भाग 1: जंतु तंत्रिका तंत्र और तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) – UP Board Class 10 Science

जरा सोचिए, जब आपके सामने आपका पसंदीदा स्वादिष्ट भोजन आता है, तो आपके मुँह में पानी क्यों आ जाता है? या जब गलती से आपका पैर किसी काँटे पर पड़ता है, तो आप पलक झपकते ही अपना पैर पीछे कैसे खींच लेते हैं?

हमारे शरीर को बाहर की दुनिया से जोड़ने और शरीर के अंदर एक बेहतरीन तालमेल (समन्वय) बैठाने का काम हमारा ‘तंत्रिका तंत्र’ (Nervous System) करता है। आज के इस पहले भाग में हम जानेंगे कि हमारा शरीर बाहरी जानकारियों को कैसे महसूस करता है और हमारे शरीर के अंदर बिछे हुए तारों के जाल यानी ‘तंत्रिका कोशिका’ (Neuron) का ढांचा कैसा होता है।

1. ग्राही: हमारे शरीर के जासूस

हमारे आस-पास के पर्यावरण में लगातार कुछ न कुछ बदलाव होते रहते हैं (जैसे तापमान का बदलना, आवाज आना, या रोशनी होना)। इन बदलावों को ‘उद्दीपन’ (Stimulus) कहते हैं। हमारे शरीर में इन बदलावों को पहचानने के लिए कुछ विशेष अंग होते हैं, जिन्हें ग्राही (Receptors) कहा जाता है। ये ग्राही हमारी ज्ञानेंद्रियों (Sense organs) में मौजूद होते हैं।

कुछ प्रमुख ग्राही और उनके कार्य:

  • रस संवेदी ग्राही (Gustatory Receptors): ये हमारी जीभ में होते हैं और भोजन के स्वाद (खट्टा, मीठा, नमकीन) का पता लगाते हैं।
  • घ्राण ग्राही (Olfactory Receptors): ये हमारी नाक में होते हैं और किसी भी चीज की गंध (सुगंध या बदबू) का पता लगाते हैं।
  • प्रकाश ग्राही (Photoreceptors): आँखों में मौजूद होते हैं जो देखने में मदद करते हैं।
  • श्रवण ग्राही (Auditory Receptors): कानों में मौजूद होते हैं जो सुनने और शरीर का संतुलन बनाने का काम करते हैं।
  • स्पर्श ग्राही (Thigmoreceptors): त्वचा में होते हैं जो गर्मी, सर्दी और दर्द का अहसास कराते हैं।

2. तंत्रिका कोशिका या न्यूरॉन

जिस तरह हमारा शरीर छोटी-छोटी कोशिकाओं से मिलकर बना है, ठीक उसी तरह हमारा पूरा तंत्रिका तंत्र (दिमाग और नसें) एक विशेष प्रकार की कोशिका से मिलकर बना है, जिसे तंत्रिका कोशिका या न्यूरॉन कहते हैं। यह हमारे शरीर की सबसे लंबी कोशिका होती है।

एक न्यूरॉन के मुख्य रूप से तीन हिस्से होते हैं:

  1. द्रुमिका (Dendrite): यह कोशिका के सिर पर मौजूद बालों (धागे) जैसी आकृतियाँ होती हैं। इनका काम बाहरी वातावरण या दूसरी कोशिका से सूचनाओं (सिग्नलों) को प्राप्त करना होता है।
  2. कोशिका पिंड (Cell Body): द्रुमिका से मिली हुई सूचना यहाँ आती है और एक ‘विद्युत आवेग’ (Electrical impulse) यानी बिजली के करंट में बदल जाती है।
  3. तंत्रिकाक्ष या एक्सॉन (Axon): यह एक लंबी पूंछ जैसी संरचना होती है, जो विद्युत आवेग को कोशिका पिंड से दूर, न्यूरॉन के अंतिम सिरे तक ले जाती है।

3. सिनेप्स: दो न्यूरॉनों के बीच का गैप

हमारे शरीर में सूचनाएं पैर के अंगूठे से लेकर दिमाग तक एक सेकंड के भी हजारवें हिस्से में पहुँच जाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे शरीर की नसें (न्यूरॉन) एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़ी हुई नहीं होतीं?

दो तंत्रिका कोशिकाओं के बीच एक बहुत ही छोटा सा खाली स्थान (Gap) होता है, जिसे सिनेप्स (अंतर्ग्रथन) कहते हैं। जब विद्युत आवेग एक न्यूरॉन के एक्सॉन (अंतिम सिरे) तक पहुँचता है, तो वहाँ कुछ विशेष रसायन (Chemicals) निकलते हैं। ये रसायन उस खाली जगह (सिनेप्स) को पार करते हैं और अगले न्यूरॉन की द्रुमिका (Dendrite) में फिर से एक नया विद्युत आवेग पैदा कर देते हैं। इस तरह सूचना एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक दौड़ती चली जाती है और हमारे मस्तिष्क तक पहुँच जाती है।

अब खेलें: न्यूरॉन और तंत्रिका तंत्र क्विज़

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