पिछले भाग में हमने जाना था कि प्रकृति में जीव एक-दूसरे को खाकर कैसे ऊर्जा प्राप्त करते हैं और आहार श्रृंखला बनाते हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारी कुछ सुख-सुविधाओं ने पूरी पृथ्वी के लिए एक बहुत बड़ा खतरा पैदा कर दिया है? आसमान में मौजूद एक ‘रक्षा कवच’ अब टूट रहा है, और हमारे घरों से निकलने वाले कचरे के पहाड़ प्रकृति को बीमार कर रहे हैं। आज के इस अंतिम भाग में हम ‘ओज़ोन परत’ और ‘कचरा प्रबंधन’ जैसी दो सबसे बड़ी पर्यावरणीय समस्याओं के बारे में विस्तार से जानेंगे!
ओज़ोन परत क्या है और यह कैसे बनती है?
जिस तरह हम छाता लेकर खुद को बारिश से बचाते हैं, उसी तरह पृथ्वी के ऊपर गैस की एक परत होती है जो हमें सूर्य की खतरनाक किरणों से बचाती है। इस गैस को ओज़ोन (O3) कहते हैं। ओज़ोन के एक अणु में ऑक्सीजन के तीन परमाणु होते हैं।
ओज़ोन का निर्माण: वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में, सूर्य की उच्च ऊर्जा वाली पराबैंगनी (UV) विकिरण सामान्य ऑक्सीजन (O2) के अणुओं को तोड़कर स्वतंत्र ऑक्सीजन (O) परमाणु बना देती है। फिर ये स्वतंत्र परमाणु वापस O2 के साथ जुड़कर ओज़ोन (O3) गैस बनाते हैं।
- O2 → O + O (पराबैंगनी विकिरण द्वारा)
- O + O2 → O3 (ओज़ोन)
ओज़ोन परत का महत्व क्या है?
यद्यपि ओज़ोन गैस हमारे साँस लेने के लिए एक घातक विष (जहर) है, लेकिन आसमान की ऊँचाई पर यह एक वरदान है। यह परत सूर्य से आने वाली पराबैंगनी (UV) विकिरण को सोख लेती है। अगर ये किरणें सीधे धरती पर आ जाएं, तो मनुष्यों में त्वचा का कैंसर (Skin Cancer) जैसी भयानक बीमारियाँ हो सकती हैं।
ओज़ोन परत का अपक्षय (नुकसान) क्यों हो रहा है?
1980 के दशक से आसमान में ओज़ोन की मात्रा तेजी से घटने लगी, जिसे ‘ओज़ोन छिद्र’ कहा गया। इसका सबसे बड़ा कारण इंसानों द्वारा बनाया गया एक रसायन है, जिसका नाम है क्लोरोफ्लुओरो कार्बन (CFCs)।
इस गैस का उपयोग हमारे घरों के रेफ्रिजरेटर (फ्रिज), एयर कंडीशनर (AC) और अग्निशमन (आग बुझाने वाले) यंत्रों में किया जाता था। जब यह गैस हवा में उड़कर ऊपर जाती है, तो यह ओज़ोन को तोड़ देती है। इस खतरे को देखते हुए 1987 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने एक समझौता किया, जिसके तहत अब पूरी दुनिया में CFC-रहित (बिना CFC वाले) फ्रिज बनाना अनिवार्य कर दिया गया है।
कचरा प्रबंधन: हमारे कचरे का क्या होता है?
हमारी बदलती जीवनशैली के कारण आज कूड़े-कचरे की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ गई है। विज्ञान के अनुसार, कचरे को मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा जा सकता है:
1. जैव निम्नीकरणीय पदार्थ (Biodegradable)
वे पदार्थ जो जैविक प्रक्रमों (जीवाणुओं और कवकों) द्वारा आसानी से अपघटित हो जाते हैं (सड़ जाते हैं), जैव निम्नीकरणीय कहलाते हैं।
- उदाहरण: सब्जियों और फलों के छिलके, बचा हुआ भोजन, सूती कपड़ा और कागज। ये पदार्थ सड़कर वापस मिट्टी में मिल जाते हैं।
2. अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ (Non-biodegradable)
वे पदार्थ जो जीवाणुओं द्वारा अपघटित नहीं होते और लंबे समय तक पर्यावरण में ऐसे ही पड़े रहते हैं, अजैव निम्नीकरणीय कहलाते हैं।
- उदाहरण: प्लास्टिक, कांच, पॉलीथिन और कीटनाशक।
हमें क्या करना चाहिए?
हमारे शरीर के एंजाइम हर चीज को नहीं पचा सकते (जैसे हम कोयला या प्लास्टिक नहीं खा सकते), उसी तरह मिट्टी के जीवाणु भी प्लास्टिक को नहीं सड़ा सकते। इसलिए हमें जैव और अजैव कचरे को हमेशा अलग-अलग कूड़ेदानों में डालना चाहिए, और प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करना चाहिए ताकि हमारा पर्यावरण स्वच्छ और सुरक्षित रहे。
अब खेलें: ओज़ोन परत और कचरा प्रबंधन क्विज़
अब नीचे दिए गए ‘Play Quiz’ बटन पर क्लिक करें और ओज़ोन के निर्माण, CFCs के प्रभावों और अपशिष्ट प्रबंधन पर आधारित इन 20 महत्वपूर्ण विज्ञान प्रश्नों का अभ्यास करें!
Total Slides: 7
Total Questions: 20 | Total Marks: 36
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अध्याय 13 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- भाग 1: पारितंत्र क्या है और इसके मुख्य घटक कौन से हैं?
- भाग 2: आहार श्रृंखला, आहार जाल और ऊर्जा का प्रवाह कैसे होता है?
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