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भाग 4: मानव जनन तंत्र कैसे कार्य करता है?

पिछले भाग में हमने जाना कि फूल वाले पौधों में बीज और फल कैसे बनते हैं। अब हम प्रकृति की सबसे जटिल और अद्भुत रचना—मानव (इंसान) के बारे में बात करेंगे।

बचपन से लेकर बड़े होने तक हमारे शरीर में लगातार वृद्धि होती है (जैसे लंबाई बढ़ना, दाँत टूटना और नए आना)। लेकिन किशोरावस्था में पहुँचते ही शरीर में कुछ ऐसे बदलाव आते हैं, जो सिर्फ शरीर को बड़ा नहीं करते, बल्कि उसे ‘जनन’ (संतान पैदा करने) के लिए तैयार करते हैं। आइए जानते हैं कि यह बदलाव कैसे आते हैं और मानव का नर तथा मादा जनन तंत्र कैसे काम करता है।

यौवनारंभ के दौरान शरीर में क्या बदलाव आते हैं?

उम्र का वह पड़ाव जब शरीर में यौन परिपक्वता (Sexual maturity) आने लगती है, उसे यौवनारंभ कहते हैं। इस दौरान कुछ बदलाव लड़के और लड़कियों दोनों में एक समान होते हैं, जैसे—काँख और जाँघों के बीच बाल आना, त्वचा का तैलीय होना और मुहाँसे निकलना।

लेकिन कुछ बदलाव अलग-अलग होते हैं:

  • लड़कियों में: स्तनों के आकार में वृद्धि होना और ऋतुस्राव (मासिक धर्म) का शुरू होना।
  • लड़कों में: चेहरे पर दाढ़ी-मूँछ आना, आवाज का भारी होना और कभी-कभी रात में शिश्न का बड़ा या सख्त होना।

नर जनन तंत्र कैसे कार्य करता है?

पुरुषों (नर) के जनन तंत्र का मुख्य काम जनन कोशिका (शुक्राणु) बनाना और उसे मादा के शरीर तक पहुँचाना है। इसके मुख्य अंग निम्नलिखित हैं:

  • वृषण: ये शरीर के बाहर एक थैली (वृषणकोष) में होते हैं। इनका काम ‘शुक्राणु’ (Sperm) और ‘टेस्टोस्टेरोन’ हॉर्मोन बनाना है। ये शरीर के बाहर इसलिए होते हैं क्योंकि शुक्राणु बनने के लिए शरीर के सामान्य तापमान से कम तापमान की जरूरत होती है।
  • शुक्रवाहिनी: यह एक नली है जो वृषण में बने शुक्राणुओं को ऊपर ले जाती है।
  • संबंधित ग्रंथियां: रास्ते में प्रोस्टेट और शुक्राशय ग्रंथियां अपना स्राव शुक्राणुओं में मिला देती हैं। यह तरल पदार्थ शुक्राणुओं को पोषण देता है और उनके तैरने को आसान बनाता है। इस पूरे मिश्रण को ‘वीर्य’ (Semen) कहते हैं।
  • शिश्न: यह वह अंग है जो शुक्राणुओं (वीर्य) को मादा के शरीर (योनि) में पहुँचाने का काम करता है।

मादा जनन तंत्र की संरचना कैसी होती है?

स्त्रियों (मादा) का जनन तंत्र अंड (मादा कोशिका) बनाने और बच्चे के जन्म तक उसे सुरक्षित रखने का काम करता है। इसके मुख्य अंग निम्नलिखित हैं:

  • अंडाशय: मादा के शरीर में दो अंडाशय होते हैं। जब एक लड़की पैदा होती है, तो उसके अंडाशयों में हजारों कच्चे (अपरिपक्व) अंड होते हैं। यौवनारंभ के बाद हर महीने इनमें से कोई एक अंड पककर बाहर निकलता है।
  • डिंबवाहिनी (फैलोपियन ट्यूब): अंडाशय से निकला हुआ अंड इसी पतली नली में आता है। शुक्राणु और अंड का मिलन (निषेचन) इसी नली में होता है।
  • गर्भाशय: यह एक उल्टी नाशपाती के आकार की थैली होती है। निषेचन के बाद भ्रूण (बच्चा) इसी गर्भाशय में स्थापित होता है और पूरे 9 महीने तक यहीं विकसित होता है।

निषेचन और भ्रूण का विकास कैसे होता है?

जब शुक्राणु डिंबवाहिनी में मौजूद अंड से मिल जाता है, तो ‘युग्मनज’ बनता है। यह युग्मनज धीरे-धीरे गर्भाशय में आकर उसकी दीवार से चिपक जाता है। यहाँ उसे माता के खून से पोषण मिलने लगता है।

माता के शरीर और भ्रूण के बीच एक खास तश्तरी जैसी संरचना बनती है, जिसे अपरा (प्लैसेंटा) कहते हैं। प्लैसेंटा के जरिए ही माता के खून से ग्लूकोज़ और ऑक्सीजन बच्चे तक पहुँचती है, और बच्चे का कचरा (कार्बन डाइऑक्साइड) बाहर माता के खून में आता है। करीब 9 महीने बाद गर्भाशय की पेशियों के सिकुड़ने से बच्चे का जन्म होता है。

यदि अंड का निषेचन न हो तो क्या होता है?

अगर अंड को कोई शुक्राणु नहीं मिलता (निषेचन नहीं होता), तो वह अंड सिर्फ एक दिन तक जिंदा रहता है। चूँकि गर्भाशय ने बच्चे को पालने के लिए अपनी दीवार को खून और मांस से बहुत मोटा और गद्देदार बना लिया था, इसलिए निषेचन न होने पर उस दीवार की कोई जरूरत नहीं रहती। वह मोटी दीवार धीरे-धीरे टूटकर खून और म्यूकस के रूप में योनि से बाहर निकलने लगती है। इसे ऋतुस्राव, रजोधर्म या मासिक धर्म कहते हैं। यह चक्र लगभग हर 28 दिनों में होता है।

अब खेलें: मानव जनन तंत्र विज्ञान क्विज़

अब नीचे दिए गए ‘Play Quiz’ बटन पर क्लिक करें और नर तथा मादा जनन तंत्र, प्लैसेंटा और निषेचन पर आधारित इन 20 महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास करें!

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महत्वपूर्ण विज्ञान परिभाषाएँ और व्याख्या

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