विज्ञान की हमारी कक्षा के चौथे भाग में आपका स्वागत है। पिछले भाग में हमने ‘संयोजन’ यानी जुड़ने के बारे में पढ़ा था। आज हम इसका ठीक उल्टा सीखने वाले हैं। जरा सोचिए, अगर आपके पास कोई बड़ा सा खिलौना हो और आप उसे खोलकर छोटे-छोटे हिस्सों में बाँट दें, तो क्या होगा? रसायन विज्ञान में भी बिल्कुल ऐसा ही होता है, जिसे हम वियोजन या अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction) कहते हैं।
परिभाषा: वह अभिक्रिया जिसमें कोई एक (एकल) अभिकारक टूटकर दो या दो से अधिक छोटे उत्पाद बनाता है, उसे वियोजन अभिक्रिया कहते हैं।
चूँकि किसी भी चीज को तोड़ने के लिए हमें किसी न किसी प्रकार की ताकत (ऊर्जा) लगानी पड़ती है, इसलिए रसायन विज्ञान में पदार्थों को तोड़ने के लिए हम मुख्य रूप से तीन प्रकार की ऊर्जा का उपयोग करते हैं: ऊष्मा (गर्मी), विद्युत (बिजली), और प्रकाश (धूप)। आइए इन्हें एक-एक करके समझते हैं।
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1. ऊष्मीय वियोजन (Thermal Decomposition)
जब किसी पदार्थ को तोड़ने के लिए ऊष्मा या गर्मी का उपयोग किया जाता है, तो उसे ऊष्मीय वियोजन कहते हैं।
उदाहरण: फेरस सल्फेट को गर्म करना
जब हम फेरस सल्फेट के हरे रंग के क्रिस्टल को गर्म करते हैं, तो उसका हरा रंग भूरे या लाल रंग में बदल जाता है और उसमें से सल्फर के जलने की गंध आती है।
2FeSO4(s) + ऊष्मा → Fe2O3(s) + SO2(g) + SO3(g)
यहाँ हरा फेरस सल्फेट टूटकर ठोस फेरिक ऑक्साइड और दो गैसों में बदल गया।
उदाहरण: चूना पत्थर को गर्म करना
CaCO3(s) + ऊष्मा → CaO(s) + CO2(g)
यह अभिक्रिया सीमेंट उद्योग में बहुत काम आती है!
2. वैद्युत वियोजन (Electrolytic Decomposition)
जब किसी पदार्थ के जलीय विलयन या पिघली हुई अवस्था में बिजली (विद्युत धारा) प्रवाहित करके उसे तोड़ा जाता है, तो उसे वैद्युत वियोजन कहते हैं।
उदाहरण: जल का विद्युत अपघटन
जब हम पानी में बिजली प्रवाहित करते हैं, तो वह अपने मूल तत्वों, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैस में टूट जाता है।
2H2O(l) + विद्युत ऊर्जा → 2H2(g) + O2(g)
3. प्रकाशीय वियोजन (Photolytic Decomposition)
जब कोई पदार्थ सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में टूट जाता है, तो उसे प्रकाशीय वियोजन कहते हैं।
उदाहरण: सिल्वर क्लोराइड का टूटना
यदि आप एक प्याली में थोड़ा सा सफ़ेद सिल्वर क्लोराइड (AgCl) लेकर धूप में रख दें, तो थोड़ी देर बाद उसका रंग धूसर (Grey) हो जाता है। ऐसा सूर्य के प्रकाश के कारण सिल्वर और क्लोरीन के अलग होने से होता है।
2AgCl(s) + सूर्य का प्रकाश → 2Ag(s) + Cl2(g)
1. “श्याम-श्वेत (Black and White) फोटोग्राफी में किस अभिक्रिया का उपयोग होता है?” – उत्तर है, सिल्वर क्लोराइड या सिल्वर ब्रोमाइड का प्रकाशीय वियोजन।
2. “सिल्वर क्लोराइड को गहरे रंग की बोतलों में क्यों रखा जाता है?” – ताकि वह सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आकर टूट न जाए!
ऊष्माशोषी अभिक्रियाएं (Endothermic Reactions)
अब एक बात पर गौर कीजिए। ऊपर दी गई तीनों वियोजन अभिक्रियाओं में हमने देखा कि पदार्थ को तोड़ने के लिए बाहर से ऊर्जा (ऊष्मा, प्रकाश या विद्युत) देनी पड़ी।
विज्ञान की भाषा में, जिन अभिक्रियाओं में अभिकारकों को तोड़ने के लिए ऊर्जा अवशोषित (सोखी) जाती है, उन्हें ऊष्माशोषी अभिक्रिया कहते हैं। इसलिए, हम कह सकते हैं कि लगभग सभी वियोजन अभिक्रियाएं वास्तव में ऊष्माशोषी अभिक्रियाएं ही होती हैं!
अब खेलें: वियोजन और ऊष्माशोषी क्विज़
यूपी बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान के वियोजन अभिक्रियाओं पर आधारित इस मजेदार क्विज़ को खेलें और अपनी तैयारी की जाँच करें!
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अध्याय 1 के अन्य महत्वपूर्ण भाग:
- भाग 1: रासायनिक अभिक्रियाओं की पहचान और विशेषताएं
- भाग 2: रासायनिक समीकरण लिखना और उन्हें संतुलित करना
- भाग 3: संयोजन और ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएं
- You are Reading Here: भाग 4: वियोजन (अपघटन) और ऊष्माशोषी अभिक्रियाएं
- भाग 5: विस्थापन और द्विविस्थापन अभिक्रियाएं
- भाग 6: उपचयन, अपचयन रेडॉक्स अभिक्रियाएं
- भाग 7: दैनिक जीवन में उपचयन के प्रभाव संक्षारण और विकृतगंधिता