पिछले भागों में हमने विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभावों, मोटर के घूमने और चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के बारे में बहुत कुछ सीखा।
अब हम उस परिपथ के बारे में जानेंगे जिसका हम रोज़ाना सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं—हमारा अपना ‘घरेलू विद्युत परिपथ’। खंभे से हमारे घर तक बिजली कैसे आती है? तारों के लाल, काले और हरे रंग का क्या मतलब होता है? और शॉर्ट-सर्किट जैसी खतरनाक दुर्घटनाओं से बचने के लिए फ्यूज कैसे काम करता है? आज हम इन्हीं सब सवालों के जवाब जानेंगे!
हमारे घरों में बिजली के तारों के रंग और उनके अर्थ क्या हैं?
हम अपने घरों में विद्युत शक्ति (बिजली) की आपूर्ति खंभों या भूमिगत केबलों से प्राप्त करते हैं। इन मुख्य तारों में मुख्य रूप से तीन प्रकार के तार होते हैं:
- विद्युन्मय तार (Live Wire): इस तार पर लाल रंग का आवरण (कवर) होता है। इसे धनात्मक (+) तार भी कहते हैं। मुख्य रूप से इसी तार में बिजली का करंट आता है।
- उदासीन तार (Neutral Wire): इस तार पर काले रंग का आवरण होता है। इसे ऋणात्मक (-) तार कहते हैं। करंट इस तार से होकर वापस लौटता है।
हमारे देश (भारत) में इन दोनों तारों (विद्युन्मय और उदासीन) के बीच 220 वोल्ट (220 V) का विभवांतर (दबाव) होता है।
भूसंपर्क तार का क्या कार्य है?
तीसरा सबसे महत्वपूर्ण तार भूसंपर्क तार (Earth Wire) होता है, जिस पर हरे रंग का आवरण होता है। यह तार हमारे घर के पास जमीन में बहुत गहराई में दबी धातु की एक प्लेट से जुड़ा होता है।
यह तार हमारी सुरक्षा के लिए होता है। फ्रिज, प्रेस (इस्तरी), और टोस्टर जैसे धातु (Metal) की बॉडी वाले उपकरणों में इसका उपयोग किया जाता है। यदि कभी गलती से करंट उपकरण की बॉडी में आ जाए, तो यह हरा तार उस करंट को सीधे जमीन (धरती) में भेज देता है, जिससे हमें बिजली का गंभीर झटका (Shock) नहीं लगता।
घरेलू परिपथ में उपकरणों को किस क्रम में जोड़ा जाता है?
हमारे घरों में सभी विद्युत उपकरणों (जैसे पंखा, टीवी, बल्ब) को पार्श्वक्रम (Parallel) संयोजन में जोड़ा जाता है।
इसके दो मुख्य फायदे हैं: पहला, प्रत्येक उपकरण का अपना अलग स्विच होता है जिससे उसे अपनी मर्जी से चालू या बंद किया जा सकता है। दूसरा, सभी उपकरणों को बिल्कुल समान वोल्टता (220 V) मिलती है, और अगर एक पंखा खराब हो जाए, तो बाकी घर की बिजली बंद नहीं होती।
अतिभारण और लघुपथन क्या है?
बिजली के परिपथ में मुख्य रूप से दो खतरनाक स्थितियाँ हो सकती हैं:
- लघुपथन (Short-circuiting): जब पुराने होने या कटने के कारण लाल तार (विद्युन्मय तार) और काला तार (उदासीन तार) सीधे एक-दूसरे से चिपक जाते हैं, तो इसे लघुपथन कहते हैं। इस स्थिति में परिपथ का प्रतिरोध शून्य हो जाता है और विद्युत धारा का मान अकस्मात (अचानक) बहुत अधिक बढ़ जाता है, जिससे आग लग सकती है।
- अतिभारण (Overloading): जब हम एक ही सॉकेट (प्लग) में टीवी, फ्रिज, हीटर और प्रेस सब एक साथ लगा देते हैं, तो परिपथ में उसकी क्षमता से ज्यादा बिजली खिंचने लगती है। इसे अतिभारण कहते हैं।
विद्युत फ्यूज दुर्घटनाओं से कैसे बचाता है?
विद्युत फ्यूज हमारे घरों का सबसे महत्वपूर्ण ‘सुरक्षा गार्ड’ है। इसे हमेशा परिपथ के शुरू में लगाया जाता है। जब लघुपथन (शॉर्ट-सर्किट) या अतिभारण के कारण बिजली की मात्रा अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, तो जूल के तापन नियम के कारण फ्यूज का तार बहुत गर्म होकर पिघल जाता है।
फ्यूज तार के पिघलते ही परिपथ टूट जाता है और करंट आगे नहीं जा पाता। इससे हमारे घर के महँगे उपकरण जलने से और घर में आग लगने से बच जाती है।
अब खेलें: घरेलू विद्युत परिपथ विज्ञान क्विज़
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अध्याय 12 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- भाग 1: चुंबकीय क्षेत्र और क्षेत्र रेखाएं क्या हैं?
- भाग 2: विद्युत धारावाही चालक के कारण चुंबकीय क्षेत्र कैसे बनता है?
- भाग 3: चुंबकीय क्षेत्र में किसी धारावाही चालक पर बल कैसे लगता है?
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