पिछले भाग में हमने जाना था कि अवतल दर्पण (अंदर की ओर धंसा हुआ) और उत्तल दर्पण (बाहर की ओर उभरा हुआ) क्या होते हैं।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब हम किसी चमकदार चम्मच को अपने चेहरे के पास लाते हैं तो चेहरा सीधा और बड़ा दिखता है, लेकिन जब उसे दूर ले जाते हैं तो चेहरा उल्टा हो जाता है? ऐसा क्यों होता है? आज के इस भाग में हम जानेंगे कि दर्पणों के सामने अलग-अलग दूरी पर वस्तु को रखने से उसकी परछाई (प्रतिबिंब) कैसी बनती है और इसके नियम क्या हैं।
किरण आरेख बनाने के मुख्य नियम क्या हैं?
गोलीय दर्पणों द्वारा बनने वाले प्रतिबिंब का सही स्थान पता करने के लिए हमें कम से कम दो प्रकाश किरणों की जरूरत होती है। इन किरणों को खींचने के चार मुख्य नियम होते हैं:
- पहला नियम: मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली प्रकाश किरण, दर्पण से टकराने के बाद हमेशा मुख्य फोकस से होकर गुजरती है (या गुजरती हुई प्रतीत होती है)।
- दूसरा नियम: मुख्य फोकस से होकर जाने वाली प्रकाश किरण, दर्पण से टकराने के बाद हमेशा मुख्य अक्ष के समांतर हो जाती है (यह पहले नियम का बिल्कुल उल्टा है)।
- तीसरा नियम: वक्रता केंद्र (C) से होकर जाने वाली किरण, दर्पण से टकराने के बाद उसी रास्ते पर वापस लौट जाती है।
- चौथा नियम: दर्पण के ध्रुव (P) पर तिरछी पड़ने वाली किरण, मुख्य अक्ष के साथ उतना ही कोण बनाते हुए तिरछी वापस लौट जाती है।
अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का निर्माण कैसे होता है?
अवतल दर्पण में वस्तु की दूरी बदलने पर प्रतिबिंब का आकार और प्रकृति दोनों बदल जाते हैं। इसके 6 मुख्य मामले होते हैं:
- जब वस्तु बहुत दूर (अनंत पर) होती है, तो प्रतिबिंब फोकस पर बहुत छोटा (बिंदु के आकार का), वास्तविक और उल्टा बनता है।
- जैसे-जैसे हम वस्तु को दर्पण के पास लाते हैं, प्रतिबिंब दूर होता जाता है और उसका आकार बड़ा होने लगता है।
- जब वस्तु को वक्रता केंद्र (C) पर रखा जाता है, तो प्रतिबिंब भी (C) पर ही बनता है। यह वास्तविक, उल्टा और वस्तु के बिल्कुल बराबर आकार का होता है।
- सबसे विशेष स्थिति: जब वस्तु को दर्पण के ध्रुव (P) और फोकस (F) के बहुत करीब रखा जाता है, तो दर्पण के पीछे एक आभासी, सीधा और बहुत बड़ा प्रतिबिंब बनता है। (इसी स्थिति के कारण हम चेहरे को बड़ा देखने के लिए इस दर्पण का उपयोग करते हैं)।
अवतल दर्पण के प्रमुख उपयोग क्या हैं?
अवतल दर्पण प्रकाश को एक जगह इकट्ठा करता है और चीजों को बड़ा दिखाता है, इसलिए इसका उपयोग निम्नलिखित जगहों पर होता है:
- टॉर्च, सर्चलाइट और गाड़ियों की हेडलाइट में (शक्तिशाली समांतर प्रकाश पाने के लिए)।
- चेहरा बड़ा देखने के लिए ‘शेविंग दर्पण’ के रूप में।
- दाँतों के डॉक्टरों (Dentist) द्वारा मरीज के दाँतों का बड़ा प्रतिबिंब देखने के लिए।
- सौर भट्टियों में सूरज की गर्मी को एक जगह इकट्ठा करने के लिए।
उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब कैसे बनता है और इसके उपयोग क्या हैं?
उत्तल दर्पण का मामला बहुत ही आसान है। आप वस्तु को दर्पण के सामने कहीं भी रख दें, यह हमेशा एक ही प्रकार का प्रतिबिंब बनाता है—आभासी, सीधा और वस्तु से छोटा। यह प्रतिबिंब हमेशा दर्पण के पीछे ध्रुव और फोकस के बीच बनता है।
वाहनों के पश्च-दृश्य (साइड मिरर) में इसका उपयोग क्यों होता है?
गाड़ियों (जैसे बाइक या कार) के साइड मिरर में हमेशा उत्तल दर्पण का उपयोग किया जाता है। इसके दो मुख्य कारण हैं:
- यह हमेशा पीछे आने वाली गाड़ियों का सीधा प्रतिबिंब बनाता है।
- चूँकि यह बाहर की तरफ उभरा होता है, इसलिए इसका दृष्टि-क्षेत्र (Field of view) बहुत बड़ा होता है। यानी यह एक छोटे से शीशे में पीछे की बहुत बड़ी सड़क और बहुत सारी गाड़ियों को आसानी से दिखा देता है।
अब खेलें: गोलीय दर्पणों के प्रतिबिंब क्विज़
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अध्याय 9 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- भाग 1: प्रकाश का परावर्तन क्या है और गोलीय दर्पण कैसे कार्य करते हैं?
- You are Reading Here: गोलीय दर्पणों द्वारा प्रतिबिंब कैसे बनते हैं?
- भाग 3: दर्पण सूत्र क्या है और आवर्धन कैसे ज्ञात करते हैं?
- भाग 4: प्रकाश का अपवर्तन क्या है और अपवर्तनांक कैसे कार्य करता है?
- भाग 5: गोलीय लेंस क्या हैं और उनके द्वारा प्रतिबिंब कैसे बनते हैं?
- भाग 6: लेंस सूत्र क्या है और लेंस की क्षमता कैसे मापी जाती है?