भाग 6: जंतुओं में रासायनिक समन्वय और अंतःस्रावी ग्रंथियों के कार्य

पिछले भागों में हमने देखा कि हमारा मस्तिष्क और नसों का जाल (तंत्रिका तंत्र) बिजली के करंट (विद्युत आवेग) की तरह काम करता है। लेकिन इस करंट की एक सीमा होती है—यह शरीर की हर एक कोशिका तक नहीं पहुँच सकता और यह बहुत जल्दी खत्म हो जाता है।

तो फिर हमारे शरीर की हर एक कोशिका को एक साथ कैसे पता चलता है कि हमें लंबा होना है, या डर लगने पर भागना है? इसके लिए हमारा शरीर नसों के बजाय खून में दौड़ने वाले कुछ खास रसायनों का इस्तेमाल करता है। इन रसायनों को हॉर्मोन कहते हैं। आइए जानते हैं कि ये हॉर्मोन क्या हैं और हमारे शरीर में क्या-क्या जादुई बदलाव लाते हैं!

अंतःस्रावी ग्रंथियां और हॉर्मोन क्या होते हैं?

हमारे शरीर में कुछ विशेष थैलियां (ग्रंथियां) होती हैं जो खास तरह के रसायन बनाती हैं। इन थैलियों में कोई पाइप या नली नहीं होती, इसलिए ये अपना रसायन सीधा हमारे खून में छोड़ देती हैं। खून के साथ बहकर ये रसायन पूरे शरीर में पहुँच जाते हैं। नलिका न होने के कारण इन्हें अंतःस्रावी ग्रंथियां कहते हैं और इनसे निकलने वाले रसायन को हॉर्मोन कहा जाता है।

शरीर में पाए जाने वाले प्रमुख हॉर्मोन कौन से हैं?

हमारे शरीर में कई प्रकार के हॉर्मोन पाए जाते हैं जो अलग-अलग काम करते हैं। आइए इन्हें कुछ सवालों के जरिए समझते हैं:

आपातकालीन स्थिति में शरीर कैसे प्रतिक्रिया करता है?

कल्पना कीजिए, आपके पीछे एक जंगली कुत्ता पड़ जाए! ऐसे समय में सोचने का वक्त नहीं होता। आपके गुर्दे (वृक्क) के ऊपर मौजूद अधिवृक्क ग्रंथि तुरंत खून में एड्रीनलीन नाम का हॉर्मोन छोड़ देती है। यह हॉर्मोन दिल की धड़कन तेज कर देता है, जिससे मांसपेशियों को ज्यादा ऑक्सीजन मिलती है। पाचन तंत्र से खून हटकर पैरों की तरफ जाने लगता है और आप पूरी ताकत से भागने के लिए तैयार हो जाते हैं।

हमारे आहार में आयोडीन युक्त नमक क्यों आवश्यक है?

हमारे गले में एक ग्रंथि होती है जिसे अवटुग्रंथि (थायरॉइड) कहते हैं। यह ग्रंथि हमारे शरीर के विकास और पाचन को कंट्रोल करने के लिए थायरॉक्सिन हॉर्मोन बनाती है। इस हॉर्मोन को बनाने के लिए आयोडीन बहुत जरूरी है। अगर हमारे खाने में आयोडीन की कमी हो जाए, तो हमारा गला सूजकर लटक जाता है। इस खतरनाक बीमारी को गॉयटर (घेंघा) कहते हैं।

इंसानों की लंबाई कैसे बढ़ती या रुकती है?

हमारे मस्तिष्क के ठीक नीचे एक मटर के दाने के बराबर ग्रंथि होती है, जिसे पीयूष ग्रंथि (पिट्यूटरी) कहते हैं। यह वृद्धि हॉर्मोन बनाती है। बचपन में अगर यह हॉर्मोन कम निकले, तो इंसान बौना (छोटा) रह जाता है, और अगर जरूरत से ज्यादा निकले तो इंसान की लंबाई बहुत अधिक (दानव जैसी) हो जाती है।

मधुमेह (डायबिटीज) का कारण क्या है?

हमारे पेट के पास मौजूद अग्नाशय नाम की ग्रंथि इंसुलिन हॉर्मोन बनाती है। इसका काम हमारे खून में चीनी (शर्करा) की मात्रा को कंट्रोल करना है। अगर यह ग्रंथि इंसुलिन बनाना कम कर दे, तो खून में चीनी का स्तर बहुत बढ़ जाता है, जिसे मधुमेह (डायबिटीज) की बीमारी कहते हैं। यही कारण है कि गंभीर मरीजों को इंसुलिन के इंजेक्शन दिए जाते हैं।

यौवनारंभ (किशोर अवस्था) के समय शरीर में बदलाव क्यों आते हैं?

जब लड़के और लड़कियां 10-12 वर्ष की उम्र में पहुँचते हैं, तो उनके शरीर में अचानक कई बदलाव आते हैं (जैसे दाढ़ी-मूँछ आना या आवाज भारी होना)। यह बदलाव लड़कों में टेस्टोस्टेरोन (वृषण द्वारा स्रावित) और लड़कियों में एस्ट्रोजन (अंडाशय द्वारा स्रावित) हॉर्मोन के कारण होता है।

हॉर्मोन की मात्रा को कौन नियंत्रित करता है?

अगर शरीर में कोई हॉर्मोन जरूरत से ज्यादा या कम निकले, तो भयंकर बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए शरीर में एक ‘ऑटोमैटिक सेंसर सिस्टम’ लगा होता है, जिसे पुनर्भरण क्रियाविधि (Feedback Mechanism) कहते हैं। उदाहरण के लिए, जब खून में चीनी बढ़ती है, तो अग्नाशय खुद इसे भांप लेता है और ज्यादा इंसुलिन निकालता है। जब चीनी कम हो जाती है, तो इंसुलिन निकलना अपने-आप कम हो जाता है।

अब खेलें: जंतु हॉर्मोन विज्ञान क्विज़

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