विज्ञान की हमारी कक्षा में आपका फिर से स्वागत है। क्या आपने कभी लोहे के गेट पर जंग लगते देखा है? या यह सोचा है कि जब हम लोहे को बाहर छोड़ते हैं तो वह खराब हो जाता है, लेकिन सोने की अंगूठी हमेशा चमकदार क्यों रहती है? यह सब धातुओं के ‘रासायनिक स्वभाव’ के कारण होता है।
जिस तरह हर इंसान का स्वभाव अलग होता है (कोई जल्दी गुस्सा हो जाता है, तो कोई हमेशा शांत रहता है), बिल्कुल वैसे ही हर धातु का रासायनिक स्वभाव भी अलग-अलग होता है। आज के इस भाग में हम जानेंगे कि जब धातुएँ हवा (ऑक्सीजन) और पानी के संपर्क में आती हैं, तो वे कैसा व्यवहार करती हैं।
वायु (ऑक्सीजन) के साथ धातुओं की अभिक्रिया
लगभग सभी धातुएँ ऑक्सीजन के साथ मिलकर अपने संगत ‘धातु ऑक्साइड’ (Metal Oxide) बनाती हैं। लेकिन हवा के साथ इनकी जुड़ने की रफ्तार (अभिक्रियाशीलता) एक जैसी नहीं होती।
सोडियम और पोटैशियम का खतरनाक स्वभाव
सोडियम और पोटैशियम जैसी धातुएँ हवा के प्रति इतनी ज्यादा संवेदनशील होती हैं कि अगर आप इन्हें खुले में रख दें, तो ये तुरंत आग पकड़ लेती हैं! इसी अचानक लगने वाली आग और दुर्घटनाओं से बचने के लिए इन धातुओं को हमेशा किरोसिन (मिट्टी के तेल) में डुबोकर सुरक्षित रखा जाता है।
ऑक्साइड की सुरक्षा परत
सामान्य तापमान पर मैग्नीशियम, एल्युमिनियम, जिंक और लेड (सीसा) जैसी धातुओं पर ऑक्सीजन गैस अपनी एक पतली सी परत बना लेती है। यह ऑक्साइड की परत धातु को अंदर से सुरक्षित रखती है ताकि वह आगे खराब (संक्षारित) न हो। सोना और चाँदी जैसी धातुएँ हवा की ऑक्सीजन से बिल्कुल भी अभिक्रिया नहीं करतीं, इसीलिए वे सालों-साल सुरक्षित रहती हैं।
उभयधर्मी ऑक्साइड क्या हैं?
हम जानते हैं कि धातुओं के ऑक्साइड आमतौर पर क्षारकीय (Basic) स्वभाव के होते हैं। लेकिन एल्युमिनियम ऑक्साइड और जिंक ऑक्साइड कुछ अलग ही खेल दिखाते हैं। ये अम्ल और क्षारक, दोनों के साथ अभिक्रिया करके लवण और पानी बनाते हैं। ऐसे धातु ऑक्साइड जो अम्लीय और क्षारकीय दोनों तरह का व्यवहार दिखाते हैं, उन्हें उभयधर्मी ऑक्साइड कहते हैं।
ऐनोडीकरण: धातु को और मजबूत बनाना
एल्युमिनियम पर प्राकृतिक रूप से जो ऑक्साइड की परत बनती है, वह उसे जंग से बचाती है। कारखानों में इस परत को जानबूझकर बिजली (विद्युत अपघटन) की मदद से और भी मोटा कर दिया जाता है, ताकि एल्युमिनियम की वस्तुएं कभी खराब न हों। एल्युमिनियम पर ऑक्साइड की यह मोटी परत बनाने की प्रक्रिया को ही ऐनोडीकरण कहा जाता है।
जल (पानी) के साथ धातुओं का व्यवहार
पानी के साथ भी धातुएँ बहुत अलग-अलग तरीके से पेश आती हैं:
- ठंडे जल के साथ: सोडियम और पोटैशियम ठंडे पानी के साथ भी इतनी भयंकर और तेज अभिक्रिया करते हैं कि उसमें से निकलने वाली हाइड्रोजन गैस तुरंत आग पकड़ लेती है।
- तैरने वाली धातुएँ: कैल्सियम की पानी के साथ अभिक्रिया थोड़ी धीमी होती है। इसमें आग तो नहीं लगती, लेकिन निकलने वाली हाइड्रोजन गैस के बुलबुले धातु की सतह पर चिपक जाते हैं, जिससे कैल्सियम पानी में तैरने लगता है। मैग्नीशियम ठंडे पानी के साथ नहीं, बल्कि गर्म पानी के साथ अभिक्रिया करता है और वह भी बुलबुलों के कारण तैरने लगता है।
- भाप के साथ अभिक्रिया: एल्युमिनियम, लोहा (आयरन) और जिंक न तो ठंडे पानी से जुड़ते हैं और न ही गर्म पानी से। ये केवल पानी की भाप (Steam) के साथ अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड और हाइड्रोजन गैस बनाते हैं।
- कोई अभिक्रिया नहीं: लेड (सीसा), कॉपर (तांबा), चाँदी और सोना पानी के किसी भी रूप (ठंडा, गर्म या भाप) के साथ बिल्कुल भी अभिक्रिया नहीं करते।
अब खेलें: रासायनिक गुणधर्म और अभिक्रिया क्विज़
यूपी बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान के इस महत्वपूर्ण विषय पर आधारित मजेदार क्विज़ को खेलें और अपनी तैयारी की जाँच करें!
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अध्याय 3 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- भाग 1: धातुओं और अधातुओं के भौतिक गुणधर्म
- You are Reading Here: धातुओं के रासायनिक गुणधर्म और वायु व जल से अभिक्रिया
- भाग 3: सक्रियता श्रेणी और धातुओं की विस्थापन अभिक्रियाएँ
- भाग 4: धातु और अधातु कैसे अभिक्रिया करते हैं: आयनिक यौगिक
- भाग 5: धातुओं की प्राप्ति: अयस्क से शुद्ध धातु का निष्कर्षण
- भाग 6: संक्षारण से बचाव और मिश्रातु (मिश्रधातु) का निर्माण