भाग 1: अम्ल एवं क्षारक के रासायनिक गुणधर्म और अभिक्रियाएँ – UP Board Class 10 Science

क्या आपको पता है कि जो लोग देख नहीं सकते, वे विज्ञान की प्रयोगशाला में अम्ल और क्षारक की पहचान कैसे करते हैं? आप सोच रहे होंगे कि चखकर! लेकिन रसायनों को चखना या छूना तो बहुत खतरनाक हो सकता है, क्योंकि ये हमारी त्वचा को जला सकते हैं। असल में, हमारे आस-पास प्याज, लौंग के तेल और वैनिला जैसी कुछ ऐसी चीजें मौजूद होती हैं, जिनकी महक अम्ल या क्षारक के संपर्क में आते ही पूरी तरह से बदल जाती है।

आज के इस भाग में हम इन्हीं जादुई सूचकों और अम्ल-क्षारक की अन्य रसायनों के साथ होने वाली आपसी रासायनिक लड़ाइयों (अभिक्रियाओं) के बारे में बड़े ही आसान तरीके से जानेंगे।

सूचक: बिना छुए और चखे रसायनों की पहचान

हम जानते हैं कि लिटमस पेपर एक प्राकृतिक सूचक है, जो अम्ल के संपर्क में आने पर लाल और क्षारक के संपर्क में आने पर नीला हो जाता है। लेकिन विज्ञान की प्रयोगशालाओं में हम कुछ कृत्रिम सूचकों का भी उपयोग करते हैं, जैसे कि मेथिल ऑरेंज और फीनॉल्फथेलिन।

इसके अलावा, जैसा कि हमने ऊपर बात की, जिन पदार्थों की गंध अम्लीय या क्षारकीय माध्यम में बदल जाती है, उन्हें हम गंधीय सूचक कहते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आप प्याज के रस को क्षारक (जैसे सोडियम हाइड्रॉक्साइड) में मिलाते हैं, तो प्याज की महक अचानक से गायब हो जाती है!

धातुओं के साथ अम्ल की जादुई अभिक्रिया

क्या हो अगर हम किसी शक्तिशाली अम्ल में लोहे या जिंक के टुकड़े डाल दें? यह बहुत ही तेज अभिक्रिया होती है। जिंक धातु, सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) में से हाइड्रोजन को धक्के मारकर बाहर निकाल देती है और जिंक सल्फेट नाम का लवण बनाती है।

अम्ल + धातु → लवण + हाइड्रोजन गैस

👨‍🏫 शिक्षक की सलाह: बच्चों, हाइड्रोजन गैस को पहचानने का एक बहुत ही शानदार तरीका है। जब जिंक और अम्ल की अभिक्रिया से बुलबुले उठते हैं, तो उन बुलबुलों के पास एक जलती हुई मोमबत्ती ले जाइए। वह गैस तुरंत ‘फट-फट’ (Pop) की ध्वनि के साथ जलने लगेगी। बोर्ड परीक्षा में यह प्रयोग अक्सर पूछा जाता है!

धातु कार्बोनेट और अम्ल का टकराव

चूना पत्थर, खड़िया (Chalk) और संगमरमर, ये सभी कैल्सियम कार्बोनेट के ही अलग-अलग रूप हैं। यहाँ तक कि अंडे का बाहरी छिलका भी इसी का बना होता है। जब भी कोई अम्ल इन कार्बोनेट पदार्थों से टकराता है, तो उसमें से बहुत सारी कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस तेजी से बुलबुलों के रूप में बाहर निकलती है।

धातु कार्बोनेट + अम्ल → लवण + कार्बन डाइऑक्साइड + जल

अगर आप इस निकलने वाली CO2 गैस को चूने के पानी में प्रवाहित करेंगे, तो चूने का पानी बिल्कुल सफेद (दूधिया) हो जाएगा।

उदासीनीकरण: जब अम्ल और क्षारक एक दूसरे से टकराते हैं

अम्ल बहुत तीखे होते हैं और क्षारक बहुत कड़वे। लेकिन जब इन दोनों को एक निश्चित मात्रा में आपस में मिला दिया जाता है, तो ये दोनों एक-दूसरे की ताकत को पूरी तरह से नष्ट कर देते हैं। इस आपसी टकराव के बाद जो नया शांत पदार्थ बनता है, उसे हम लवण कहते हैं और साथ में पानी भी बनता है। इसी शांत करने वाली प्रक्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया कहा जाता है।

क्षारक + अम्ल → लवण + जल
NaOH(aq) + HCl(aq) → NaCl(aq) + H2O(l)

धात्विक ऑक्साइड की प्रकृति

जब कॉपर ऑक्साइड (काले रंग का पाउडर) में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिलाया जाता है, तो उस घोल का रंग अचानक से नीले-हरे रंग में बदल जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कॉपर क्लोराइड नाम का नया लवण बन जाता है। चूँकि धात्विक ऑक्साइड, अम्ल के साथ मिलकर लवण और जल बनाते हैं (बिल्कुल क्षारक की तरह), इसलिए हम कह सकते हैं कि धात्विक ऑक्साइड की प्रकृति क्षारकीय होती है।

अब खेलें: रासायनिक गुणधर्म और अभिक्रियाएँ क्विज़

यूपी बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान के इस विषय पर आधारित मजेदार क्विज़ को खेलें और अपनी तैयारी को और भी मजबूत करें!

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