पिछले भाग में हमने जाना था कि चुंबक के चारों ओर एक ‘चुंबकीय क्षेत्र’ होता है, जिसे हम क्षेत्र रेखाओं द्वारा दर्शाते हैं।
लेकिन क्या होगा यदि चुंबक की जगह हम एक साधारण तांबे के तार में बिजली (करंट) प्रवाहित करें? ऑर्सटेड ने हमें बताया था कि तार भी चुंबक बन जाता है। तो क्या इस तार के चारों ओर भी चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं बनेंगी? और उनका आकार कैसा होगा? आज के इस भाग में हम सीधे तार, गोल तार और परिनालिका (Solenoid) द्वारा बनने वाले चुंबकीय क्षेत्र के बारे में विस्तार से समझेंगे[cite: 4]!
सीधे चालक में विद्युत धारा का चुंबकीय क्षेत्र कैसा होता है?
यदि हम एक सीधा और लंबा तार लें और उसमें विद्युत धारा प्रवाहित करें, तो उसके चारों ओर भी चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है[cite: 4]।
- पैटर्न (आकार): सीधे तार के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं संकेंद्री वृत्तों (Concentric circles) के रूप में होती हैं[cite: 4]। यानी एक ही केंद्र वाले बहुत सारे गोल छल्ले जो तार के चारों ओर बने होते हैं[cite: 4]।
- विद्युत धारा का प्रभाव: यदि हम तार में प्रवाहित विद्युत धारा को बढ़ा दें, तो चुंबकीय क्षेत्र की ताकत (प्रबलता) भी बढ़ जाती है[cite: 4]।
- दूरी का प्रभाव: जैसे-जैसे हम तार से दूर जाते हैं, चुंबकीय क्षेत्र घटता जाता है और वृत्तों का आकार बड़ा होता जाता है[cite: 4]।
दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम क्या है?
सीधे तार के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र किस दिशा में घूम रहा है, यह पता लगाने के लिए एक बहुत ही आसान नियम है, जिसे दक्षिण-हस्त (दायां हाथ) अंगुष्ठ नियम कहते हैं[cite: 4] (इसे मैक्सवेल का कॉर्कस्क्रू नियम भी कहा जाता है)[cite: 4]。
नियम: कल्पना कीजिए कि आपने अपने दाहिने हाथ में विद्युत धारावाही तार को इस प्रकार पकड़ा है कि आपका अंगूठा विद्युत धारा के बहने की दिशा की ओर संकेत कर रहा है। तब आपकी मुड़ी हुई उंगलियां तार के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को बताएंगी[cite: 4]!
वृत्ताकार पाश (लूप) के कारण चुंबकीय क्षेत्र कैसे बनता है?
यदि हम सीधे तार को मोड़कर एक गोल छल्ला (वृत्ताकार पाश) बना दें और उसमें करंट चालू करें, तो चुंबकीय क्षेत्र और भी मजेदार हो जाता है[cite: 4]।
छल्ले के हर एक हिस्से के चारों ओर गोल-गोल क्षेत्र रेखाएं बनती हैं[cite: 4]। लेकिन जैसे ही ये रेखाएं छल्ले के बिल्कुल बीच (केंद्र) में पहुँचती हैं, वे एकदम सरल (सीधी) रेखाओं जैसी प्रतीत होने लगती हैं[cite: 4]।
फेरों (Turns) का प्रभाव: यदि हम एक तार के बजाय $n$ फेरों (चक्करों) वाली कुंडली लें, तो उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र पहले की तुलना में $n$ गुना अधिक प्रबल (मजबूत) हो जाएगा[cite: 4]!
परिनालिका (Solenoid) और विद्युत चुंबक क्या है?
पास-पास लिपटे विद्युतरोधी तांबे के तार की बेलन (Cylinder) जैसी आकृति वाली अनेक फेरों की कुंडली को परिनालिका (Solenoid) कहते हैं[cite: 4]。
- जब परिनालिका में बिजली बहती है, तो इसका एक सिरा उत्तरी ध्रुव और दूसरा सिरा दक्षिणी ध्रुव की तरह काम करता है (बिल्कुल एक छड़ चुंबक की तरह)[cite: 4]।
- परिनालिका के भीतर (अंदर) चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं समांतर और सीधी होती हैं, जिसका मतलब है कि इसके अंदर चुंबकीय क्षेत्र सभी जगह एकसमान (Uniform) होता है[cite: 4]।
विद्युत चुंबक कैसे बनता है?
परिनालिका के अंदर का चुंबकीय क्षेत्र बहुत प्रबल (ताकतवर) होता है[cite: 4]। यदि हम इस परिनालिका के अंदर किसी चुंबकीय पदार्थ, जैसे नर्म लोहे (Soft iron) की छड़ को रख दें, तो वह छड़ बहुत ही शक्तिशाली चुंबक बन जाती है[cite: 4]। बिजली से बनने वाले इसी चुंबक को विद्युत चुंबक (Electromagnet) कहते हैं[cite: 4]!
अब खेलें: चालक का चुंबकीय क्षेत्र क्विज़
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अध्याय 12 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- भाग 1: चुंबकीय क्षेत्र और क्षेत्र रेखाएं क्या हैं?
- You are Reading Here: विद्युत धारावाही चालक के कारण चुंबकीय क्षेत्र कैसे बनता है?
- भाग 3: चुंबकीय क्षेत्र में किसी धारावाही चालक पर बल कैसे लगता है?
- भाग 4: घरेलू विद्युत परिपथ कैसे कार्य करता है और यह क्यों सुरक्षित है?