पिछले भागों में हमने जाना कि जानवरों और इंसानों के पास दिमाग, रीढ़ की हड्डी और नसों का एक पूरा जाल होता है, जिससे वे अपने वातावरण को महसूस करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पेड़-पौधों के पास तो न दिमाग होता है और न ही मांसपेशियां, फिर भी सूरजमुखी का फूल हमेशा सूरज की तरफ कैसे मुड़ जाता है?
पौधों में भी बाहरी बदलावों (उद्दीपन) को महसूस करने और उन पर प्रतिक्रिया देने की एक अद्भुत क्षमता होती है। इसे ‘पादप समन्वय’ कहा जाता है। आज हम जानेंगे कि पौधे छुए जाने पर कैसे सिकुड़ते हैं और वे गुरुत्वाकर्षण या रोशनी की दिशा में कैसे गति करते हैं।
पादपों में गतियां (Movements in Plants)
पौधे इंसानों की तरह एक जगह से दूसरी जगह चलकर नहीं जा सकते। वे अपनी जड़ों, तनों और पत्तियों को मोड़कर या बढ़ाकर प्रतिक्रिया देते हैं। पौधों में मुख्य रूप से दो प्रकार की गतियां होती हैं:
- वृद्धि से मुक्त गति (अचानक होने वाली अनुक्रिया)
- वृद्धि के कारण गति (अनुवर्तन)
1. वृद्धि से मुक्त गति: छुई-मुई का रहस्य
जब आप ‘छुई-मुई’ (Mimosa pudica) के पौधे की पत्तियों को उंगली से छूते हैं, तो वे तुरंत सिकुड़ कर बंद हो जाती हैं। क्या इसमें पौधे की कोई वृद्धि (Growth) हुई? नहीं! यह सिर्फ स्पर्श के प्रति एक तुरंत होने वाली प्रतिक्रिया है।
यह कैसे होता है? पौधों के पास न तो तंत्रिका तंत्र है और न ही पेशियां। लेकिन जब हम पौधे को छूते हैं, तो वह वैद्युत-रसायन (Electrical-chemical) माध्यम से इस सूचना को एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक पहुँचाता है। पौधे की कोशिकाएं अपने अंदर पानी की मात्रा में बदलाव करके अपनी आकृति बदल लेती हैं (पानी कम होने पर वे सिकुड़ जाती हैं), जिससे पत्तियां मुरझाई हुई दिखने लगती हैं।
2. वृद्धि के कारण गतियां: अनुवर्तन
जब पौधों का कोई हिस्सा (जड़ या तना) किसी बाहरी उद्दीपन (जैसे रोशनी या पानी) की दिशा में वृद्धि करता है, तो इसे अनुवर्तन (Tropism) कहा जाता है। ये गतियां बहुत धीमी होती हैं। आइए इनके प्रकारों को समझते हैं:
प्रकाशानुवर्तन (Phototropism)
पौधे के अंगों का प्रकाश (रोशनी) की दिशा में गति करना प्रकाशानुवर्तन कहलाता है।
- धनात्मक (Positive): पौधे का तना (प्ररोह) हमेशा सूरज की रोशनी की तरफ बढ़ता है।
- ऋणात्मक (Negative): पौधे की जड़ें हमेशा प्रकाश से दूर (अंधेरे की ओर) बढ़ती हैं।
गुरुत्वानुवर्तन
गुरुत्वाकर्षण बल (पृथ्वी के खिंचाव) की दिशा में पौधों की गति को गुरुत्वानुवर्तन कहते हैं। पौधे की जड़ें हमेशा नीचे पृथ्वी की ओर (धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन) जाती हैं, जबकि तना हमेशा पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के विपरीत, ऊपर की ओर (ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्तन) बढ़ता है।
जलानुवर्तन
पौधों की जड़ों का पानी (नमी) की खोज में उस दिशा की ओर बढ़ना जलानुवर्तन कहलाता है। जहाँ मिट्टी में पानी होता है, जड़ें अपने-आप उसी तरफ मुड़कर वृद्धि करने लगती हैं।
रसायनानुवर्तन)
किसी विशेष रसायन (Chemical) के प्रभाव में होने वाली पौधे की गति को रसायनानुवर्तन कहते हैं। इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण फूलों के अंदर पराग नलिका का बीजांड की ओर वृद्धि करना है, जिससे पौधे में जनन (Reproduction) हो पाता है।
अब खेलें: पादपों में समन्वय क्विज़
अब नीचे दिए गए ‘Play Quiz’ बटन पर क्लिक करें और पौधों की गतियों व अनुवर्तन पर आधारित इस महत्वपूर्ण विज्ञान क्विज़ को खेलें!
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अध्याय 6 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- भाग 1: जंतु तंत्रिका तंत्र और तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन)
- भाग 2: प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action) और प्रतिवर्ती चाप
- भाग 3: मानव मस्तिष्क की संरचना और इसके प्रमुख कार्य
- You are Reading Here: पादपों में समन्वय: पौधों की गतियां और अनुवर्तन
- भाग 5: पादप हॉर्मोन (ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकाइनिन)
- भाग 6: जंतुओं में हॉर्मोन और अंतःस्रावी ग्रंथियां