आधुनिक समाज में ‘विद्युत’ (Electricity) का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। हमारे घरों, स्कूलों और कारखानों में लगभग हर मशीन बिजली से ही चलती है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब हम स्विच दबाते हैं तो तारों के अंदर ऐसा क्या दौड़ता है जिससे पंखा चलने लगता है और बल्ब जल जाता है? आज के इस भाग में हम जानेंगे कि तारों के अंदर दौड़ने वाली इस रहस्यमयी ऊर्जा (विद्युत धारा) का विज्ञान क्या है और यह कैसे काम करती है!
विद्युत परिपथ क्या होता है?
जिस प्रकार पानी को बहने के लिए एक पाइप की जरूरत होती है, उसी प्रकार बिजली को बहने के लिए भी एक रास्ते की जरूरत होती है। किसी विद्युत धारा के सतत (लगातार) और बंद रास्ते को विद्युत परिपथ कहते हैं।
एक साधारण विद्युत परिपथ में मुख्य रूप से बैटरी (या सेल), तार, बल्ब और एक स्विच होता है। स्विच सेल और बल्ब के बीच संबंध जोड़ता या तोड़ता है। अगर यह परिपथ (रास्ता) कहीं से भी टूट जाए या स्विच ‘ऑफ़’ कर दिया जाए, तो बिजली बहना बंद हो जाती है और बल्ब बुझ जाता है।
विद्युत धारा किसे कहते हैं?
हम जानते हैं कि नदियों में पानी बहने से ‘जल धारा’ बनती है। ठीक इसी तरह, जब किसी धातु के तार (चालक) के अंदर ‘विद्युत आवेश’ (Charge) बहता है, तो उसे विद्युत धारा कहते हैं।
विज्ञान की भाषा में, “विद्युत आवेश के प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहते हैं।” यानी एक सेकंड में तार के किसी हिस्से से कितना आवेश गुजर रहा है, वही उस तार की विद्युत धारा है।
- विद्युत धारा को ‘I’ अक्षर से दर्शाया जाता है।
- आवेश को ‘Q’ से और समय को ‘t’ से दर्शाया जाता है।
- विद्युत धारा का सूत्र है: I = Q / t
विद्युत आवेश और धारा के मात्रक क्या हैं?
विद्युत आवेश का मात्रक क्या है?
विद्युत आवेश (Charge) को नापने वाले अंतर्राष्ट्रीय मात्रक (SI Unit) को कूलॉम (Coulomb) कहते हैं, जिसे ‘C’ से दर्शाते हैं। एक कूलॉम आवेश बहुत बड़ा होता है, यह लगभग 6 × 10¹⁸ इलेक्ट्रॉनों में मौजूद कुल आवेश के बराबर होता है! (एक अकेले इलेक्ट्रॉन पर 1.6 × 10⁻¹⁹ C का बहुत ही छोटा ऋणावेश होता है)।
विद्युत धारा का मात्रक क्या है?
विद्युत धारा को नापने वाले मात्रक को ऐम्पियर (Ampere) कहते हैं, जिसे ‘A’ से दर्शाते हैं। इस मात्रक का नाम फ्रांस के महान वैज्ञानिक ‘आंद्रे-मेरी ऐम्पियर’ के नाम पर रखा गया है।
1 ऐम्पियर क्या है? यदि किसी तार से 1 सेकंड में 1 कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है, तो उस तार में बहने वाली विद्युत धारा 1 ऐम्पियर कहलाती है (1 A = 1 C / 1 s)।
परिपथ में विद्युत धारा कैसे मापी जाती है?
किसी भी विद्युत परिपथ में बहने वाली विद्युत धारा (Current) को मापने के लिए जिस यंत्र का उपयोग किया जाता है, उसे ऐमीटर (Ammeter) कहते हैं। इसे हमेशा परिपथ के श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ा जाता है, ताकि सारी बिजली इसके अंदर से होकर गुजरे और यह सटीक माप दे सके।
विद्युत धारा की दिशा क्या होती है?
तारों में बिजली असल में इलेक्ट्रॉनों (ऋणावेश) के बहने से बनती है। इलेक्ट्रॉन हमेशा बैटरी के माइनस (-) सिरे से प्लस (+) सिरे की ओर बहते हैं।
लेकिन जब विद्युत धारा की खोज हुई थी, तब इलेक्ट्रॉनों के बारे में किसी को पता नहीं था। उस समय माना जाता था कि बिजली धनावेश (प्लस चार्ज) के बहने से बनती है। इसलिए आज भी परिपाटी (परंपरा) के अनुसार, विद्युत धारा की दिशा इलेक्ट्रॉनों के बहने की दिशा के बिल्कुल विपरीत मानी जाती है। यानी परिपथ में विद्युत धारा हमेशा बैटरी के धन (+) टर्मिनल से ऋण (-) टर्मिनल की ओर बहती है।
अब खेलें: विद्युत धारा और परिपथ क्विज़
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अध्याय 11 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- You are Reading Here: विद्युत धारा, परिपथ, विभव और विभवांतर क्या हैं?
- भाग 2: ओम का नियम क्या है और प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है?
- भाग 3: प्रतिरोधकों का संयोजन श्रेणीक्रम और पार्श्वक्रम में कैसे होता है?
- भाग 4: विद्युत धारा का तापीय प्रभाव और विद्युत शक्ति क्या है?