भाग 3: पुष्पी पौधों में लैंगिक जनन और बीज निर्माण कैसे होता है?

हम सभी को रंग-बिरंगे और खुशबूदार फूल बहुत पसंद होते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पौधों में फूल क्यों खिलते हैं? क्या वे सिर्फ सजावट के लिए हैं? बिल्कुल नहीं! फूल वास्तव में पौधों के ‘जनन अंग’ होते हैं।

जिस तरह इंसानों और जानवरों में बच्चे पैदा करने के लिए नर और मादा की जरूरत होती है, उसी तरह बहुत से पौधों में भी लैंगिक जनन होता है। आज हम जानेंगे कि एक फूल के अंदर बीज कैसे बनता है और वह बीज एक मीठे फल में कैसे बदल जाता है!

पुष्प के मुख्य जनन अंग कौन से हैं?

एक फूल के मुख्य रूप से चार भाग होते हैं—बाह्यदल (हरे पत्ते), दलपुंज (रंगीन पंखुड़ियां), पुंकेसर और स्त्रीकेसर। जनन की प्रक्रिया के लिए पुंकेसर और स्त्रीकेसर सबसे महत्वपूर्ण हैं:

पुंकेसर: पौधे का नर जनन अंग

यह फूल का नर हिस्सा है। इसके ऊपर एक फूला हुआ भाग होता है जिसे परागकोश कहते हैं। इसी परागकोश के अंदर पीले रंग के छोटे-छोटे पाउडर जैसे कण बनते हैं, जिन्हें ‘परागकण’ (Pollen grains) कहा जाता है। इन्हीं परागकणों में नर कोशिकाएं (युग्मक) होती हैं।

स्त्रीकेसर: पौधे का मादा जनन अंग

यह फूल के बिल्कुल बीचों-बीच स्थित होता है और इसके तीन हिस्से होते हैं:

  1. वर्तिकाग्र: यह सबसे ऊपर का चिपचिपा हिस्सा है, जो परागकणों को पकड़ता है।
  2. वर्तिका: यह बीच की एक पतली नली है।
  3. अंडाशय: यह सबसे नीचे का फूला हुआ हिस्सा है, जिसके अंदर ‘बीजांड’ (Ovules) होते हैं। इन बीजांडों के अंदर ही मादा कोशिका (अंड) पाई जाती है।

(नोट: पपीता और तरबूज जैसे पौधों के फूलों में या तो सिर्फ नर अंग होता है या मादा, इन्हें ‘एकलिंगी’ कहते हैं। जबकि गुड़हल और सरसों के फूलों में नर और मादा दोनों अंग एक ही फूल में होते हैं, इन्हें ‘उभयलिंगी’ कहते हैं।)

परागण क्या है और यह कितने प्रकार का होता है?

बीज बनाने के लिए नर कोशिका (परागकण) का मादा कोशिका (अंड) तक पहुँचना बहुत जरूरी है। परागकणों का परागकोश से निकलकर स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र तक पहुँचने की प्रक्रिया को ‘परागण’ (Pollination) कहते हैं।

यह दो प्रकार का होता है:

  • स्व-परागण: जब एक फूल के परागकण उसी फूल के वर्तिकाग्र पर गिरते हैं।
  • पर-परागण: जब परागकण उड़कर किसी दूसरे फूल के वर्तिकाग्र पर गिरते हैं। पर-परागण हवा, पानी या मधुमक्खी और तितली जैसे कीटों (Insects) द्वारा होता है।

निषेचन की प्रक्रिया कैसे संपन्न होती है?

जैसे ही सही परागकण चिपचिपे वर्तिकाग्र पर गिरता है, उसमें से एक पतली नली निकलती है (पराग नली)। यह नली वर्तिका से होते हुए सीधे नीचे अंडाशय (Ovary) तक जाती है। इस नली के जरिए नर कोशिका नीचे जाकर बीजांड के अंदर मौजूद मादा कोशिका (अंड) से मिल जाती है। नर और मादा कोशिकाओं के इस तरह आपस में मिलने को निषेचन (Fertilization) कहते हैं। निषेचन के बाद एक ‘युग्मनज’ (Zygote) बनता है, जो आगे चलकर नया पौधा बनेगा।

फल, बीज और अंकुरण का निर्माण कैसे होता है?

निषेचन के बाद फूल में बहुत बड़े बदलाव आते हैं। फूल की रंगीन पंखुड़ियां, हरे पत्ते और पुंकेसर सूखकर नीचे गिर जाते हैं। अब सिर्फ अंडाशय बचता है।

  • अंडाशय के अंदर मौजूद बीजांड एक कठोर परत बना लेता है और बीज (Seed) में बदल जाता है। इसी बीज के अंदर भविष्य का पौधा (भ्रूण) सुरक्षित रहता है।
  • अंडाशय बहुत तेजी से बढ़ता है और पककर एक फल (Fruit) बन जाता है। (यानी जो फल हम खाते हैं, वह असल में फूल का अंडाशय होता है!)

जब हम उस बीज को मिट्टी में बोते हैं और उसे सही मात्रा में पानी, हवा और तापमान मिलता है, तो बीज के अंदर का भ्रूण जाग जाता है और एक नए पौधे के रूप में मिट्टी से बाहर आ जाता है। इस प्रक्रिया को अंकुरण (Germination) कहते हैं।

अब खेलें: पुष्पी पौधों में जनन विज्ञान क्विज़

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