पिछले अध्याय में हमने पढ़ा था कि जब तारों में बिजली (विद्युत धारा) बहती है, तो वे गर्म हो जाते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि बिजली का एक और बहुत बड़ा जादू है?
जब किसी तार में बिजली बहती है, तो वह तार एक चुंबक (Magnet) की तरह काम करने लगता है! जी हाँ, विज्ञान की दुनिया में इसे ‘विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव’ कहते हैं। आज हमारे घर का पंखा, पानी की मोटर, मिक्सर ग्राइंडर और बड़े-बड़े जेनरेटर इसी जादुई प्रभाव के कारण चलते हैं।
इस बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण और मज़ेदार अध्याय के बेहतरीन नोट्स बनाने के लिए, मैंने इसे 4 छोटे-छोटे भागों में बाँट दिया है। आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके प्रत्येक विषय को गहराई से समझ सकते हैं:
- भाग 1: चुंबकीय क्षेत्र और क्षेत्र रेखाएं क्या हैं?
- भाग 2: विद्युत धारावाही चालक के कारण चुंबकीय क्षेत्र कैसे बनता है?
- भाग 3: चुंबकीय क्षेत्र में किसी धारावाही चालक पर बल कैसे लगता है?
- भाग 4: घरेलू विद्युत परिपथ कैसे कार्य करता है और यह क्यों सुरक्षित है?
विद्युत और चुंबकत्व का क्या संबंध है?
विद्युत और चुंबकत्व दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। 1820 में हैंस क्रिश्चियन ऑर्सटेड नाम के एक वैज्ञानिक ने सबसे पहले यह खोजा था कि जब किसी तार में बिजली बहती है, तो उसके पास रखी कंपास (दिक्सूचक) की सुई हिलने लगती है। कंपास की सुई खुद एक छोटा चुंबक होती है, और वह तभी हिलती है जब आस-पास कोई दूसरा चुंबक हो। इससे यह साबित हो गया कि विद्युत धारा एक चुंबकीय क्षेत्र पैदा करती है।
चुंबकीय क्षेत्र और क्षेत्र रेखाएं क्या होती हैं?
किसी चुंबक के चारों ओर का वह इलाका (क्षेत्र) जहाँ तक उसके बल का प्रभाव महसूस किया जा सके, उसे चुंबकीय क्षेत्र कहते हैं। इस बल की दिशा और ताकत को दर्शाने के लिए हम कुछ काल्पनिक रेखाएं खींचते हैं, जिन्हें ‘चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं’ कहते हैं। ये रेखाएं हमेशा चुंबक के उत्तरी ध्रुव (North Pole) से निकलती हैं और दक्षिणी ध्रुव (South Pole) में घुसती हैं।
फ्लेमिंग का वामहस्त नियम क्या है?
जब हम किसी तार में बिजली बहाकर उसे चुंबक बनाते हैं और फिर उसे किसी असली चुंबक के पास ले जाते हैं, तो दोनों चुंबक एक-दूसरे को धक्का देते हैं (बल लगाते हैं)। इसी धक्के के कारण मोटर घूमने लगती है! यह धक्का (बल) किस दिशा में लगेगा, यह पता लगाने के लिए हम फ्लेमिंग के वामहस्त (बाएं हाथ) के नियम का उपयोग करते हैं, जिसे हम इस अध्याय में विस्तार से समझेंगे।
घरेलू विद्युत परिपथ में क्या खतरे हैं?
इस अध्याय के अंत में हम जानेंगे कि हमारे घरों में बिजली कैसे आती है। शॉर्ट-सर्किट (लघुपथन) और ओवरलोडिंग (अतिभारण) जैसी खतरनाक घटनाएं क्यों होती हैं, और इनसे बचने के लिए फ्यूज तथा अर्थिंग (भूसंपर्कन) का उपयोग कैसे किया जाता है।
अब खेलें: चुंबकीय प्रभाव प्रारंभिक क्विज़
यूपी बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान के इस बारहवें अध्याय के परिचय पर आधारित मजेदार क्विज़ को खेलें और अपनी प्रारंभिक जानकारी की जाँच करें!
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