हमने पिछले अध्याय में पढ़ा था कि जनन की प्रक्रिया द्वारा जीव अपने जैसी नई संतान पैदा करते हैं। लेकिन क्या माता-पिता और उनके बच्चे बिल्कुल 100% एक जैसे (कार्बन कॉपी) होते हैं? नहीं! उनमें हमेशा कुछ न कुछ अंतर जरूर होता है।
विज्ञान की भाषा में इन प्राकृतिक अंतरों को ‘विभिन्नता’ कहा जाता है। आज के इस भाग में हम जानेंगे कि ये विभिन्नताएं कैसे पैदा होती हैं, पीढ़ी-दर-पीढ़ी ये कैसे इकट्ठी (संचयित) होती हैं, और यह किसी भी जीव की प्रजाति को दुनिया से खत्म होने से कैसे बचाती हैं।
जनन के दौरान विभिन्नताएं कैसे उत्पन्न होती हैं?
जब भी कोई जीव जनन करता है, तो उसकी कोशिका सबसे पहले अपने डीएनए (DNA) की एक कॉपी (प्रतिकृति) बनाती है। लेकिन प्रकृति में कोई भी ‘जैव-रासायनिक प्रक्रिया’ बिल्कुल 100% सटीक नहीं होती। डीएनए की कॉपी बनते समय हमेशा कुछ छोटी-मोटी गलतियां रह जाती हैं। इन्हीं प्राकृतिक गलतियों या बदलावों के कारण नई संतान में कुछ नए गुण आ जाते हैं, जिन्हें विभिन्नता कहते हैं।
नई पीढ़ी को अपने माता-पिता से एक ‘आधारिक शारीरिक ढांचा’ (Basic Design) और कुछ ‘विभिन्नताएं’ विरासत में मिलती हैं। जब यह नई पीढ़ी आगे जनन करती है, तो उसमें पुरानी विभिन्नताओं के साथ-साथ कुछ और नई विभिन्नताएं जुड़ जाती हैं। इस तरह पीढ़ी-दर-पीढ़ी विभिन्नताएं इकट्ठी (संचयित) होती रहती हैं।
अलैंगिक और लैंगिक जनन में विभिन्नताओं का क्या अंतर है?
विभिन्नताओं की मात्रा इस बात पर निर्भर करती है कि जीव किस तरीके से जनन कर रहा है:
- अलैंगिक जनन में: यदि हम गन्ने के खेत को देखें, तो हमें सभी पौधे लगभग एक जैसे दिखाई देंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि गन्ने में अलैंगिक जनन (बिना बीज के एक ही जनक द्वारा जनन) होता है। इसमें डीएनए में बहुत कम बदलाव आते हैं, इसलिए विभिन्नताएं भी बहुत कम होती हैं। यदि एक जीवाणु विभाजित होकर दो बनता है, तो उनमें भी आपस में बहुत अधिक समानताएं होंगी।
- लैंगिक जनन में: मानव और अधिकतर जंतुओं में लैंगिक जनन (नर और मादा दोनों का मिलना) होता है। इसमें दो अलग-अलग जीवों का डीएनए आपस में मिलता है, इसलिए संतानों में अधिकतम संख्या में सफल विभिन्नताएं पैदा होती हैं। यही कारण है कि इंसान के बच्चे एक-दूसरे से काफी अलग दिखते हैं।
क्या सभी विभिन्नताएं जीवों के लिए लाभदायक होती हैं?
क्या डीएनए में होने वाला हर बदलाव जीव के लिए फायदेमंद होता है? निश्चित रूप से नहीं! प्रकृति की विविधता के आधार पर विभिन्न जीवों को इन बदलावों से अलग-अलग प्रकार के लाभ हो सकते हैं। कुछ बदलाव जीव को ताकतवर बनाते हैं, तो कुछ उसे कमजोर भी कर सकते हैं।
विभिन्नताएं जीवों का अस्तित्व कैसे बचाती हैं?
मान लीजिए कि एक तालाब में कुछ जीवाणु रहते हैं। अचानक वैश्विक ऊष्मीकरण (Global Warming) के कारण तालाब के पानी का तापमान बहुत बढ़ जाता है। इस गर्मी से लगभग सभी जीवाणु मर जाएंगे।
लेकिन अगर जनन के दौरान कुछ जीवाणुओं के डीएनए में ऐसी ‘विभिन्नता’ आ गई थी जिसने उन्हें उष्ण प्रतिरोधी (अधिक गर्मी सहने की क्षमता) बना दिया था, तो केवल वही जीवाणु जिंदा बचेंगे और आगे चलकर अपनी नई आबादी बढ़ाएंगे।
इस उदाहरण से यह साफ होता है कि विभिन्नताएं किसी एक अकेले जीव के लिए शायद उतनी जरूरी न हों, लेकिन बदलते हुए पर्यावरण में पूरी प्रजाति (समष्टि) को नष्ट होने से बचाने के लिए विभिन्नताएं बहुत ही आवश्यक हैं।
अब खेलें: विभिन्नताओं का संचयन विज्ञान क्विज़
अब नीचे दिए गए ‘Play Quiz’ बटन पर क्लिक करें और डीएनए प्रतिकृति तथा विभिन्नताओं के महत्व पर आधारित इन 20 महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास करें!
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अध्याय 8 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- You are Reading Here: जनन के दौरान विभिन्नताओं का संचयन और उनका महत्व क्या है?
- भाग 2: आनुवंशिकता क्या है और वंशागत लक्षण कैसे काम करते हैं?
- भाग 3: लक्षणों की वंशागति में मेंडल का क्या योगदान है?
- भाग 4: लक्षण खुद को कैसे व्यक्त करते हैं और लिंग निर्धारण कैसे होता है?