि इसके पहले कक्ष (K) में 2 इलेक्ट्रॉन और सबसे बाहरी कक्ष (L) में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं। विज्ञान का नियम है कि हर तत्व अपने बाहरी कक्ष को पूरी तरह भरना चाहता है (यानी अष्टक पूरा करना चाहता है) ताकि वह उत्कृष्ट गैसों की तरह स्थिर (Stable) हो सके।
अपना अष्टक पूरा करने के लिए कार्बन को 4 और इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता है। अब कार्बन के सामने दो रास्ते हैं:
- चार इलेक्ट्रॉन प्राप्त करना: कार्बन 4 इलेक्ट्रॉन लेकर C4- ऋणायन बना सकता है। लेकिन कार्बन के छोटे से नाभिक में केवल 6 प्रोटॉन होते हैं। इन 6 प्रोटॉनों के लिए 10 इलेक्ट्रॉनों (2 पहले से और 4 नए) को संभाल कर रखना बहुत मुश्किल काम है।
- चार इलेक्ट्रॉन खोना: कार्बन अपने 4 इलेक्ट्रॉन देकर C4+ धनायन बन सकता है। लेकिन 4 इलेक्ट्रॉनों को बाहर निकालने के लिए बहुत ही ज्यादा ऊर्जा (ताकत) की जरूरत होगी, जो संभव नहीं है।
समाधान: सहसंयोजी आबंध (Covalent Bond)
चूँकि कार्बन न तो 4 इलेक्ट्रॉन ले सकता है और न ही दे सकता है, इसलिए वह एक बीच का और समझदारी भरा रास्ता निकालता है—इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी (Sharing)। कार्बन अपने ही परमाणुओं के साथ या ऑक्सीजन, हाइड्रोजन और नाइट्रोजन जैसे अन्य तत्वों के साथ अपने बाहरी इलेक्ट्रॉनों को साझा करता है।
दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों के एक या अधिक युग्म (जोड़े) की साझेदारी के द्वारा बनने वाले आबंध को सहसंयोजी आबंध कहते हैं।
साझेदारी के कुछ सरल उदाहरण
- हाइड्रोजन (H2): हाइड्रोजन के बाहरी कक्ष में 1 इलेक्ट्रॉन होता है। दो हाइड्रोजन परमाणु अपना एक-एक इलेक्ट्रॉन साझा करके ‘एकल आबंध’ (Single Bond) बनाते हैं।
- ऑक्सीजन (O2): ऑक्सीजन को अपना कक्ष पूरा करने के लिए 2 इलेक्ट्रॉनों की जरूरत होती है। इसलिए दो ऑक्सीजन परमाणु दो-दो इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करके ‘द्विआबंध’ (Double Bond) बनाते हैं।
- नाइट्रोजन (N2): नाइट्रोजन को 3 इलेक्ट्रॉनों की जरूरत होती है, इसलिए वे ‘त्रिआबंध’ (Triple Bond) बनाते हैं।
- मेथेन (CH4): कार्बन अपने 4 इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी, हाइड्रोजन के 4 अलग-अलग परमाणुओं के साथ करता है और मेथेन गैस बनाता है।
कार्बन के अपररूप: एक तत्व, कई रूप
प्रकृति में कार्बन एक ही अवस्था में नहीं रहता। इसके कई रूप होते हैं, जिनके भौतिक गुण बिल्कुल अलग होते हैं, लेकिन रासायनिक गुण एक जैसे होते हैं। इन्हें अपररूप कहते हैं।
1. हीरा (Diamond)
हीरे में कार्बन का हर परमाणु, कार्बन के ही चार अन्य परमाणुओं के साथ मजबूती से जुड़ा होता है। इस त्रिआयामी (3D) संरचना के कारण हीरा अब तक का ज्ञात सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है। यह विद्युत का कुचालक होता है क्योंकि इसमें कोई भी इलेक्ट्रॉन खाली (फ्री) नहीं होता।
2. ग्रेफ़ाइट (Graphite)
ग्रेफ़ाइट में कार्बन का हर परमाणु, केवल तीन अन्य परमाणुओं से जुड़ा होता है। इसकी संरचना एक के ऊपर एक रखी हुई परतों (षट्कोणीय) जैसी होती है। इसी कारण ग्रेफ़ाइट बहुत ही चिकना और फिसलनशील होता है (जैसे पेंसिल की नोक)। चूँकि इसका एक इलेक्ट्रॉन फ्री रहता है, इसलिए यह अधातु होने के बावजूद विद्युत का बहुत अच्छा सुचालक है।
3. फुलेरीन (Fullerene)
यह कार्बन का एक और अपररूप है। सबसे पहले C-60 की पहचान की गई थी, जिसमें कार्बन के 60 परमाणु आपस में जुड़कर एक फुटबॉल जैसी गोल संरचना बनाते हैं। इसे अमेरिकी आर्किटेक्ट ‘बकमिंसटर फुलर’ के नाम पर फुलेरीन नाम दिया गया।
अब खेलें: सहसंयोजी आबंध और अपररूप क्विज़
यूपी बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान के इस महत्वपूर्ण विषय पर आधारित मजेदार क्विज़ को खेलें और अपनी तैयारी को पक्का करें!
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Total Questions: 12 | Total Marks: 20
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अध्याय 4 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- You are Reading Here: कार्बन में सहसंयोजी आबंध और उसके अपररूप
- भाग 2: कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति: संतृप्त और असंतृप्त यौगिक
- भाग 3: प्रकार्यात्मक समूह और समजातीय श्रेणी का रहस्य
- भाग 4: कार्बन यौगिकों की नामपद्धति (नामकरण)
- भाग 5: कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुणधर्म (दहन और ऑक्सीकरण)
- भाग 6: एथनॉल, एथेनॉइक अम्ल और साबुन-अपमार्जक की सफाई प्रक्रिया