पिछले भाग में हमने जाना था कि जब प्रकाश हवा से काँच या पानी में जाता है, तो वह अपने रास्ते से थोड़ा मुड़ जाता है, जिसे अपवर्तन कहते हैं।
अब जरा सोचिए, अगर हम काँच के एक टुकड़े को एक खास गोलाई में काट लें, तो क्या हम प्रकाश को अपनी मर्जी से मोड़ सकते हैं? बिल्कुल! इसे ही ‘लेंस’ कहते हैं। हमारे चश्मे, मोबाइल के कैमरे और दूरबीन में इसी लेंस का उपयोग होता है। आज हम जानेंगे कि ये लेंस कितने प्रकार के होते हैं और ये चीजों को बड़ा या छोटा कैसे दिखाते हैं।
गोलीय लेंस क्या होते हैं और ये कितने प्रकार के होते हैं?
दो पृष्ठों (सतहों) से घिरा हुआ कोई पारदर्शी माध्यम (जैसे काँच), जिसका कम से कम एक पृष्ठ गोलीय (गोल) हो, उसे लेंस कहते हैं। चूँकि इसमें से प्रकाश आर-पार जा सकता है, इसलिए लेंस ‘अपवर्तन’ के नियम पर काम करते हैं। ये मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
- उत्तल लेंस: यह लेंस बीच में से मोटा और किनारों से पतला होता है। यह प्रकाश की सभी किरणों को एक बिंदु पर इकट्ठा कर देता है, इसलिए इसे अभिसारी लेंस भी कहते हैं।
- अवतल लेंस: यह लेंस बीच में से पतला और किनारों से मोटा होता है। यह प्रकाश की किरणों को दूर-दूर फैला देता है, इसलिए इसे अपसारी लेंस भी कहते हैं।
लेंसों से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु कौन से हैं?
लेंसों द्वारा प्रतिबिंब कैसे बनता है, यह समझने के लिए हमें इसके कुछ मुख्य बिंदुओं को जानना होगा। चूँकि लेंस में दो गोल सतहें होती हैं, इसलिए इसमें केंद्र और फोकस भी दो-दो होते हैं:
- वक्रता केंद्र: लेंस की दोनों गोल सतहें जिन दो अलग-अलग गोलों का हिस्सा होती हैं, उनके केंद्रों को वक्रता केंद्र कहते हैं।
- मुख्य अक्ष: लेंस के दोनों वक्रता केंद्रों को मिलाने वाली सीधी काल्पनिक रेखा को मुख्य अक्ष कहते हैं।
- प्रकाशिक केंद्र: लेंस के बिल्कुल बीच वाले बिंदु (Center) को प्रकाशिक केंद्र कहते हैं। यहाँ से गुजरने वाली प्रकाश किरण बिना मुड़े बिल्कुल सीधी निकल जाती है।
- मुख्य फोकस: मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली किरणें लेंस से अपवर्तन के बाद जिस बिंदु पर मिलती हैं (या मिलती हुई लगती हैं), उसे मुख्य फोकस कहते हैं।
लेंसों द्वारा किरण आरेख बनाने के नियम क्या हैं?
दर्पणों की तरह ही, लेंसों में भी प्रतिबिंब का स्थान पता करने के लिए किरण आरेख के तीन मुख्य नियम होते हैं:
- मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली किरण, उत्तल लेंस से अपवर्तन के बाद दूसरी ओर फोकस से होकर गुजरती है।
- मुख्य फोकस से होकर आने वाली प्रकाश किरण, उत्तल लेंस से अपवर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समांतर हो जाती है (यह पहले नियम का उल्टा है)।
- लेंस के प्रकाशिक केंद्र से गुजरने वाली किरण बिना मुड़े (बिना विचलन के) बिल्कुल सीधी निकल जाती है।
उत्तल और अवतल लेंस द्वारा प्रतिबिंब कैसे बनते हैं?
उत्तल लेंस द्वारा प्रतिबिंब का बनना
उत्तल लेंस बिल्कुल अवतल दर्पण की तरह काम करता है। इसमें वस्तु की दूरी बदलने पर प्रतिबिंब बदलता है:
- ज्यादातर मामलों में यह वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब बनाता है, जिसे परदे पर प्राप्त किया जा सकता है।
- विशेष स्थिति: जब वस्तु को लेंस के प्रकाशिक केंद्र और फोकस के बहुत करीब रखा जाता है, तो यह उसी तरफ एक आभासी, सीधा और बहुत बड़ा प्रतिबिंब बनाता है। इसी स्थिति के कारण उत्तल लेंस का उपयोग ‘हैंड लेंस’ (अक्षरों को बड़ा करके पढ़ने वाले शीशे) के रूप में किया जाता है।
अवतल लेंस द्वारा प्रतिबिंब का बनना
अवतल लेंस बिल्कुल उत्तल दर्पण की तरह काम करता है। आप वस्तु को कहीं भी रख दें, यह हमेशा एक ही प्रकार का प्रतिबिंब बनाता है—आभासी, सीधा और वस्तु से छोटा।
अब खेलें: गोलीय लेंस और प्रतिबिंब क्विज़
अब नीचे दिए गए ‘Play Quiz’ बटन पर क्लिक करें और उत्तल लेंस, अवतल लेंस तथा किरण आरेख के नियमों पर आधारित इन 20 महत्वपूर्ण विज्ञान प्रश्नों का अभ्यास करें!
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अध्याय 9 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- भाग 1: प्रकाश का परावर्तन क्या है और गोलीय दर्पण कैसे कार्य करते हैं?
- भाग 2: गोलीय दर्पणों द्वारा प्रतिबिंब कैसे बनते हैं?
- भाग 3: दर्पण सूत्र क्या है और आवर्धन कैसे ज्ञात करते हैं?
- भाग 4: प्रकाश का अपवर्तन क्या है और अपवर्तनांक कैसे कार्य करता है?
- You are Reading Here: गोलीय लेंस क्या हैं और उनके द्वारा प्रतिबिंब कैसे बनते हैं?
- भाग 6: लेंस सूत्र क्या है और लेंस की क्षमता कैसे मापी जाती है?